इस अध्याय के 25 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, हर परीक्षा-शैली में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।
1 सीधे प्रश्न
सीधे प्रश्न
- 1 अंकपुरी, उड़ीसा में देवता जगन्नाथ को किसके एक रूप के रूप में पहचाना गया?
(क) शिव(ख) ब्रह्मा(ग) सूर्य(घ) विष्णु - 1 अंक“महान परंपरा” और “लघु परंपरा” की अवधारणा किस समाजशास्त्री ने गढ़ी?
(क) लुई ड्यूमों(ख) रॉबर्ट रेडफ़ील्ड(ग) एम.एन. श्रीनिवास(घ) बी.आर. आंबेडकर - 1 अंककिसी विशेष देवता, जैसे विष्णु या शिव, की मानवाकार रूप में पूजा को क्या कहा जाता है?
(क) तांत्रिक साधना(ख) वैदिक यज्ञ(ग) सगुण भक्ति(घ) निर्गुण भक्ति - 1 अंकअलवार और नयनार भक्ति-आंदोलन किस क्षेत्र और शताब्दी से जुड़े हैं?
(क) महाराष्ट्र, तेरहवीं सदी(ख) तमिलनाडु, लगभग छठी सदी(ग) कर्नाटक, बारहवीं सदी(घ) पंजाब, पंद्रहवीं सदी - 1 अंकअलवार श्लोकों के संकलन को क्या कहा गया, जिसे “तमिल वेद” भी कहते हैं?
(क) नलयिरादिव्यप्रबंधम्(ख) कबीर बीजक(ग) गुरु ग्रंथ साहिब(घ) तवरम - 1 अंकविष्णु की प्रेयसी मानने वाली स्त्री अलवार कौन थीं?
(क) लाल देद(ख) मीराबाई(ग) कराइक्काल अम्मइयार(घ) अंडाल - 1 अंकबारहवीं सदी के कर्नाटक में वीरशैव/लिंगायत आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
(क) निज़ामुद्दीन औलिया(ख) रामानुजाचार्य(ग) शंकरदेव(घ) बासवन्ना
2 अभिकथन-कारण
अभिकथन-कारण
- 1 अंकअभिकथन (A): इतिहासकार “हिंदू” धर्म को कई पूजा प्रणालियों के समन्वय से बना मानते हैं।
कारण (R): ब्राह्मणीय विचार फैले और साथ ही ब्राह्मणों ने अन्य सामाजिक समूहों के विश्वासों को आत्मसात कर उन्हें नया रूप दिया।
(क) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता(ग) A सही है, पर R ग़लत है(घ) A ग़लत है, पर R सही है - 1 अंकअभिकथन (A): नयनार स्तोत्र बौद्ध और जैन धर्म के प्रति शत्रुतापूर्ण हैं।
कारण (R): परस्पर विरोधी धार्मिक समुदायों में राजकीय अनुदान को लेकर प्रतिस्पर्धा थी (इतिहासकारों का सुझाव)।
(क) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता(ग) A सही है, पर R ग़लत है(घ) A ग़लत है, पर R सही है - 1 अंकअभिकथन (A): भारत में हिंदुओं को भी बाद में ज़िम्मी का दर्जा दिया गया।
कारण (R): ज़िम्मी की परिभाषा शुरू से ही केवल हिंदुओं तक सीमित थी।
(क) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता(ग) A सही है, पर R ग़लत है(घ) A ग़लत है, पर R सही है
3 सुमेलन कीजिए
सुमेलन कीजिए
- 1 अंकसूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए।
सूची I: (i) शेख़/पीर (ii) मुरीद (iii) ख़लीफ़ा (iv) सिलसिला
सूची II: (1) शिष्य (2) आध्यात्मिक वंशावली/श्रृंखला (3) नामित उत्तराधिकारी (4) ख़ानक़ाह का नेता
(क) i-4, ii-1, iii-3, iv-2(ख) i-2, ii-4, iii-1, iv-3(ग) i-1, ii-3, iii-2, iv-4(घ) i-3, ii-2, iii-4, iv-1 - 1 अंकसूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए।
