कक्षा 12 इतिहास अध्याय 2 राजा, किसान और नगर महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. अभिलेखशास्त्र (epigraphy) की परिभाषा दीजिए।

उत्तर: अभिलेखशास्त्र अभिलेखों (inscriptions), यानी पत्थर, धातु या मिट्टी के बर्तन जैसी कठोर सतहों पर उकेरे गए लेखों, का अध्ययन है।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों को किसने और कब समझा?

उत्तर: ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी जेम्स प्रिंसेप ने 1830 के दशक में इन लिपियों का अर्थ निकाला; असोककालीन ब्राह्मी लिपि का अर्थ 1838 ई. में निकाला गया।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. ‘जनपद’ शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर: जनपद का अर्थ है वह भूमि जहाँ कोई जन, यानी लोग, कुल या जनजाति, पैर रखता या बसता है।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. मौर्य साम्राज्य के पाँच प्रमुख राजनीतिक केंद्रों के नाम लिखिए।

उत्तर: राजधानी पाटलिपुत्र, और प्रांतीय केंद्र तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि और सुवर्णगिरि।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. अग्रहार क्या था?

उत्तर: अग्रहार वह भूमि थी जो किसी ब्राह्मण को अनुदान में दी जाती थी, प्रायः भूमि-राजस्व चुकाने से छूट के साथ।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. प्रयाग प्रशस्ति की रचना किसने की, और किस शासक के बारे में?

उत्तर: इसकी रचना समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण ने समुद्रगुप्त की प्रशंसा में की।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. गण या संघ क्या थे, और इनसे जुड़े दो प्रसिद्ध पुरुषों के नाम बताइए।

उत्तर: गण या संघ कुलीनतंत्र थे, जिनमें सत्ता कई पुरुषों में बँटी होती थी और उन सबको सामूहिक रूप से राजा कहा जाता था। महावीर और बुद्ध, दोनों ऐसे ही गणों से थे।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. गहपति को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: गहपति किसी परिवार का स्वामी, मुखिया या प्रधान होता था, जो स्त्रियों, बच्चों, दासों और श्रमिकों पर नियंत्रण रखता और परिवार के संसाधनों का स्वामी होता था; यह नगरीय अभिजात वर्ग के पुरुषों के लिए भी दर्जा-सूचक प्रयुक्त होता था।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. श्रेणियाँ क्या थीं, और वे क्या करती थीं?

उत्तर: श्रेणियाँ शिल्प-उत्पादकों और व्यापारियों के संगठन थीं, जो संभवतः कच्चा माल जुटातीं, उत्पादन को नियमित करतीं और तैयार माल बेचती थीं।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. रोपाई (transplantation) क्या है, और इसने धान की उपज कैसे बढ़ाई?

उत्तर: रोपाई में पहले बीज बिखेरे जाते हैं; जब पौध बड़ी हो जाती है तो उसे जलभराव वाले खेतों में रोपा जाता है। चूँकि ज़्यादा मात्रा में पौध बच जाती है, इससे धान की उपज बढ़ जाती है, और गंगा घाटी के कुछ भागों में धान का उत्पादन नाटकीय रूप से बढ़ाया, यद्यपि यह उत्पादक के लिए अत्यंत श्रमसाध्य काम था।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. खरोष्ठी लिपि कैसे समझी गई?

उत्तर: उत्तर-पश्चिम पर शासन करने वाले हिंद-यूनानी राजाओं के सिक्कों पर एक ही राजकीय नाम यूनानी और खरोष्ठी दोनों में अंकित थे, इसलिए यूनानी पढ़ सकने वाले विद्वानों ने अक्षरों की तुलना की, जैसे अपोलोडोटस नाम में ‘अ’ का प्रतीक दोनों लिपियों में मिला, और इस तरह खरोष्ठी समझी गई।

3 3 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (3 अंक)

