कक्षा 11 राजनीति विज्ञान बुक 2 अध्याय 1 राजनीतिक सिद्धांत : एक परिचय महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. राजनीति की तीन आम छवियों में से कोई एक बताइए।

उत्तर: जनसेवा, दावपेंच-स्वार्थ-साधन, या “जो राजनेता करते हैं” में से कोई एक।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. महात्मा गांधी ने राजनीति की तुलना किससे की?

उत्तर: साँप की कुंडली से।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. रूसो ने किसे मानव मात्र का मौलिक अधिकार सिद्ध किया?

उत्तर: स्वतंत्रता को।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. डॉ. अंबेडकर ने अनुसूचित जातियों के बारे में क्या तर्क दिया?

उत्तर: उन्हें अल्पसंख्यक माना जाए और विशेष संरक्षण मिले।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. सुकरात किस सवाल की खोज करता है?

उत्तर: न्याय क्या है।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. गणित में त्रिभुज की कितनी परिभाषा होती है?

उत्तर: एक ही।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. सूचना का अधिकार किस ज़रिए दिया गया?

उत्तर: एक नए क़ानून के ज़रिए।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. नागरिक को किसकी तरह बताया गया है?

उत्तर: संगीत कार्यक्रम के श्रोता की तरह।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. राजनीति की तीन आम छवियाँ संक्षेप में बताइए।

उत्तर: जनसेवा (राजनेता मानते हैं), दावपेंच-स्वार्थ-साधन (“गंदी राजनीति”), और “जो राजनेता करते हैं” (कई अन्य लोग राजनीति को ऐसा ही मानते हैं और इसे “घोटालों” से जोड़ते हैं)।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के योगदान बताइए।

उत्तर: गांधी ने हिंद स्वराज में स्वराज के अर्थ की विवेचना की; अंबेडकर ने अनुसूचित जातियों को अल्पसंख्यक मानने और विशेष संरक्षण देने का तर्क दिया।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. सुकरात-सेफलस संवाद का निष्कर्ष क्या है?

उत्तर: सत्य बोलना-ऋण चुकाना ही न्याय नहीं है; अंततः निष्कर्ष निकलता है कि किसी को भी चोट पहुँचाना किसी भी स्थिति में न्यायपूर्ण नहीं हो सकता।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. गणित और राजनीतिक सिद्धांत में मूल फ़र्क़ क्या है?

उत्तर: गणित में त्रिभुज-वर्ग की एक ही परिभाषा होती है; राजनीतिक सिद्धांत में समानता-स्वतंत्रता-न्याय की अनेक परिभाषाएँ हैं, क्योंकि ये मनुष्यों के आपसी संबंधों से जुड़ी हैं।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. समानता के उदाहरण में कतार तोड़ने और विशेष काउंटर से क्या सीखा जाता है?

उत्तर: कतार तोड़ने पर नाराज़गी से पता चलता है कि हम समान अवसर चाहते हैं; वृद्धों-विकलांगों के लिए अलग काउंटर न्यायोचित विशेष बरताव माना जाता है।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. मौलिक अधिकारों की पुनर्व्याख्या के दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर: आजीविका के अधिकार को जीवन के अधिकार में शामिल करना; सूचना के अधिकार की गारंटी एक नए क़ानून द्वारा।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. नागरिक को संगीत कार्यक्रम के श्रोता जैसा क्यों बताया गया है?

उत्तर: नागरिक मुख्य कलाकार नहीं, पर कार्यक्रम की दिशा तय करते हैं, सराहना करते हैं, नए अनुरोध रखते हैं; शिक्षित-सचेत नागरिक राजनेताओं को जनाभिमुख बनाते हैं।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. राजनीतिक सिद्धांत पढ़ने के कोई दो तर्क बताइए।

उत्तर: सभी वर्गों (राजनेता, नौकरशाह, वकील, पत्रकार) के लिए प्रासंगिकता; रोज़मर्रा के भेदभाव (जाति-धर्म-लिंग-वर्ग) की समझ।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. सुकरात के तरीक़े को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: 1. सुकरात तर्कबुद्धि का प्रयोग कर किसी दृष्टिकोण की सीमाएँ-असंगतियाँ उजागर करता है।
2. सेफलस की “सत्य बोलना-ऋण चुकाना” वाली परिभाषा को सुकरात प्रश्नों से चुनौती देता है।
3. फिर “दोस्तों का भला-शत्रुओं का बुरा” वाली परिभाषा को भी खंडित करता है, यह दिखाकर कि इससे एक न्यायी व्यक्ति भी चोर साबित हो जाता है।
4. अंत में पॉलिमार्कस मानने को मजबूर होता है कि किसी को चोट पहुँचाना कभी न्यायपूर्ण नहीं हो सकता, यही सुकरात की विधि की ताक़त है।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. राजनीति की तीन आम छवियों और उनकी सीमाओं को समझाइए।

