कक्षा 12 हिंदी अंतरा भाग 2 अध्याय 2 सरोज स्मृति महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. निराला का जन्म कहाँ और कब हुआ?

उत्तर: निराला का जन्म बंगाल के मेदिनीपुर ज़िले के महिषादल गाँव में सन् 1898 में हुआ था।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. निराला का बचपन का नाम क्या था?

उत्तर: निराला के बचपन का नाम सूर्य कुमार था।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. सरोज स्मृति किस पर केंद्रित है?

उत्तर: सरोज स्मृति निराला की दिवंगत पुत्री सरोज पर केंद्रित है, यह बेटी के दिवंगत होने पर पिता का विलाप है।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. निराला किस छंद के प्रवर्तक माने जाते हैं?

उत्तर: निराला मुक्त छंद के प्रवर्तक माने जाते हैं।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. सरोज के प्रसंग में कवि किस साहित्यिक पात्र का स्मरण करते हैं?

उत्तर: कवि को कालिदास की नाट्यकृति ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ की नायिका शकुंतला का ध्यान आता है (‘वह शकुंतला’), पर वे तुरंत कहते हैं ‘पर पाठ अन्य यह, अन्य कला’।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. ‘दुख ही जीवन की कथा रही’ पंक्ति किस भाव को प्रकट करती है?

उत्तर: यह पंक्ति निराला के पूरे जीवन में मिले दुखों और उनकी गहरी वेदना को प्रकट करती है।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. निराला की शिक्षा के बारे में बताइए।

उत्तर: निराला की विधिवत स्कूली शिक्षा नवीं कक्षा तक ही हुई। पाठ्यपुस्तक के अनुसार पत्नी की प्रेरणा से उनकी साहित्य और संगीत में रुचि पैदा हुई।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. निराला की पत्नी का उनके जीवन और साहित्य पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: पत्नी की प्रेरणा से निराला की साहित्य और संगीत में रुचि पैदा हुई। सन् 1918 में उनकी पत्नी का देहांत हो गया, और उसके बाद पिता, चाचा, चचेरे भाई एक-एक कर चल बसे। पाठ्यपुस्तक के अनुसार अपने जीवन में निराला ने मृत्यु का जैसा साक्षात्कार किया था, उसकी अभिव्यक्ति उनकी कई कविताओं में दिखाई देती है।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. सरोज का विवाह अन्य विवाहों से किस प्रकार भिन्न था?

उत्तर: सरोज का विवाह बिना किसी आत्मीय स्वजन और बिना आमंत्रण के हुआ (‘आत्मीय स्वजन, कोई थे नहीं, न आमंत्रण था भेजा गया’), और घर में विवाह का उत्सव-राग दिन-रात जागकर नहीं भर रहा था (‘विवाह-राग भर रहा न घर निशि-दिवस जाग’)।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. ‘आकाश बदल कर बना मही’ पंक्ति का क्या अर्थ है?

उत्तर: जो सुंदरता (शृंगार) अब तक कवि की कविता में केवल अमूर्त भाव के रूप में थी, वह अब आकाश से बदलकर धरती (मही) जैसे साकार रूप में, यानी बेटी सरोज के रूप में वास्तविक जीवन में प्रकट हो गई।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. सरोज का बचपन कैसे बीता?

उत्तर: सरोज का बचपन ननिहाल में बीता: ‘वह लता वहीं की, जहाँ कली तू खिली, स्नेह से हिली, पली’। वहाँ मामा-मामी का प्यार उस पर बादल की तरह अपार बरसा, और वे ही उसके सुख-दुख में सदा निहित (न्यस्त) रहे। विवाह के बाद भी वह कुछ दिन घर रहकर प्रसन्नतापूर्वक (समोद) नानी की स्नेह-गोद में लौट आई, और अंत भी उसी गोद में हुआ।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. निराला अपनी बेटी की शिक्षा को लेकर किस स्थिति में थे और क्यों?

