कक्षा 11 राजनीति विज्ञान बुक 2 अध्याय 1 राजनीतिक सिद्धांत : एक परिचय NCERT समाधान

NCERT की पाठ्यपुस्तक राजनीतिक सिद्धांत के अध्याय 1 «एक परिचय» की प्रश्नावली के छहों प्रश्न, हिंदी संस्करण की अपनी शब्दावली में, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। अध्याय के बीच में पूछे गए प्रश्नों (वाद-विवाद-संवाद, आओ कुछ करके सीखें और हाशिये के प्रश्न) के उत्तर अंत में दिए गए हैं। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।

1 राजनीतिक सिद्धांत के बारे में सही/ग़लत कथन

प्र. राजनीतिक सिद्धांत के बारे में नीचे लिखे कौन-से कथन सही हैं और कौन-से ग़लत?
(क) राजनीतिक सिद्धांत उन विचारों पर चर्चा करते हैं जिनके आधार पर राजनीतिक संस्थाएँ बनती हैं।
(ख) राजनीतिक सिद्धांत विभिन्न धर्मों के अंतर्संबंधों की व्याख्या करते हैं।
(ग) ये समानता और स्वतंत्रता जैसी अवधारणाओं के अर्थ की व्याख्या करते हैं।
(घ) ये राजनीतिक दलों के प्रदर्शन की भविष्यवाणी करते हैं।

उत्तर:
(क) सही। राजनीतिक सिद्धांत उन विचारों और सिद्धांतों की जाँच करता है जिनसे राजनीतिक संस्थाएँ आकार लेती हैं।
(ख) ग़लत। राजनीतिक सिद्धांत धर्मों के आपसी संबंधों की व्याख्या नहीं करता, यह राजनीतिक अवधारणाओं का विश्लेषण करता है।
(ग) सही। यही राजनीतिक सिद्धांत का मुख्य काम है, जैसे समानता या स्वतंत्रता जैसी अवधारणाओं के अर्थ को स्पष्ट करना।
(घ) ग़लत। राजनीतिक सिद्धांत का काम भविष्यवाणी करना नहीं, बल्कि अवधारणाओं की व्याख्या और मूल्यांकन करना है।

2 राजनीति, राजनेताओं के काम से बढ़कर है

प्र. “राजनीति उस सबसे बढ़कर है, जो राजनेता करते हैं।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं? उदाहरण भी दीजिए।

उत्तर: हाँ, यह कथन सही है। राजनीति सिर्फ़ राजनेताओं के कामकाज तक सीमित नहीं, बल्कि हर उस स्थिति में मौजूद है जहाँ लोग बातचीत, संघर्ष या सहयोग के ज़रिए सामूहिक निर्णय लेते हैं। उदाहरण के लिए, जब स्कूल में छात्र-छात्राएँ वार्षिकोत्सव की योजना पर अपनी राय रखते हैं, या जब नागरिक किसी अन्यायपूर्ण नीति के ख़िलाफ़ प्रदर्शन आयोजित करते हैं, या जब कोई समुदाय अपने साझा संसाधनों के बँटवारे पर बातचीत करता है, तो ये सब राजनीतिक गतिविधियाँ हैं, भले ही इनमें कोई पेशेवर राजनेता शामिल न हो।

3 जागरूक नागरिक और लोकतंत्र

प्र. लोकतंत्र के सफल संचालन के लिए नागरिकों का जागरूक होना ज़रूरी है। टिप्पणी कीजिए।

उत्तर: नागरिक, संगीत कार्यक्रम के श्रोता जैसे होते हैं: वे गीत-लय की व्याख्या करने वाले मुख्य कलाकार नहीं होते, पर कार्यक्रम की दिशा तय करते हैं, प्रस्तुति की सराहना करते हैं और नए अनुरोध रखते हैं। इसी तरह शिक्षित और सचेत नागरिक ही राजनीति करने वालों को जनाभिमुख बनाते हैं। अगर नागरिक जागरूक न हों, तो वे मनमाने तरीक़े से अपनी वरीयताएँ प्रकट करेंगे, जो प्रभावी नहीं होगा; पर अगर वे विचारशील और परिपक्व हैं, तो वे अपने साझा हितों को गढ़ने और व्यक्त करने में सक्षम होते हैं। इसलिए जागरूक नागरिकता ही लोकतंत्र को उत्तरदायी और जवाबदेह बनाए रखती है।

4 राजनीतिक सिद्धांत की उपयोगिता

प्र. राजनीतिक सिद्धांत का अध्ययन हमारे लिए किन रूपों में उपयोगी है? ऐसे चार तरीक़ों की पहचान करें जिनमें राजनीतिक सिद्धांत हमारे लिए उपयोगी हों।