उत्तर: 1. जनसेवा: राजनेता-चुनाव लड़ने वाले लोग यही मानते हैं, पर यह पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
2. दावपेंच-स्वार्थ: कुछ लोग राजनीति को निजी स्वार्थ की पूर्ति से जोड़ते हैं, यह भी अधूरी छवि है।
3. “जो राजनेता करते हैं”: कई अन्य लोगों के लिए राजनीति वही है जो राजनेता करते हैं; दल-बदल, झूठे वायदे और जोड़तोड़ देखकर वे इसे “घोटालों” से जोड़ते हैं। केवल साधारण लोग ही राजनीति से निराश नहीं हैं: राजनीतिक दलों को चंदा देने वाले व्यवसायी और उद्यमी भी लाभ उठाते हुए अपनी मुसीबतों के लिए राजनीति को कोसते हैं, और सिनेमा के कलाकार भी इसकी बुराई करते हैं।
4. असल में राजनीति सामूहिक निर्णय की बहुविध वार्ताओं से जन्मती है, सिर्फ़ किसी एक छवि तक सीमित नहीं।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. पाँचों नामित विचारकों (प्लेटो-अरस्तू, रूसो, मार्क्स, गांधी, अंबेडकर) का संक्षिप्त योगदान बताइए।

उत्तर: 1. प्लेटो-अरस्तू: ईसा पूर्व 5वीं सदी में राजतंत्र-लोकतंत्र पर बहस।
2. रूसो: स्वतंत्रता को मानव मात्र का मौलिक अधिकार सिद्ध किया।
3. मार्क्स: समानता को स्वतंत्रता जितना ही निर्णायक बताया।
4. गांधी-अंबेडकर: गांधी ने स्वराज की विवेचना की, अंबेडकर ने अनुसूचित जातियों के विशेष संरक्षण का तर्क दिया, दोनों ने भारतीय संविधान को आकार दिया।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. समानता का उदाहरण विस्तार से समझाइए (कतार से लेकर स्कूली शिक्षा तक)।

उत्तर: 1. कतार तोड़ने पर नाराज़गी से पता चलता है कि हम समान अवसर चाहते हैं।
2. वृद्धों-विकलांगों के लिए अलग काउंटर न्यायोचित विशेष बरताव माना जाता है।
3. दिहाड़ी मज़दूर (पत्थर काटने, ईंट ढोने वाले) पैसे की कमी से दुकान-अस्पताल तक नहीं पहुँच पाते, समानता में निष्पक्षता भी ज़रूरी है।
4. ग़रीब बच्चे, ख़ासकर लड़कियाँ, स्कूल छोड़ने को मजबूर होती हैं, संविधान की प्राथमिक शिक्षा गारंटी अभी मात्र औपचारिक है।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. संविधान में मौलिक अधिकारों की निरंतर पुनर्व्याख्या को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: 1. यह एक तरह से खेल खेलने जैसा है, जैसे शतरंज-क्रिकेट में हम नियमों की नई व्याख्या सीखते जाते हैं।
2. आजीविका के अधिकार को अदालतों ने जीवन के अधिकार में शामिल किया।
3. सूचना के अधिकार की गारंटी एक नए क़ानून से दी गई।
4. समाज नई चुनौतियों का सामना करता है, इसलिए मौलिक अधिकारों में संशोधन और विस्तार होता रहता है।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. नागरिकों को राजनीतिक सिद्धांत क्यों पढ़ना चाहिए, चार तर्कों में से कोई तीन विस्तार से समझाइए।