उत्तर: पद 2 में पत्नी को ‘स्वर्गीया-प्रिया’ कहा गया है, यानी विवाह के समय सरोज की माँ जीवित नहीं थीं। कवि कहते हैं ‘माँ की कुल शिक्षा मैंने दी’, यानी एक माँ जो शिक्षा देती, वह निराला ने स्वयं अपनी बेटी सरोज को दी। उन्होंने उसकी पुष्प-सेज भी स्वयं रची।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. सरोज स्मृति कविता को ‘अंश’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर: सरोज स्मृति निराला की एक प्रसिद्ध शोक-कविता है और यह इस पाठ्यपुस्तक में छपे हिस्से से कहीं बड़ी है। पाठ्यपुस्तक में इसके 4 पद (48 पंक्तियाँ) छपे हैं, और कविता के अंत में स्वयं ‘(सरोज स्मृति कविता का अंश)’ छपा है।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. पद 1 में कवि ने अपनी बेटी के विवाह के समय के किन भावों का वर्णन किया है?

उत्तर: कवि सरोज की मंद हँसी, उसके होठों में बिजली जैसे फँसे कंपन, हृदय में झूलती प्रिय की छवि, और विश्वास से भरे उसके स्तब्ध शरीर का वर्णन करते हैं। कवि यह दृश्य देखते हैं (‘देखा मैंने, वह मूर्ति-धीति’) और नव-वधू को अपने वसंत की पहली गीति मानते हैं (‘मेरे वसंत की प्रथम गीति’)।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. सरोज के नव-वधू रूप का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर: सरोज का विवाह उसके जीवन का बिलकुल नया अनुभव था, विवाह की रस्म में शुभ कलश का जल उस पर डाला गया। वह अपने पिता को देखकर हल्की मुस्कान दे रही थी, उसके होठों पर बिजली जैसा हल्का कंपन था। उसके हृदय में अपने प्रिय (पति) की सुंदर छवि झूल रही थी, यह सुंदरता शब्दों में नहीं बल्कि उसकी खामोश भाव-भंगिमा में ही प्रकट हो रही थी। वह एक ही साँस में मानो खुल उठी, विश्वास से उसका पूरा शरीर स्थिर था, और उसकी झुकी आँखों से उतरती चमक उसके काँपते होठों तक पहुँच रही थी। कवि इस दृश्य को देखते हैं (‘देखा मैंने, वह मूर्ति-धीति’; धीति = प्यास, पान) और उसे अपने वसंत की पहली गीति कहते हैं (‘मेरे वसंत की प्रथम गीति’)।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. कवि को अपनी स्वर्गीया पत्नी की याद क्यों आई?

उत्तर: कवि को अपनी बेटी सरोज के विवाह के अवसर पर अपनी दिवंगत (स्वर्गीय) पत्नी की याद आई, क्योंकि बेटी के रूप-रंग में उन्हें अपनी पत्नी का ही रूप-रंग दिखाई देता था। जो सुंदरता (शृंगार) अब तक अमूर्त भाव में, केवल कविता में बहती भावधारा के रूप में थी, वही अब अपनी स्वर्गीय प्रिया की याद के साथ गाई जा रही थी। इस तरह सरोज के विवाह के दृश्य में कवि को अपनी पत्नी की स्मृति स्वाभाविक रूप से जुड़ गई।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. ‘वह लता वहीं की, जहाँ कली तू खिली’ पंक्ति के द्वारा किस प्रसंग को उद्घाटित किया गया है?

उत्तर: इस पंक्ति के द्वारा सरोज के पालन-पोषण के प्रसंग को उद्घाटित किया गया है। सरोज का पालन-पोषण नानी के घर और मामा-मामी के अपार स्नेह में हुआ; वहाँ वह लता (बेल) की एक कली की तरह खिली, स्नेह से हिली-पली। कविता यह नहीं बताती कि वह वहाँ किस कारण रही। कवि यह भी बताते हैं कि सरोज का अंत भी नानी की उसी गोद में हुआ (‘अंत भी उसी गोद में शरण ली, मूँदे दृग वर महामरण!’)। इस तरह यह पंक्ति सरोज के जीवन के आरंभ और अंत, दोनों को नानी की उसी स्नेह-गोद से जोड़ती है।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. निराला के जीवन-संघर्ष का वर्णन सरोज स्मृति के आलोक में कीजिए।