उत्तर:
1. यह उन सभी वर्गों (राजनेता, नौकरशाह, वकील-जज, कार्यकर्ता-पत्रकार) के लिए प्रासंगिक है, और छात्र भविष्य में इनमें से कोई भी पेशा चुन सकते हैं।
2. यह हमें अधिकार-संपन्न, सूचित नागरिक बनाता है, जो ग्रामसभाओं में सहभागी होने और मतदान करने के लिए तर्कशील ढंग से सोच सकते हैं।
3. यह हमें रोज़मर्रा के भेदभाव (जाति, धर्म, लिंग, वर्ग) के बारे में अपने विचारों और भावनाओं की जाँच करना सिखाता है, जिससे हम उदार बनते हैं।
4. यह बहस और भाषण प्रतियोगिताओं में तर्कसंगत ढंग से बहस करने और प्रभावी तरीक़े से संप्रेषण करने का कौशल देता है।

5 तर्क और सुनने के लिए बाध्य करना

प्र. क्या एक अच्छा/प्रभावपूर्ण तर्क औरों को आपकी बात सुनने के लिए बाध्य कर सकता है?

उत्तर: एक अच्छा और तर्कसंगत तर्क दूसरों को शारीरिक रूप से बाध्य नहीं कर सकता, पर वह उन्हें अपनी बात पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर ज़रूर कर सकता है। जैसे सुकरात के तरीक़े में देखा गया, जब कोई तर्क किसी दृष्टिकोण की सीमाओं और असंगतियों को तर्कबुद्धि के ज़रिए उजागर करता है, तो सुनने वाले को अपने पुराने विचार छोड़कर नए सिरे से सोचने की ज़रूरत महसूस होती है। इसीलिए राजनीतिक सिद्धांत हमें व्यवस्थित और सुसंगत ढंग से तर्क करना सिखाता है, ताकि हमारी बात सार्वजनिक बहस में असरदार साबित हो।

6 राजनीतिक सिद्धांत और गणित की तुलना

प्र. क्या राजनीतिक सिद्धांत पढ़ना, गणित पढ़ने के समान है? अपने उत्तर के पक्ष में कारण दीजिए।

उत्तर: एक अर्थ में दोनों समान हैं: अध्याय पूछता है कि क्या हम गणित नहीं पढ़ते, जबकि हममें से सभी गणितज्ञ या इंजीनियर नहीं बनेंगे, क्योंकि बुनियादी अंकगणित जीवन में सामान्यतः उपयोगी होता है; राजनीतिक सिद्धांत भी इसी तरह सबके लिए उपयोगी है, सिर्फ़ राजनेताओं, नौकरशाहों या न्यायाधीशों के लिए नहीं। लेकिन अवधारणाओं की प्रकृति में दोनों बुनियादी रूप से अलग हैं। गणित में त्रिभुज या वर्ग जैसी अवधारणाओं की सिर्फ़ एक ही सटीक परिभाषा होती है, जिस पर कोई मतभेद नहीं होता। इसके विपरीत, राजनीतिक सिद्धांत में समानता, स्वतंत्रता या न्याय जैसी अवधारणाओं की अनेक परिभाषाएँ होती हैं, क्योंकि ये शब्द किसी निर्जीव वस्तु के बारे में नहीं, बल्कि मनुष्यों के आपसी संबंधों और उनकी अलग-अलग रायों के बारे में हैं। इसलिए राजनीतिक सिद्धांत में एक ही “सही” उत्तर खोजने के बजाय विविध अर्थों और तर्कों को समझना और उन पर व्यवस्थित रूप से विचार-विमर्श करना ज़रूरी होता है।

7 पाठगत प्रश्न (अध्याय के बीच में पूछे गए प्रश्न)

अध्याय अपने वाद-विवाद-संवाद और “आओ कुछ करके सीखें” बॉक्सों तथा हाशिये में भी प्रश्न पूछता है। ये प्रश्नावली में नहीं हैं, पर इन्हीं विचारों को परखते हैं, इसलिए हर एक का उत्तर उसी क्रम में दिया गया है जिसमें ये किताब में छपे हैं।

पाठगत प्रश्न 1. वाद-विवाद-संवाद: राजनीति क्या है?