प्र. महाजनपदों की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर: प्रत्येक महाजनपद की एक राजधानी होती थी, जो प्रायः दुर्गीकृत होती थी, क्योंकि दुर्ग, सेनाएँ और आरंभिक नौकरशाही सबमें धन लगता था। दो प्रकार के राज्य थे: राजतंत्र, जिसमें एक ही राजा शासन करता था (आदर्श रूप से क्षत्रिय), और गण या संघ, जिसमें सत्ता कई पुरुषों में बँटी होती थी। लगभग छठी शताब्दी ई.पू. से ब्राह्मणों ने धर्मशास्त्र नामक ग्रंथ रचे, जिनमें राजाओं को कृषकों, व्यापारियों और शिल्पियों से कर व भेंट वसूलने की सलाह दी गई; पड़ोसी राज्यों पर छापा मारना धन प्राप्त करने का एक मान्य तरीका माना जाता था।

प्रश्न 2 (3 अंक)

प्र. मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद क्यों बना? इतिहासकारों और आरंभिक लेखकों, दोनों की व्याख्याएँ दीजिए।

उत्तर: आधुनिक इतिहासकार भूगोल की ओर इशारा करते हैं: उपजाऊ कृषि, आज के झारखंड में आसानी से उपलब्ध लोहे की खदानें, जिनसे उपकरण और हथियार बनाना सरल था, जंगली क्षेत्रों में हाथी जो सेना के महत्वपूर्ण अंग थे, और गंगा व उसकी सहायक नदियाँ जो सस्ता संचार देती थीं। आरंभिक बौद्ध और जैन लेखक इसके विपरीत व्यक्तियों की ओर इशारा करते हैं: अत्यंत महत्त्वाकांक्षी राजाओं की नीतियाँ, जिनमें बिंबिसार, अजातसत्तु और महापद्म नंद सबसे जाने-माने हैं।

प्रश्न 3 (3 अंक)

प्र. असोक का धम्म क्या था, और उसने इसे फैलाने का प्रयास कैसे किया?

उत्तर: असोक के धम्म में बड़ों के प्रति सम्मान, ब्राह्मणों और सांसारिक जीवन त्यागने वालों के प्रति उदारता, दास-सेवकों के प्रति दयालु व्यवहार, और अन्य धर्मों-परंपराओं के प्रति सम्मान शामिल था। उसने इसे फैलाने के लिए संदेश शिलाओं और पॉलिशदार स्तंभों पर उकेरवाए, और प्रचार के लिए धम्म महामात्त नामक विशेष अधिकारी नियुक्त किए।

प्रश्न 4 (3 अंक)

प्र. सिलप्पादिकारम् की भेंट-सूची का प्रयोग करते हुए सरदार और राजा में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: सिलप्पादिकारम् में सरदार सेनगुत्तुवन को हाथीदाँत, सुगंधित लकड़ी, चंदन, मसाले, फल और पशु-पक्षी जैसी वन व पहाड़ की उपज भेंट के रूप में दी जाती है, जिसे सरदार अपने समर्थकों में पुनर्वितरित करता है। इसके विपरीत, राजा प्रजा से नियमित कर वसूलते थे, जो कोई भेंट नहीं बल्कि एक स्थापित, अनिवार्य माँग होती थी; सरदारियों में सामान्यतः स्थायी सेनाएँ या अधिकारी भी नहीं होते थे।

प्रश्न 5 (3 अंक)

प्र. इतिहासकार इस काल के आम लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण कैसे करते हैं?

उत्तर: अभिलेख इसका उत्तर नहीं देते, क्योंकि आम लोगों ने अपने विचारों के वृत्तांत शायद ही कभी छोड़े। इतिहासकार जातक और पंचतंत्र जैसे संग्रहों की कहानियों से इसका हल निकालते हैं, जो संभवतः लोकप्रिय मौखिक कथाएँ थीं जिन्हें बाद में लिखा गया, जैसे गंदतिन्दु जातक जो एक दुष्ट राजा की प्रजा का वर्णन करता है।

प्रश्न 6 (3 अंक)

प्र. सुदर्शन झील अभिलेख हमें शासकों और सिंचाई के बारे में क्या बताता है?