उत्तर: निराला का पूरा जीवन कष्टों से भरा रहा। बहुत छोटी आयु में ही उनकी माँ का निधन हो गया। पत्नी का देहांत सन् 1918 में हुआ, इसके बाद पिता, चाचा और चचेरे भाई भी एक-एक कर चल बसे। वे जीवनभर पारिवारिक और आर्थिक कष्टों से जूझते रहे, और स्वाभिमानी स्वभाव के कारण कहीं टिककर काम नहीं कर पाए। अंत में पुत्री सरोज की मृत्यु ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। सरोज स्मृति में वे स्वयं कहते हैं ‘दुख ही जीवन की कथा रही, क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!’, जो उनके पूरे जीवन के संघर्ष और सहे गए दुखों का सार है।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. सरोज स्मृति में व्यक्त पिता के अकर्मण्यता-बोध को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कविता में एक भाग्यहीन पिता का संघर्ष और पुत्री के प्रति बहुत कुछ न कर पाने का अकर्मण्यता-बोध (कुछ न कर पाने का एहसास) प्रकट होता है। पद 4 में कवि कहते हैं कि उनके इसी कर्म पर भले ही वज्रपात हो, यदि यही धर्म है तो इस पथ पर उनका माथा सदा झुका रहे, और उनके सारे कार्य शीत से नष्ट कमलों की तरह भ्रष्ट हो जाएँ। अंत में वे अपने गत कर्मों का अर्पण करके बेटी का तर्पण करते हैं। इसे पिता की अपनी असमर्थता की स्वीकृति के रूप में पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. निराला और शकुंतला के प्रसंग की तुलना करते हुए स्पष्ट करें कि सरोज का ‘पाठ’ शकुंतला से किस प्रकार भिन्न था।

उत्तर: निराला सरोज के विवाह के प्रसंग में मन में सोचते हैं ‘वह शकुंतला’। पाठ यह नहीं बताता कि उन्हें शकुंतला का ध्यान क्यों आया; पाठ से बाहर की जानकारी यह है कि शकुंतला कण्व ऋषि के आश्रम में पली थी। लेकिन कवि तुरंत कहते हैं ‘पर पाठ अन्य यह, अन्य कला’, यानी सरोज का पाठ और कला शकुंतला से अलग है। कविता यह अंतर विस्तार से नहीं बताती; पाठ्यपुस्तक ‘कला’ शब्द का अर्थ भी स्पष्ट नहीं करती।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. सरोज स्मृति में प्रयुक्त प्रमुख अलंकारों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कविता में कई अलंकार मिलते हैं। ‘आकाश बदल कर बना मही’ में रूपक अलंकार है, जहाँ अमूर्त भाव को सीधे किसी वस्तु के रूप में बता दिया गया है। ‘मेरे कार्य सकल हों भ्रष्ट शीत के-से शतदल’ में उपमा अलंकार है, कवि के कार्यों की तुलना ठंड से मुरझाए कमल से की गई है। ‘वह लता वहीं की, जहाँ कली तू खिली’ में भी रूपक अलंकार है, सरोज की तुलना कली से और परिवार की तुलना लता से की गई है। इसके अलावा ‘होठों में बिजली फँसी स्पंद’ में बिजली और होठों के कंपन को जोड़कर एक सजीव बिंब बनाया गया है।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. ‘मुझ भाग्यहीन की तू संबल’ निराला की यह पंक्ति क्या ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे कार्यक्रम की माँग करती है? चर्चा कीजिए।

उत्तर: हाँ, यह पंक्ति परोक्ष रूप से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे कार्यक्रम की माँग करती है। निराला कहते हैं कि उनकी बेटी सरोज उनके भाग्यहीन जीवन का सहारा (संबल) थी, यानी एक बेटी अपने पिता के लिए शक्ति और आधार बन सकती है। यह भाव बेटियों के परिवार में सहारा होने की ओर संकेत करता है। इसीलिए बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कार्यक्रम ज़रूरी हैं, ताकि हर बेटी को अपनी क्षमता दिखाने और अपने परिवार का संबल बनने का पूरा मौका मिल सके। (कविता सरोज की मृत्यु का कारण नहीं बताती।) आज के समाज में बेटियों की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य-सुविधा और सुरक्षा की आवश्यकता इस भाव से जुड़ती है।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए: (क) नत नयनों से आलोक उतर (ख) शृंगार रहा जो निराकार (ग) पर पाठ अन्य यह, अन्य कला (घ) यदि धर्म, रहे नत सदा माथ