उत्तर: बहस के लिए बिंदु। लोगों की धारणाएँ: राजनेता और चुनाव लड़ने वाले लोग कह सकते हैं कि राजनीति एक प्रकार की जनसेवा है; कुछ लोग इसे दावपेंच और महत्वाकांक्षाएँ पूरी करने के कुचक्र से जोड़ते हैं; कई अन्य के लिए राजनीति वही है जो राजनेता करते हैं, और वे इसे दल-बदल, झूठे वायदों और ‘घोटालों’ से जोड़ते हैं। अध्याय का मत: राजनीति किसी भी समाज का महत्त्वपूर्ण और अविभाज्य अंग है; गांधी जी के अनुसार राजनीति ने हमें साँप की कुंडली की तरह जकड़ रखा है और इससे जूझने के सिवाय कोई अन्य रास्ता नहीं है। राजनीति का जन्म इस तथ्य से होता है कि हमारे और हमारे समाज के लिए क्या उचित एवं वांछनीय है, इस बारे में हमारी दृष्टि अलग-अलग होती है; इसमें समाज में चलने वाली वे बहुविध वार्ताएँ शामिल हैं जिनके माध्यम से सामूहिक निर्णय किए जाते हैं। इसलिए राजनीति उसकी बुरी छवि से कहीं व्यापक और उपयोगी है।

पाठगत प्रश्न 2. आओ अख़बार बाँचे। वे कौन-से मुद्दे हैं जो समाचारों के प्रमुख शीर्षकों के रूप में छाए हुए हैं? क्या आपको लगता है कि आपके लिए उनकी कोई प्रासंगिकता है?

उत्तर: शीर्षक रोज़ बदलते हैं, पर प्रायः वे सरकार के फ़ैसलों (क़ीमतें, कर, परीक्षाएँ, नए क़ानून), चुनावों और दलों, विभिन्न समूहों के विरोध-प्रदर्शनों और माँगों, तथा दूसरे देशों से संबंधों के बारे में होते हैं। हाँ, ये हमारे लिए प्रासंगिक हैं, क्योंकि अध्याय के अनुसार सरकारें हमारी आर्थिक नीति, विदेश नीति और शिक्षा नीति निर्धारित करती हैं। अगर सत्तारूढ़ सरकार जातीय और सांप्रदायिक संघर्ष को हवा देती है तो बाज़ार और स्कूल बंद हो जाते हैं, और अगर सरकार साक्षरता और रोज़गार बढ़ाने की नीतियाँ बनाती है तो हमें अच्छे स्कूल में जाने और बेहतर रोज़गार पाने के अवसर मिल सकते हैं।

पाठगत प्रश्न 3. आओ कुछ करके सीखें: राजनीति हमारे दैनिक जीवन पर किस तरह असर डालती है? अपने जीवन की एक दिन की घटनाओं का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर: एक नमूना विश्लेषण: बस का किराया और सड़क की हालत सरकार की परिवहन नीति पर निर्भर है; मेरा स्कूल, पाठ्यक्रम और बोर्ड परीक्षा शिक्षा नीति से तय होते हैं; घर में दूध और सब्ज़ी की क़ीमत आर्थिक नीति और करों से प्रभावित होती है; किसी सहपाठी को मिलने वाला मध्याह्न भोजन या छात्रवृत्ति सरकारी योजना है; शाम को बिजली कटौती और राशन की दुकान पर लगी कतार ऐसे मुद्दे हैं जिन पर लोग शिकायत करते हैं और अभियान चलाते हैं। कक्षा में चर्चा करके वार्षिकोत्सव का कार्यक्रम तय करना भी एक छोटा सामूहिक निर्णय है। इस तरह, अध्याय के अर्थ में राजनीति, यानी वे वार्ताएँ जिनसे सामूहिक निर्णय होते हैं, दिन के लगभग हर हिस्से को छूती है।

पाठगत प्रश्न 4. वाद-विवाद-संवाद: क्या विद्यार्थियों को राजनीति में भाग लेना चाहिए?

उत्तर: पक्ष में: विद्यार्थी जल्द ही मत देने और अन्य मसलों के फ़ैसले करने के अधिकार-संपन्न नागरिक बनने वाले हैं; सामूहिक निर्णयों (छात्र परिषद, स्कूल के कार्यक्रमों की योजना, सार्वजनिक मुद्दों पर अभियान) में भाग लेने से वे तर्कशील और सूचित बनते हैं; शिक्षित और सचेत नागरिक राजनीति करने वालों को जनाभिमुख बनाते हैं। विपक्ष में या सावधानी के साथ: पढ़ाई पर असर पड़ सकता है, और दल विद्यार्थियों को अपने संकीर्ण हितों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं या हिंसा में खींच सकते हैं। संतुलित मत: विद्यार्थियों को अध्याय में बताए व्यापक अर्थ में राजनीति में भाग लेना चाहिए, यानी मुद्दों पर बहस करना, शांतिपूर्ण ढंग से संगठित होना और सूचित राय बनाना, पर किसी समूह के हाथों इस्तेमाल होने से बचना चाहिए।