उत्तर: यह गुजरात के एक कृत्रिम जलाशय का वर्णन करता है, जो मौर्य काल में एक स्थानीय राज्यपाल द्वारा बनवाया गया था। एक तूफ़ान ने बाँध तोड़ दिए, और शक शासक रुद्रदमन ने दावा किया कि उसने प्रजा पर कोई कर लगाए बिना, अपने संसाधनों से इसकी मरम्मत करवाई। यह दिखाता है कि सिंचाई-अभिलेख तटस्थ विवरण नहीं होते, बल्कि शासक द्वारा अपनी उदारता का प्रचार होते हैं।

प्रश्न 7 (3 अंक)

प्र. अभिलेखशास्त्रियों के सामने आने वाली कुछ समस्याओं की सूची बनाइए।

उत्तर: अक्षर कभी-कभी बहुत हल्के उकेरे गए होते हैं, इसलिए पुनर्निर्माण अनिश्चित रहते हैं; अभिलेख क्षतिग्रस्त हो सकते हैं या उनमें अक्षर लुप्त हो सकते हैं; शब्दों का सटीक अर्थ हमेशा स्पष्ट नहीं होता; और अब तक खोजे गए कई हज़ार अभिलेखों में से सभी को समझा, प्रकाशित या अनूदित नहीं किया गया है।

प्रश्न 8 (3 अंक)

प्र. दक्षिण भारत और रोमन साम्राज्य के बीच दूर-व्यापार के क्या प्रमाण हैं?

उत्तर: पेरिप्लस ऑफ़ द एरीथ्रियन सी मलाबार तट का वर्णन करता है, जहाँ विदेशी व्यापारी भारी मात्रा में काली मिर्च और दाल चीनी खरीदने के लिए जहाज़ भेजते थे। दक्षिण भारत के स्थलों पर रोमन सिक्कों के भंडार मिले हैं, जो कभी रोमन साम्राज्य का हिस्सा नहीं था, यही अध्याय का सबसे स्पष्ट प्रमाण है कि व्यापार-जाल राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं थे।

4 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. उत्पादन बढ़ाने की तीन रणनीतियों (हल-कृषि, रोपाई, सिंचाई) की तुलना कीजिए: इनमें क्या शामिल था और ये कहाँ फैलीं?

उत्तर: हल-कृषि में लोहे की नोक वाला हल-फल जलोढ़ मिट्टी को पलटता था, गंगा-कावेरी जैसी उपजाऊ नदी घाटियों में सफल रहा, पर पंजाब-राजस्थान के अर्ध-शुष्क भागों में बीसवीं सदी तक नहीं अपनाया गया। रोपाई में पौध जलभराव वाले खेतों में रोपी जाती थी, जिससे गंगा घाटी में धान की उपज नाटकीय रूप से बढ़ी, पर यह अत्यंत श्रमसाध्य थी। सिंचाई कुओं और तालाबों, और कम सामान्यतः नहरों से होती थी, समुदायों और व्यक्तियों दोनों द्वारा आयोजित, जिनमें शक्तिशाली पुरुष और राजा भी शामिल थे।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. मौर्य साम्राज्य कितना महत्वपूर्ण था, इसके दोनों पक्षों की जाँच कीजिए।