उत्तर: (क) इस पंक्ति में सरोज की झुकी हुई आँखों से एक चमक (आलोक) उतरने का वर्णन है, जो उसके संकोच और सौंदर्य दोनों को दर्शाती है। (ख) यह उस सुंदरता (शृंगार) की बात करती है जो अब तक बिना किसी आकार के, यानी केवल कवि की कल्पना और कविता में ही थी। (ग) कवि मन में सोचते हैं ‘वह शकुंतला’, पर तुरंत कहते हैं कि सरोज का पाठ और कला अलग है; पाठ इस अंतर का ब्योरा नहीं देता। (घ) कवि कहते हैं कि मेरे इसी कर्म पर भले ही वज्रपात (भारी विपत्ति) हो; यदि यही धर्म है, तो इस पथ पर मेरा माथा सदा झुका रहे, यानी वे अपने कर्तव्य-पथ पर आने वाले हर दुख को सिर झुकाकर स्वीकार करते हैं, भले ही उनके सारे कार्य शीत से नष्ट कमलों (शतदल) की तरह भ्रष्ट हो जाएँ। इसमें उनकी गहरी वेदना झलकती है।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. सरोज स्मृति कविता के आधार पर निराला के व्यक्तित्व और उनके पिता के रूप की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर: निराला एक अत्यंत संवेदनशील, भावुक पिता के रूप में सामने आते हैं। पत्नी के स्वर्गीया होने पर उन्होंने स्वयं बेटी को माँ की कुल शिक्षा दी और उसकी पुष्प-सेज स्वयं रची, जो उनके समर्पण को दर्शाता है। वे स्वयं को ‘भाग्यहीन’ कहते हैं और कहते हैं ‘दुख ही जीवन की कथा रही’; कवि-परिचय के अनुसार वे जीवनभर पारिवारिक और आर्थिक कष्टों से जूझते रहे। वे कहते हैं कि उनके इसी कर्म पर भले ही वज्रपात हो, वे धर्म-पथ पर सदा सिर झुकाए रहेंगे। बेटी के प्रति उनका अपार स्नेह भी दिखता है; उन्हें सरोज के प्रसंग में शकुंतला का ध्यान आता है। अंत में वे अपने गत कर्मों का अर्पण कर बेटी का तर्पण करते हैं। पाठ्यपुस्तक के अनुसार इस कविता में पुत्री के प्रति बहुत कुछ न कर पाने का अकर्मण्यता-बोध भी प्रकट हुआ है। यह सब मिलकर एक ऐसे पिता की छवि बनाते हैं जो अभावों के बावजूद अपनी बेटी से गहरा प्रेम करता था।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. सरोज स्मृति के चारों पदों का सार अपने शब्दों में प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: पद 1 में कवि अपनी बेटी सरोज के विवाह का दृश्य स्मरण करते हैं, जहाँ वह मंद हँसी के साथ दिखती है, और कवि उसे ‘मेरे वसंत की प्रथम गीति’ कहते हैं। पद 2 में बताया गया है कि यह विवाह बहुत सादा था, बिना किसी आत्मीय स्वजन या आमंत्रण के, फिर भी भावनाओं से भरा हुआ था, और इसमें कवि को अपनी स्वर्गीय पत्नी की भी याद आती है। पद 3 में कवि बताते हैं कि माँ की कुल शिक्षा उन्होंने स्वयं दी, उन्हें शकुंतला का ध्यान आता है (‘पर पाठ अन्य यह, अन्य कला’), फिर सरोज नानी-मामा-मामी के स्नेह में पली, और अंततः नानी की उसी गोद में उसका अंत हुआ। पद 4 में कवि कहते हैं ‘दुख ही जीवन की कथा रही, क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!’, और अपने गत कर्मों का अर्पण करके अपनी बेटी का अंतिम तर्पण (देवताओं, ऋषियों और पितरों को तिल या तंडुलमिश्रित जल देने की क्रिया) करते हैं।

प्रश्न 5 (6 अंक)