उत्तर: 1. यह सभी वर्गों (राजनेता, नौकरशाह, वकील, पत्रकार) के लिए प्रासंगिक है, गणित सीखने जैसी तुलना से समझाया गया है।
2. हम सूचित नागरिक बनते हैं, संगीत-श्रोता रूपक से, कार्यक्रम की दिशा तय करना, सराहना करना।
3. रोज़मर्रा के भेदभाव (जाति-धर्म-लिंग-वर्ग) के प्रति अपने विचार जाँचकर हम उदार बनते हैं।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. वैश्विक संचार तकनीक और स्वतंत्रता-नियमन के सवाल को समझाइए।

उत्तर: 1. वैश्विक संचार तकनीक कार्यकर्ताओं का दुनिया-भर में तालमेल आसान बनाती है (आदिवासी संस्कृति-जंगल बचाने के लिए)।
2. पर यही तकनीक आतंकवादियों-अपराधियों को भी नेटवर्क बनाने का मौक़ा देती है।
3. इंटरनेट कॉमर्स बढ़ने से ऑनलाइन दी गई निजी जानकारी की सुरक्षा का सवाल उठता है।
4. इसलिए यह बहस होती है कि इंटरनेट पर कितनी स्वतंत्रता और कितना नियमन उचित है, और नियमन कौन करे, सरकार या स्वतंत्र नियामक।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. राजनीति की परिभाषा और उसकी तीन आम छवियों को विस्तार से समझाइए, साथ ही बताइए कि असल राजनीति इन छवियों से कैसे अलग है।

उत्तर: 1. जनसेवा की छवि: राजनेता-चुनाव लड़ने वाले लोग यही मानते हैं।
2. दावपेंच-स्वार्थ की छवि: राजनीति को निजी स्वार्थ-साधन से जोड़ा जाता है, “गंदी राजनीति” जैसे मुहावरे इसी से जन्मते हैं।
3. “जो राजनेता करते हैं” वाली छवि: कई अन्य लोग राजनीति को ऐसा ही मानते हैं और इसे “घोटालों” से जोड़ते हैं। राजनीतिक दलों को चंदा देने वाले व्यवसायी-उद्यमी भी लाभ उठाते हुए राजनीति को कोसते हैं, और सिनेमा के कलाकार भी इसकी बुराई करते हैं।
4. गांधी के अनुसार राजनीति साँप की कुंडली की तरह जकड़े रखती है, फिर भी इससे जूझना ज़रूरी है।
5. असल राजनीति सिर्फ़ सरकार के कामकाज तक सीमित नहीं, जनता की बातचीत, प्रदर्शन, अभियान भी इसका हिस्सा हैं।
6. निष्कर्ष: राजनीति का जन्म इस तथ्य से होता है कि हमारी दृष्टि उचित-वांछनीय पर अलग-अलग होती है, और यह सामूहिक निर्णय की बहुविध वार्ताओं से जन्मती है।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. पाँचों नामित विचारकों के योगदान और भारतीय संविधान पर उनके असर को विस्तार से समझाइए।

उत्तर: 1. प्लेटो-अरस्तू: ईसा पूर्व 5वीं सदी में राजतंत्र-लोकतंत्र पर बहस, वाद-विवाद की परंपरा की शुरुआत।
2. रूसो: स्वतंत्रता को मानव मात्र का मौलिक अधिकार सिद्ध किया, आधुनिक विचार को दिशा दी।
3. मार्क्स: समानता को स्वतंत्रता जितना ही निर्णायक बताया, सामाजिक न्याय की सोच को बल दिया।
4. गांधी: हिंद स्वराज में स्वराज की विवेचना की; उनके सिद्धांत नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल हुए।
5. अंबेडकर: अनुसूचित जातियों को अल्पसंख्यक मानने और विशेष संरक्षण का तर्क दिया, जिससे संविधान में छुआछूत का निषेध और विशेष प्रावधान हुए।
6. इस तरह इन सभी विचारकों की वाद-विवाद परंपरा ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता-समानता को प्रतिष्ठित करने में मदद की।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. सुकरात-प्लेटो के द रिपब्लिक संवाद को विस्तार से समझाइए और बताइए यह राजनीतिक सिद्धांत के तरीक़े को कैसे दर्शाता है।