पाठगत प्रश्न 5. ऐसे किसी भी राजनीतिक चिंतक के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए जिसका उल्लेख अध्याय में किया गया है। (50 शब्द)

उत्तर: (महात्मा गांधी पर नमूना टिप्पणी) महात्मा गांधी ने अपनी पुस्तक हिंद-स्वराज में वास्तविक स्वतंत्रता या स्वराज के अर्थ की विवेचना की। उन्होंने टिप्पणी की थी कि राजनीति ने हमें साँप की कुंडली की तरह जकड़ रखा है और इससे जूझने के सिवाय कोई अन्य रास्ता नहीं है। गांधी के सिद्धांतों को भारतीय संविधान के नीति-निर्देशक तत्त्वों में शामिल किया गया। (आप रूसो, कार्ल मार्क्स, डॉ. बी.आर. अंबेडकर, प्लेटो, अरस्तू या सुकरात पर भी लिख सकते हैं।)

पाठगत प्रश्न 6. क्या आप पहचान सकते हैं कि नीचे दिए गए प्रत्येक कथन/स्थिति में कौन-सा राजनीतिक सिद्धांत/मूल्य प्रयोग में आया है।
(क) मुझे विद्यालय में कौन-सा विषय पढ़ना है, यह तय करना मेरा अधिकार होना चाहिए।
(ख) छुआछूत की प्रथा का उन्मूलन कर दिया गया है।
(ग) कानून के समक्ष सभी भारतीय समान हैं।
(घ) अल्पसंख्यक समुदाय के लोग अपनी पाठशालाएँ और विद्यालय स्थापित कर सकते हैं।
(ङ) भारत की यात्रा पर आए हुए विदेशी, भारतीय चुनाव में मतदान नहीं कर सकते।
(च) मीडिया या फिल्मों पर कोई भी सेंसरशिप नहीं होनी चाहिए।
(छ) विद्यालय के वार्षिकोत्सव की योजना बनाते समय छात्र-छात्राओं से सलाह ली जानी चाहिए।
(ज) गणतंत्र दिवस के समारोह में प्रत्येक को भाग लेना चाहिए।

उत्तर:
(क) स्वतंत्रता (चुनने की आज़ादी)।
(ख) समानता (सामाजिक समानता और गरिमा; संविधान के अधिकार वाले अध्याय में किसी भी रूप में छुआछूत का निषेध किया गया है)।
(ग) कानून के समक्ष समानता (कानून का राज)।
(घ) अल्पसंख्यकों के अधिकार (सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार; धर्मनिरपेक्षता)।
(ङ) नागरिकता (मतदान का अधिकार नागरिकों को है)।
(च) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
(छ) लोकतंत्र (निर्णय में भागीदारी)।
(ज) राष्ट्रवाद (देशभक्ति); पर ध्यान रहे कि सबको भाग लेने के लिए मजबूर करना व्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करता है।

पाठगत प्रश्न 7. आओ कुछ करके सीखें: विभिन्न समाचार पत्र और पत्रिकाओं से कार्टून इकट्ठा कीजिए। इन कार्टूनों में किन मुद्दों को उठाया गया है? ये कार्टून कौन-कौन-सी राजनीतिक अवधारणाओं को रेखांकित करते हैं?

उत्तर: कैसे करें: पाँच-छह कार्टून इकट्ठा करके एक स्क्रैपबुक में चिपकाइए और हर एक के नीचे उसका मुद्दा और उससे जुड़ी अवधारणा लिखिए। उदाहरण के लिए, बढ़ती क़ीमतों पर कार्टून आर्थिक नीति और समानता को रेखांकित करता है; चुनावी वायदे तोड़ने वाले नेता पर कार्टून जवाबदेही और लोकतंत्र को; किसी फ़िल्म पर सेंसरशिप वाला कार्टून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को; जातिगत भेदभाव पर कार्टून समानता और न्याय को। अध्याय में छपा आर. के. लक्ष्मण का कार्टून, जिसमें एक राजनेता से तुरंत राजनीति से संन्यास लेने को कहा गया है क्योंकि उसके काम-काज का बुरा प्रभाव पड़ रहा है और “वह सोचता है कि वह झूठ और धोखाधड़ी से काम चला सकता है”, राजनीति की दावपेंच और स्वार्थ वाली छवि को रेखांकित करता है।