प्र. सरोज स्मृति में करुण रस की सृष्टि किस प्रकार हुई है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: सरोज स्मृति में करुण रस की सृष्टि पिता के गहरे विलाप से हुई है। पद 4 में ‘दुख ही जीवन की कथा रही, क्या कहूँ आज, जो नहीं कही’ पंक्ति में कवि का पूरा जीवन दुखों से भरा दिखता है, जो पाठक के मन में गहरी करुणा जगाता है। ‘हो इसी कर्म पर वज्रपात, यदि धर्म, रहे नत सदा माथ’ में कवि अपने ही कर्म पर वज्रपात को भी सिर झुकाकर स्वीकार करने की बात कहते हैं, जो उनके असहाय पिता-भाव को दर्शाता है। अंतिम पंक्तियों ‘कन्ये, गत कर्मों का अर्पण कर, करता मैं तेरा तर्पण’ में एक पिता द्वारा अपनी मृत बेटी को दी जाने वाली अंतिम विदाई का दृश्य पाठक को भावुक कर देता है। इस प्रकार शब्द-चयन, स्वर और भाव, तीनों मिलकर पूरी कविता में करुण रस की गहरी अनुभूति कराते हैं।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
सरोज स्मृति सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की एक प्रसिद्ध शोक-कविता (एलिजी) है, जो उन्होंने अपनी दिवंगत पुत्री सरोज की स्मृति में लिखी। कविता में कवि को कभी कालिदास की नायिका शकुंतला की याद आती है, तो कभी अपनी स्वर्गीय पत्नी की याद में डूब जाते हैं। विवाह के समय माँ की कुल शिक्षा पिता ने स्वयं दी; सरोज नानी के घर, मामा-मामी के स्नेह में पली, और अंततः नानी की उसी गोद में उसका अंत भी हुआ।

(क) 1 अंक सरोज स्मृति किस विधा की रचना है?
उत्तर: सरोज स्मृति एक शोक-कविता (एलिजी/शोकगीत) है।

(ख) 1 अंक सरोज के प्रसंग में कवि को किस नायिका की याद आती है?
उत्तर: कवि को कालिदास की नायिका शकुंतला की याद आती है (‘वह शकुंतला’), पर वे सरोज को अलग बताते हैं (‘पर पाठ अन्य यह, अन्य कला’)।

(ग) 2 अंक सरोज का पालन-पोषण किसने किया?
उत्तर: सरोज का पालन-पोषण ननिहाल में, नानी और मामा-मामी के स्नेह में हुआ; विवाह के समय माँ की कुल शिक्षा पिता (निराला) ने स्वयं दी।

(घ) 2 अंक सरोज का अंत कहाँ हुआ और इसका क्या महत्व है?
उत्तर: सरोज का अंत नानी की उसी गोद में हुआ जहाँ वह पली थी (‘अंत भी उसी गोद में शरण ली’); इस तरह उसका बचपन और अंत नानी की एक ही स्नेह-गोद से जुड़े।

केस स्टडी
निराला का जीवन कठिनाइयों से भरा रहा। पत्नी का देहांत सन् 1918 में हुआ, इसके बाद पिता, चाचा और चचेरे भाई भी एक-एक कर चल बसे। वे जीवनभर पारिवारिक और आर्थिक कष्टों से जूझते रहे, और अपने स्वाभिमानी स्वभाव के कारण कहीं टिककर काम नहीं कर पाए। अंत में पुत्री सरोज की मृत्यु ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, और यह सारी वेदना उनकी कविता सरोज स्मृति में उभर कर आई।

(क) 1 अंक निराला की पत्नी का देहांत किस वर्ष हुआ?
उत्तर: निराला की पत्नी का देहांत सन् 1918 में हुआ।

(ख) 1 अंक निराला अपने स्वभाव के कारण कैसे प्रभावित हुए?
उत्तर: अपने स्वाभिमानी स्वभाव के कारण निराला कहीं टिककर काम नहीं कर पाए।

(ग) 2 अंक निराला के परिवार में किन-किन सदस्यों का देहांत हुआ, क्रम से बताइए।
उत्तर: पहले बहुत छोटी आयु में माँ का निधन हुआ, फिर पत्नी का देहांत (1918), फिर पिता, चाचा और चचेरे भाई एक-एक कर चल बसे, और अंत में पुत्री सरोज की मृत्यु हुई।

(घ) 2 अंक निराला के निजी जीवन का प्रभाव उनकी कविता सरोज स्मृति में किस प्रकार दिखता है?
उत्तर: उनके जीवन की वेदना और दुख सरोज स्मृति में एक पिता के विलाप के रूप में व्यक्त हुई है, विशेषकर पद 4 की पंक्ति ‘दुख ही जीवन की कथा रही’ में।