सूची I: (i) ख़्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती (ii) अबुल हसन अल हुजविरी (iii) फ़रीदुद्दीन गंज-ए-शकर (iv) निज़ामुद्दीन औलिया
सूची II: (1) दिल्ली (2) अजोधन (3) लाहौर (4) अजमेर
(क) i-1, ii-2, iii-4, iv-3(ख) i-3, ii-4, iii-1, iv-2(ग) i-2, ii-1, iii-3, iv-4(घ) i-4, ii-3, iii-2, iv-1
4 कथन आधारित प्रश्न
कथन आधारित प्रश्न
- 1 अंककथन I: तांत्रिक प्रथाएँ जाति के पार सभी स्त्री-पुरुषों के लिए खुली थीं।
कथन II: तांत्रिक प्रथाओं ने पूर्व, उत्तर और दक्षिण में शैव और बौद्ध धर्म दोनों को आकार दिया।
(क) कथन I सही है, कथन II ग़लत है(ख) कथन I ग़लत है, कथन II सही है(ग) दोनों कथन सही हैं, पर कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता(घ) दोनों कथन सही हैं, और कथन II, कथन I की व्याख्या करता है - 1 अंककथन I: चोल शासकों ने ब्राह्मणीय और भक्ति परंपराओं का प्रत्यक्ष समर्थन किया।
कथन II: नयनार और अलवार संत वेल्लाल कृषकों द्वारा सम्मानित होते थे, इसलिए शासक भी उनका समर्थन पाना चाहते थे।
(क) दोनों कथन सही हैं, और कथन II, कथन I की व्याख्या करता है(ख) कथन I सही है, कथन II ग़लत है(ग) कथन I ग़लत है, कथन II सही है(घ) दोनों कथन सही हैं, पर कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता - 1 अंककथन I: उपमहाद्वीप की सभी मस्जिदों की छत-शैली और निर्माण-सामग्री एक जैसी है।
कथन II: मक्का की ओर दिशा-निर्धारण और मेहराब-मिंबर हर मस्जिद की सार्वभौमिक विशेषताएँ हैं।
(क) दोनों कथन सही हैं, पर कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता(ख) कथन I ग़लत है, कथन II सही है(ग) दोनों कथन सही हैं, और कथन II, कथन I की व्याख्या करता है(घ) कथन I सही है, कथन II ग़लत है
5 काल-क्रम प्रश्न
काल-क्रम प्रश्न
- 1 अंकनिम्नलिखित भक्ति/सूफ़ी शख़्सियतों को उनके अनुमानित काल के अनुसार कालक्रम में लगाइए।
1. अल हुजविरी (दाता गंज बख़्श)
2. अप्पार, संबंदर
3. बासवन्ना
4. निज़ामुद्दीन औलिया
(क) 1-2-3-4(ख) 2-3-1-4(ग) 3-2-1-4(घ) 2-1-3-4 - 1 अंकनिम्नलिखित चिश्ती सूफ़ियों को उनकी मृत्यु के वर्ष के अनुसार कालक्रम में लगाइए।
1. शेख़ नसीरुद्दीन चिराग़-ए-दहली
2. ख़्वाजा मुइनुद्दीन सिज्ज़ी
3. शेख़ फ़रीदुद्दीन गंज-ए-शकर
4. शेख़ निज़ामुद्दीन औलिया
(क) 1-2-3-4(ख) 2-4-3-1(ग) 2-3-4-1(घ) 3-2-4-1
6 रिक्त स्थान
रिक्त स्थान
- 1 अंकबासवन्ना के अनुयायी, जिन्हें ______ भी कहा जाता है, शिव को एक लिंग के रूप में पूजते हैं।
(क) नाथ(ख) जोगी(ग) सिद्ध(घ) लिंगायत - 1 अंकएक पूजनीय शेख़ को ______ (बहुवचन औलिया, “ईश्वर का मित्र”) के रूप में पूजा जाता था।
(क) वली(ख) पीर(ग) ख़लीफ़ा(घ) मुरीद
7 असंगत चुनिए
असंगत चुनिए
- 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन दक्षिण भारतीय भक्ति-परंपरा से जुड़ा नहीं है?