उत्तर: इसे मील का पत्थर मानने के कारण: उन्नीसवीं सदी के भारतीय इतिहासकारों ने आरंभिक साम्राज्य के विचार को रोमांचक पाया, मौर्य पाषाण-मूर्तिकला को साम्राज्यों की भव्य कला माना गया, और असोक का संदेश अन्य शासकों से भिन्न व अधिक विनम्र लगा। इसे सीमित मानने के कारण: यह केवल लगभग 150 वर्ष चला, पूरे उपमहाद्वीप को नहीं ढका, नियंत्रण अपनी सीमाओं के भीतर भी एक समान नहीं था, और दूसरी शताब्दी ई.पू. तक कई नए राज्य उभर चुके थे।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. भूमिदान राजसत्ता के बारे में क्या बताते हैं, इस पर इतिहासकारों की बहस स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: एक दृष्टिकोण के अनुसार भूमिदान शक्ति दर्शाते हैं: शासक वंश कृषि को नए क्षेत्रों में फैलाने की रणनीति के तहत अनुदान देते थे, छोटे भूखंडों से लेकर बंजर भूमि के विशाल विस्तार तक। दूसरे दृष्टिकोण के अनुसार भूमिदान कमज़ोरी दर्शाते हैं: राजनीतिक शक्ति कमज़ोर होने का संकेत, जब सामंतों पर नियंत्रण खोते राजा भूमि देकर सहयोगी जीतने का प्रयास करते थे, और इसी दृष्टि से राजाओं ने प्रशस्तियों में स्वयं को अतिमानव के रूप में इसलिए प्रस्तुत किया क्योंकि वे नियंत्रण खो रहे थे।

5 5 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (5 अंक)

प्र. मौर्य प्रशासन की मुख्य विशेषताओं की चर्चा कीजिए। आपके द्वारा पढ़े गए असोक अभिलेखों में इनमें से कौन-सी स्पष्ट हैं?

उत्तर: मौर्य प्रशासन के पाँच राजनीतिक केंद्र थे: राजधानी पाटलिपुत्र और प्रांतीय केंद्र तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि और सुवर्णगिरि, जिनका चयन दूर-व्यापार मार्गों और संसाधनों (जैसे सोने की खदानों) को ध्यान में रखकर हुआ था। कोई एक समान प्रशासन नहीं था; नियंत्रण राजधानी और प्रांतीय केंद्रों के आसपास सबसे मज़बूत था, और संचार में हफ़्तों-महीनों लगते थे। मेगस्थनीज़ एक समिति का वर्णन करता है जिसकी छह उपसमितियाँ सैन्य गतिविधियाँ समन्वित करती थीं (नौसेना, परिवहन-रसद, पैदल, घुड़सवार, रथ, हाथी)। असोक ने इसे धम्म और धम्म महामात्तों से जोड़े रखा। उसके अभिलेखों में यह स्पष्ट है कि पाँचों केंद्रों के आसपास और मार्गों पर अभिलेख उत्कीर्ण कराए गए, और धम्म-प्रचार की व्यवस्था (पतिवेदक, धम्म महामात्त) भी उनमें दर्ज है।

प्रश्न 2 (5 अंक)

प्र. मौर्योत्तर काल में विकसित हुई राजसत्ता की अवधारणाओं की चर्चा कीजिए।

उत्तर: दक्षिण के सरदारी (चोल, चेर, पांड्य) भेंट पर आधारित थे, जबकि सातवाहन और शक जैसे शासक दूर-व्यापार से राजस्व पाते थे और अस्पष्ट सामाजिक उत्पत्ति से शक्तिशाली बनकर सामाजिक प्रतिष्ठा का दावा करते थे। कुषाणों ने दैविक राजसत्ता अपनाई: विशाल मूर्तियाँ, देवपुत्र उपाधि, और सिक्कों पर राजा के साथ देवता का चित्र। चौथी शताब्दी से गुप्त जैसे बड़े राज्य सामंतों पर निर्भर हो गए, जो श्रद्धांजलि-सैन्य सहायता देते थे; प्रयाग प्रशस्ति जैसी संस्कृत प्रशस्तियों में राजा को देवताओं के समान अतिमानव के रूप में प्रस्तुत किया गया, संभवतः इसलिए क्योंकि राजा नियंत्रण खो रहे थे।

प्रश्न 3 (5 अंक)

प्र. लगभग 600 ई.पू. से 600 ई. की अवधि में कृषि-प्रथाएँ कितनी बदलीं?