उत्तर: 1. सुकरात को एथेंस में सर्वाधिक विवेकशील व्यक्ति कहा जाता था, प्रचलित मान्यताओं को चुनौती देने के लिए उसे मृत्युदंड दिया गया।
2. प्लेटो ने द रिपब्लिक में सुकरात के नाम से एक चरित्र गढ़कर न्याय की खोज की।
3. सेफलस “सत्य बोलना-ऋण चुकाना” को न्याय बताता है, पर सुकरात अपवाद दिखाकर इसे ख़ारिज करता है।
4. फिर “दोस्तों का भला-शत्रुओं का बुरा” वाली परिभाषा भी खंडित होती है, घोड़े-कुत्ते के उदाहरण से दिखाया जाता है कि चोट पहुँचाना किसी के गुण को बढ़ा नहीं सकता।
5. अंत में पॉलिमार्कस मानने को मजबूर होता है कि किसी को भी चोट पहुँचाना कभी न्यायपूर्ण नहीं हो सकता।
6. यह दिखाता है कि राजनीतिक सिद्धांत तर्कबुद्धि और व्यवस्थित विचार-विमर्श से अवधारणाओं की जाँच करता है, किसी एक को थोपकर नहीं।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. राजनीतिक सिद्धांत पढ़ने के चारों तर्कों को विस्तार से समझाइए।

उत्तर: 1. सभी वर्गों के लिए प्रासंगिकता: राजनीतिक सिद्धांत राजनेताओं, नौकरशाहों, अध्यापकों, वकील-जजों और कार्यकर्ता-पत्रकारों सभी के लिए प्रासंगिक है; छात्र के रूप में हम भविष्य में इनमें से कोई पेशा चुन सकते हैं, इसलिए परोक्ष रूप से यह अभी ही हमारे लिए प्रासंगिक है।
2. गणित सीखने जैसी तुलना: हम सभी गणितज्ञ या इंजीनियर नहीं बनते, फिर भी गणित पढ़ते हैं क्योंकि बुनियादी अंकगणित जीवन में सामान्यतः उपयोगी होता है; राजनीतिक सिद्धांत भी इसी तरह उपयोगी है।
3. सूचित नागरिकता: हम सभी मत देने वाले अधिकार-संपन्न नागरिक बनने जा रहे हैं; सूचनापरक समाज में ग्रामसभा में सहभागी होने या वेबसाइट और मतदान पर राय देने के लिए तर्कशील और जानकार होना ज़रूरी है, क्योंकि मनमानी वरीयताएँ प्रभावी नहीं होतीं।
4. श्रोता जैसे नागरिक: संगीत कार्यक्रम के श्रोताओं की तरह नागरिक कार्यक्रम तय करते हैं, प्रस्तुति का रसास्वादन करते हैं और नये अनुरोध करते हैं; शिक्षित और सचेत नागरिक राजनीति करने वालों को जनाभिमुख बना देते हैं।
5. रोज़मर्रा का भेदभाव: आज़ादी, समानता और धर्मनिरपेक्षता अमूर्त मसले नहीं हैं, हम जाति, धर्म, लिंग या वर्ग के भेदभाव का प्रतिदिन सामना करते हैं; राजनीतिक सिद्धांत हमें अपने विचारों और भावनाओं की जाँच के लिए प्रेरित करता है, जिससे हम उदार होते जाते हैं।
6. तर्कसंगत बहस-कौशल: दूसरों से बहस करने पर ही हम तर्क खोजते हैं; राजनीतिक सिद्धांत हमें न्याय या समानता पर सुव्यवस्थित सोच से अवगत कराता है, और तर्कसंगत बहस व प्रभावी संप्रेषण का यह कौशल वैश्विक सूचना-व्यवस्था में बड़ी संपत्ति साबित होता है।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीति का संबंध किसी भी तरीके से निजी स्वार्थ साधने के धंधे से जुड़ गया है। हमें समझने की ज़रूरत है कि राजनीति किसी भी समाज का महत्त्वपूर्ण और अविभाज्य अंग है। महात्मा गांधी ने एक बार टिप्पणी की थी कि राजनीति ने हमें साँप की कुंडली की तरह जकड़ रखा है और इससे जूझने के सिवाय कोई अन्य रास्ता नहीं है। राजनीतिक संगठन और सामूहिक निर्णय के किसी ढाँचे के बगैर कोई भी समाज ज़िंदा नहीं रह सकता।

(क) 1 अंक महात्मा गांधी ने राजनीति की तुलना किससे की?
उत्तर: साँप की कुंडली से।

(ख) 2 अंक गांधी के अनुसार हम राजनीति से बस दूर क्यों नहीं रह सकते?
उत्तर: क्योंकि राजनीति ने हमें साँप की कुंडली की तरह जकड़ रखा है और इससे जूझने के सिवाय कोई अन्य रास्ता नहीं है। राजनीति से बचना संभव नहीं, इसलिए हमें इससे सक्रिय रूप से जुड़ना होगा।