(क) बाबा गुरु नानक(ख) बासवन्ना(ग) अंडाल(घ) अप्पार - 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सा सूफ़ी परंपराओं के इतिहास के पुनर्निर्माण के लिए अध्याय में बताए गए स्रोत-प्रकारों में से एक नहीं है?
(क) मक़तूबात(ख) मल्फ़ूज़ात(ग) पुराण(घ) तज़किरा
8 गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश
तोंदराडिप्पोडि नामक एक ब्राह्मण अलवार के काव्य से (स्रोत 1): “चतुर्वेदी जो अजनबी हैं और तुम्हारी सेवा के प्रति निष्ठा नहीं रखते, उनसे भी ज़्यादा आप (हे विष्णु) उन ‘दासों’ को पसंद करते हैं, जो आपके चरणों से प्रेम रखते हैं, चाहे वे वर्ण-व्यवस्था के परे हों।” अप्पार नामक नयनार संत की रचना (स्रोत 2): “हे धूर्तजन, जो तुम शास्त्र को उद्धृत करते हो / तुम्हारा गोत्र और कुल भला किस काम का? / तुम केवल मारपेरू के स्वामी (शिव जो तमिलनाडु के तंजावुर जिले के मारपेरू में बसते हैं।) को अपना एकमात्र आश्रयदाता मानकर नतमस्तक हो।”
- 1 अंकतोंदराडिप्पोडि के अनुसार विष्णु किन ‘सेवकों’ को अधिक पसंद करते हैं?
(क) राजाओं और सरदारों को(ख) चतुर्वेदी ब्राह्मणों को(ग) उन ‘दासों’ को जो उनके चरणों से प्रेम रखते हैं, चाहे वे वर्ण-व्यवस्था के परे हों(घ) केवल पुरोहितों को
गद्यांश
1313 में शेख निज़ामुद्दीन औलिया की ख़ानक़ाह में एक स्थानीय शासक ने दो बगीचे और बहुत सी ज़मीन का पट्टा शेख साहब को भेजा (स्रोत 9)। शेख ने कहा: ‘इस ज़मीन, खेत और बगीचे का मुझे क्या करना है?… हमारे कोई भी आध्यात्मिक गुरु ने इस तरह का काम नहीं किया।’ फिर उन्होंने एक कहानी सुनाई: ‘…सुल्तान ग़ियासुद्दीन जो उस समय उलुग़ ख़ान के नाम से जाने जाते थे, शेख फ़रीदुद्दीन से मिलने आए। उन्होंने शेख को कुछ धनराशि और चार गाँवों का पट्टा भेंट किया। धन दरवेशों के लिए था और ज़मीन शेख के अपने इस्तेमाल के लिए थी। मुस्कुराते हुए शेख-अल-इस्लाम (फ़रीदुद्दीन) ने कहा: मुझे धन दे दो मैं इसे दरवेशों में बाँट दूँगा, पर जहाँ तक ज़मीन के पट्टे का सवाल है उसे उन लोगों को दे दो जिन्हें उनकी कामना है…’
- 1 अंकगद्यांश के अनुसार शेख़ फ़रीदुद्दीन ने भूमि के पट्टे के बारे में क्या निर्देश दिया?