उत्तर: छठी शताब्दी ई.पू. से लोहे की नोक वाला हल-फल गंगा-कावेरी घाटियों में फैला, पर पंजाब-राजस्थान के अर्ध-शुष्क भागों और पहाड़ी इलाक़ों में कुदाल-कृषि ही चलती रही। रोपाई ने धान की उपज नाटकीय रूप से बढ़ाई, यद्यपि यह श्रमसाध्य थी। सिंचाई (कुएँ, तालाब, नहरें) समुदायों और राजाओं सहित व्यक्तियों द्वारा आयोजित हुई। इन तकनीकों से लाभ असमान रूप से बँटा, जिससे गहपति, वेल्लालर, उल्वर और अणिमई जैसे भेद उभरे, और ईसा की आरंभिक शताब्दियों से भूमिदान शुरू हुए, जिन्होंने अग्रहार जैसी नई ग्रामीण अभिजात संरचनाएँ बनाईं।

6 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. डी.सी. सरकार ने लिखा कि ‘भारतीयों के जीवन, संस्कृति और गतिविधियों का ऐसा कोई पहलू नहीं जो अभिलेखों में प्रतिबिंबित न हो।’ चर्चा कीजिए।

उत्तर: सहमति में: अभिलेख राजाओं की विजयों (असोक के कलिंग-अभिलेख), भूमिदान (प्रभावती गुप्त का दंगुन-अनुदान), धार्मिक दान (दानात्मक अभिलेख), प्रशासन (सुदर्शन झील अभिलेख), व्यापार व श्रेणियों, और सामाजिक भेद (गहपति, वेल्लालर) तक बहुत कुछ समेटते हैं। असहमति में: अभिलेख दैनिक कृषि-प्रथाओं और रोज़मर्रा जीवन के सुख-दुख का उल्लेख नहीं करते, क्योंकि ये भव्य, असाधारण घटनाओं पर केंद्रित होते हैं और हमेशा बनवाने वाले के दृष्टिकोण से लिखे जाते हैं। इसलिए संतुलित उत्तर यह है कि अभिलेख जीवन का बहुत कुछ दर्ज करते हैं, पर ‘हर पहलू’ नहीं, यही कारण है कि इतिहासकार इन्हें जातक-पंचतंत्र जैसे अन्य स्रोतों के साथ मिलाकर पढ़ते हैं।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. पांड्य सरदार को दी जाने वाली वस्तुओं की सूची (स्रोत 3) की तुलना दंगुन गाँव में उत्पादित वस्तुओं (स्रोत 8) से कीजिए। समानताएँ और असमानताएँ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: समानताएँ: दोनों सूचियों में फूल का उल्लेख है, और दोनों कृषि व वन-आधारित समाज की उपज दिखाती हैं। असमानताएँ: सेनगुत्तुवन को दी गई सूची में मुख्यतः वन-पहाड़ी विलासिता की वस्तुएँ हैं (हाथीदाँत, सुगंधित लकड़ी, चंदन, मसाले, वन्य पशु-पक्षी), जो सरदार को भेंट के रूप में दी जातीं और वह पुनर्वितरित करता था। दंगुन गाँव की सूची कृषि-अनुदान से जुड़ी दैनिक उपज व अधिकारों की है (दूध, कोयला, नमक, खदानें), जो अग्रहार के रूप में करों व शुल्कों से छूट सहित एक ब्राह्मण को अनुदानित की गई। यह अंतर सरदार की भेंट-आधारित अर्थव्यवस्था और राजा की भूमिदान व राजस्व-आधारित अर्थव्यवस्था के बीच के मूल भेद को दिखाता है।