(ग) 3 अंक यह गद्यांश दिखाता है कि राजनीति से निजी स्वार्थ जुड़ना क्यों दुर्भाग्यपूर्ण है और सामूहिक निर्णय के लिए राजनीतिक संगठन क्यों ज़रूरी है, विस्तार से समझाइए।
उत्तर: यह गद्यांश दिखाता है कि राजनीति का संबंध निजी स्वार्थ-साधन से जुड़ जाना दुर्भाग्यपूर्ण इसलिए है क्योंकि इससे राजनीति की वह असली भूमिका छिप जाती है जो समाज को संगठित रखने में निभाती है। गांधी की साँप की कुंडली वाली उपमा बताती है कि राजनीति से पूरी तरह अलग रहना संभव नहीं, चाहे वह कितनी भी उलझी हुई या दमघोंटू क्यों न लगे, बल्कि इससे सक्रिय रूप से जूझना ही एकमात्र रास्ता है। कोई भी समाज राजनीतिक संगठन और सामूहिक निर्णय के किसी ढाँचे के बग़ैर ज़िंदा नहीं रह सकता, क्योंकि सदस्यों की विविध ज़रूरतों-हितों का ध्यान रखने के लिए किसी सामूहिक तंत्र की ज़रूरत होती है। इसीलिए राजनीति को नकारने की बजाय समझने और उसमें ज़िम्मेदारी से भाग लेने की सलाह दी जाती है।

केस स्टडी
आपने गौर किया होगा कि लोग अक्सर सरकारी कार्यालय, डॉक्टर के प्रतीक्षालय या दुकानों में कतार तोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। कई बार ऐसा करने वालों को पंक्ति में पीछे जाने के लिए कहा जाता है, तो हमें खुशी होती है। कई बार वे आगे निकल जाते हैं और हम ठगा-सा महसूस करते हैं। हम इसका विरोध करते हैं, क्योंकि हम जिनके लिए भुगतान करते हैं उन सामानों या सुविधाओं को पाने में समान अवसर चाहते हैं। इसलिए, जब हम अपने अनुभव पर ध्यान देते हैं, हम समझते हैं कि समानता का अर्थ सभी के लिए समान अवसर होता है। फिर भी, अगर वृद्धों और विकलांगों के लिए अलग काउंटर हों, तो हम समझते हैं कि उनके साथ विशेष बरताव न्यायोचित है।

(क) 1 अंक गद्यांश के अनुसार समानता का क्या अर्थ समझा जाता है?
उत्तर: सभी के लिए समान अवसर।

(ख) 2 अंक वृद्धों-विकलांगों के लिए अलग काउंटर क्यों न्यायोचित माना जाता है?
उत्तर: क्योंकि उनकी परिस्थितियाँ बाक़ी लोगों से अलग होती हैं, इसलिए उनके साथ विशेष बरताव करना निष्पक्षता का ही एक रूप माना जाता है, समान अवसर के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं।

(ग) 3 अंक यह गद्यांश समानता की जटिलता को कैसे दर्शाता है, और यह कैसे दिखाता है कि समानता सिर्फ़ बराबर अवसर तक सीमित नहीं?
उत्तर: यह गद्यांश दिखाता है कि समानता की हमारी समझ रोज़मर्रा के अनुभवों से बनती और विकसित होती है। कतार तोड़ने पर हमारी नाराज़गी से पता चलता है कि हम बुनियादी तौर पर समान अवसर चाहते हैं, यानी जिनके लिए हम भुगतान करते हैं उन सामानों-सुविधाओं तक पहुँचने का समान मौक़ा। लेकिन वृद्धों-विकलांगों के लिए अलग काउंटर की स्वीकृति दिखाती है कि समानता सिर्फ़ एक जैसा व्यवहार करने तक सीमित नहीं, बल्कि परिस्थिति के अनुसार निष्पक्ष व्यवहार करने की भी माँग करती है। यह दर्शाता है कि समानता का अर्थ प्रसंग पर निर्भर करता है, और इसीलिए राजनीतिक सिद्धांत में इसकी एक नहीं, बल्कि अनेक परिभाषाएँ होती हैं।