(क) पूरा उपहार अस्वीकार कर दिया(ख) पट्टा स्वयं रख लिया(ग) धन और पट्टा दोनों लौटा दिए(घ) धन स्वीकार किया पर पट्टा उन लोगों को देने को कहा जिन्हें उसकी कामना है
9 सत्य-असत्य
सत्य-असत्य
- 1 अंकनिम्न कथनों पर विचार कीजिए।
(i) जगन्नाथ की मूर्ति स्थानीय आदिवासी शिल्पियों द्वारा लकड़ी से तराशी गई थी।
(ii) जगन्नाथ को शिव के एक रूप में पहचाना गया।
(क) दोनों सही हैं(ख) केवल (i) सही है(ग) केवल (ii) सही है(घ) दोनों ग़लत हैं - 1 अंकनिम्न कथनों पर विचार कीजिए।
(i) सुहरावर्दी सिलसिला दिल्ली सुल्तानों से जुड़ा था।
(ii) नक़्शबंदी सिलसिला मुग़लों से जुड़ा था।
(क) दोनों सही हैं(ख) केवल (i) सही है(ग) केवल (ii) सही है(घ) दोनों ग़लत हैं
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
- (घ) बारहवीं सदी तक पुरी के प्रमुख देवता जगन्नाथ (“संसार के स्वामी”) को विष्णु के एक रूप के रूप में पहचाना गया, यद्यपि मूर्ति स्थानीय आदिवासी शिल्पियों द्वारा लकड़ी से तराशी गई थी।
- (ख) समाजशास्त्री रॉबर्ट रेडफ़ील्ड ने ये शब्द गढ़े: महान परंपरा प्रभावी समूह (पुरोहित, शासक) का पालन है; लघु परंपरा स्थानीय प्रथा है।
- (ग) सगुण भक्ति गुणों सहित किसी विशेष देवता की पूजा है; निर्गुण भक्ति एक अमूर्त, निराकार ईश्वर की पूजा है।
- (ख) तमिलनाडु में लगभग छठी सदी से अलवार (विष्णु-भक्त) और नयनार (शिव-भक्त) तमिल स्तोत्र गाते हुए यात्रा करते थे।
- (क) दसवीं सदी तक बारह अलवारों की रचनाएँ नलयिरादिव्यप्रबंधम् के रूप में संकलित हो चुकी थीं, जिसे “तमिल वेद” कहा गया।
- (घ) अंडाल, एक स्त्री अलवार, स्वयं को विष्णु की प्रेयसी मानती थीं, और उनके प्रेम-पद आज भी गाए जाते हैं।
- (घ) बासवन्ना (1106-68), कलाचुरी दरबार में एक ब्राह्मण मंत्री, के नेतृत्व में वीरशैव/लिंगायत आंदोलन उभरा।
अभिकथन-कारण
- (क) दोनों सही हैं और R ही A की व्याख्या करता है: यह द्विदिशीय प्रक्रिया (फैलाव + आत्मसातीकरण) ही “समन्वय” का अर्थ है।
- (क) दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या करता है: इतिहासकारों का सुझाव है कि नयनार स्तोत्रों का बौद्ध-जैन विरोध परस्पर विरोधी धार्मिक समुदायों के बीच राजकीय अनुदान की प्रतिस्पर्धा से उपजा था।
- (ग) A सही है पर R ग़लत है: ज़िम्मी का दर्जा मूलतः यहूदियों और ईसाइयों (प्रकट धर्मग्रंथ के अनुयायियों) के लिए था, बाद में भारत में हिंदुओं तक विस्तारित हुआ; अतः R यह ग़लत दावा करता है कि यह शुरू से ही हिंदुओं तक सीमित था।
सुमेलन कीजिए
- (क) शेख़/पीर ख़ानक़ाह का नेता है, मुरीद शिष्य है, ख़लीफ़ा नामित उत्तराधिकारी है, और सिलसिला आध्यात्मिक वंशावली/श्रृंखला है।