7 केस स्टडी

केस स्टडी
“साम्राज्य के महान अधिकारियों में से कुछ नदियों की देख-रेख और भूमि मापन का काम करते हैं जैसा कि मिस्र में होता था। कुछ प्रमुख नहरों से उपनहरों के लिए छोड़े जाने वाले पानी के मुखद्वार का निरीक्षण करते हैं ताकि हर स्थान पर पानी की समान पूर्ति हो सके। यही अधिकारी शिकारियों का संचालन करते हैं और शिकारियों के कृत्यों के आधार पर उन्हें इनाम या दंड देते हैं। वे कर वसूली करते हैं और भूमि से जुड़े सभी व्यवसायों का निरीक्षण करते हैं साथ ही लकड़हारों, बढ़ई, लोहारों और खननकर्ताओं का भी निरीक्षण करते हैं।”
— मेगस्थनीज़ के विवरण का एक अंश (स्रोत 1)

(क) 2 अंक मेगस्थनीज़ कौन था, और उसका यह वृत्तांत किस रूप में आज तक बचा है?
उत्तर: मेगस्थनीज़ चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आए यूनानी राजदूत थे; उनके विवरण के आज कुछ अंश ही उपलब्ध हैं।

(ख) 3 अंक इस गद्यांश के अनुसार राज्य के बड़े अधिकारियों के तीन प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर: 1) नदियों की देख-रेख और भूमि मापन, 2) प्रमुख नहरों से उपनहरों के लिए छोड़े जाने वाले पानी के मुखद्वार का निरीक्षण ताकि हर स्थान पर पानी की समान पूर्ति हो, 3) कर वसूली और भूमि से जुड़े सभी व्यवसायों (लकड़हारे, बढ़ई, लोहार, खननकर्ता) का निरीक्षण।

(ग) 3 अंक यह गद्यांश मौर्य प्रशासन के बारे में क्या दिखाता है, विशेषकर सिंचाई के प्रबंधन के संदर्भ में?
उत्तर: यह दिखाता है कि मौर्य राज्य सिंचाई और भूमि-प्रबंधन में सीधे शामिल था, अधिकारियों के माध्यम से जल-वितरण को नियमित करता था, और यही अधिकारी राजस्व वसूली व आर्थिक गतिविधियों की देखरेख भी करते थे, जो एक केंद्रीकृत नौकरशाही ढाँचे का संकेत देता है।

केस स्टडी
“धरती पर उनका कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं था। अनेक गुणों और शुभकार्यों से संपन्न उन्होंने अपने पैर के तलवे से अन्य राजाओं के यश को मिटा दिया है। … वे करुणा से भरे हुए हैं। वे अनेक सहस्र गायों के दाता हैं। … वे देवताओं में कुबेर (धन-देव), वरुण (समुद्र-देव), इंद्र (वर्षा के देवता) और यम (मृत्यु-देव) के तुल्य हैं।”
— समुद्रगुप्त की प्रशस्ति, प्रयाग प्रशस्ति का एक अंश (स्रोत 4)

(क) 2 अंक प्रयाग प्रशस्ति की रचना किसने और किस भाषा में की?
उत्तर: समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण ने इसे संस्कृत में रचा।

(ख) 3 अंक इस गद्यांश में समुद्रगुप्त की तुलना किन देवताओं से की गई है, और इसका उद्देश्य क्या रहा होगा?
उत्तर: उसकी तुलना कुबेर, वरुण, इंद्र और यम से की गई है। इसका उद्देश्य समुद्रगुप्त को किसी भी प्रतिद्वंद्वी से परे, दैविक दर्जे का शासक दिखाना था।

(ग) 3 अंक इतिहासकार ऐसी प्रशस्तियों को शाब्दिक सत्य वृत्तांत क्यों नहीं मानते?
उत्तर: प्रशस्तियाँ कवियों द्वारा रची गई काव्य-रचनाएँ थीं, जिन्हें रचने और पढ़ने वाले इन्हें तथ्यात्मक विवरण के बजाय काव्यात्मक प्रशंसा मानते थे; इसलिए इतिहासकार इनसे तथ्य निकालते हुए भी सावधानी बरतते हैं।