- (घ) मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर में है (i-4), हुजविरी को लाहौर में दफ़नाया गया (ii-3), फ़रीदुद्दीन गंज-ए-शकर की दरगाह अजोधन (पाकिस्तान) में (iii-2), और निज़ामुद्दीन औलिया की दिल्ली में (iv-1)।
कथन आधारित प्रश्न
- (ग) दोनों कथन सही हैं, पर कथन II कथन I की व्याख्या नहीं बल्कि एक अलग तथ्य बताता है: पहला जाति-समावेशन के बारे में है, दूसरा तांत्रिक प्रभाव के भौगोलिक/धार्मिक विस्तार के बारे में।
- (क) दोनों कथन सही हैं, और कथन II कथन I का कारण बताता है: संत वेल्लाल कृषकों में सम्मानित थे, इसलिए चोल शासकों ने भी मंदिर बनवाकर और संतों की मूर्तियाँ स्थापित कराकर उनका समर्थन पाने का प्रयास किया।
- (ख) कथन I ग़लत है (छत-शैली स्थानीय रूप से भिन्न होती थी, जैसे बांग्लादेश की ईंट की अतिया मस्जिद बनाम कश्मीर की लकड़ी की शाह हमदान मस्जिद); कथन II सही है, ये सार्वभौमिक विशेषताएँ थीं।
काल-क्रम प्रश्न
- (घ) अप्पार-संबंदर (लगभग 500-800), फिर अल हुजविरी (लगभग 1000-1100), फिर बासवन्ना (लगभग 1100-1200), फिर निज़ामुद्दीन औलिया (लगभग 1300-1400)।
- (ग) मुइनुद्दीन (मृत्यु 1235), फ़रीदुद्दीन गंज-ए-शकर (मृत्यु 1265), निज़ामुद्दीन औलिया (मृत्यु 1325), नसीरुद्दीन चिराग़-ए-दहली (मृत्यु 1356)।
रिक्त स्थान
- (घ) बासवन्ना के अनुयायी वीरशैव या लिंगायत (“लिंग धारण करने वाले”) कहलाते हैं।
- (क) ऐसे शेख़ को वली (बहुवचन औलिया, “ईश्वर का मित्र”) के रूप में पूजा जाता था, माना जाता था कि उनके पास बरकत है।
असंगत चुनिए
- (क) बाबा गुरु नानक पंजाब (उत्तर भारत) से जुड़े हैं; अंडाल-अप्पार तमिलनाडु और बासवन्ना कर्नाटक से, तीनों दक्षिण भारतीय भक्ति-परंपरा के अंग हैं।
- (ग) अध्याय सूफ़ी परंपराओं के इतिहास के लिए ग्रंथ (नियमावलियाँ), मल्फ़ूज़ात, मक़तूबात और तज़किरा का उल्लेख करता है; पुराण ब्राह्मणीय परंपरा के ग्रंथ हैं, सूफ़ी स्रोत नहीं।
गद्यांश आधारित प्रश्न
- (ग) गद्यांश के अनुसार विष्णु उन ‘दासों’ को पसंद करते हैं जो उनके चरणों से प्रेम रखते हैं, चाहे वे वर्ण-व्यवस्था के परे हों, उन चतुर्वेदियों से भी ज़्यादा जो उनकी सेवा के प्रति निष्ठा नहीं रखते।
- (घ) शेख फ़रीदुद्दीन ने कहा: मुझे धन दे दो, मैं इसे दरवेशों में बाँट दूँगा, पर ज़मीन का पट्टा उन लोगों को दे दो जिन्हें उसकी कामना है।
सत्य-असत्य
- (ख) कथन (i) सही है। कथन (ii) ग़लत है: जगन्नाथ को विष्णु के, शिव के नहीं, एक रूप में पहचाना गया।
- (क) दोनों कथन सही हैं: सुहरावर्दी सिलसिला दिल्ली सुल्तानों के अधीन और नक़्शबंदी मुग़लों के अधीन राज्य से जुड़ाव रखता था, यद्यपि चिश्ती ढाँचे में नहीं।
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री