NCERT की पाठ्यपुस्तक राजनीतिक सिद्धांत के अध्याय 3 “समानता” की प्रश्नावली के सभी छह प्रश्नों के पूर्ण उत्तर, हिंदी संस्करण की अपनी शब्दावली में, और उसके बाद अध्याय के भीतर छपे सभी प्रश्न और गतिविधियाँ (आओ कुछ करके सीखें, वाद-विवाद-संवाद, चिंतन-मंथन, कार्टून, हाशिये की टिप्पणी और तालिकाएँ)। पहले ख़ुद उत्तर देने की कोशिश करें, फिर मिलान करें।
1प्राकृतिक बनाम सामाजिक असमानता
कुछ लोगों का तर्क है कि असमानता प्राकृतिक है जबकि कुछ अन्य का कहना है कि वास्तव में समानता प्राकृतिक है और जो असमानता हम चारों ओर देखते हैं उसे समाज ने पैदा किया है। आप किस मत का समर्थन करते हैं? कारण दीजिए।
उत्तर: दूसरा मत, कि समानता प्राकृतिक है और असमानता समाज की बनाई हुई है, ज़्यादा तर्कसंगत है। अध्याय के अनुसार सभी मनुष्य साझी मानवता के कारण समान महत्त्व और सम्मान के हक़दार हैं, यह मूल स्थिति है। जो असमानताएँ हमें दिखती हैं (धन, जाति, लिंग, नस्ल आधारित) वे समाज की बनाई संस्थाओं और रीति-रिवाज़ों से पैदा होती हैं, जैसे जाति-व्यवस्था या महिलाओं को “अबला” मानने की धारणा। इतिहास में जिन असमानताओं को “प्राकृतिक” कहा गया (जैसे स्त्रियों को कम बुद्धि का मानना, अफ़्रीकी लोगों को कम सक्षम मानना), वे बाद में सत्ता के अंतर से पैदा भेद साबित हुईं, जन्मजात नहीं। इसलिए असमानता स्वाभाविक नियम नहीं, बल्कि समाज की रचना है, और इसे बदला जा सकता है।
2पूर्ण आर्थिक समानता, संभव या वांछनीय?
एक मत है कि पूर्ण आर्थिक समानता न तो संभव है और न ही वांछनीय। एक समाज ज़्यादा से ज़्यादा बहुत अमीर और बहुत ग़रीब लोगों के बीच की खाई को कम करने का प्रयास कर सकता है। क्या आप इस तर्क से सहमत हैं? अपना तर्क दीजिए।
उत्तर: हाँ, यह तर्क अध्याय की स्थापना से मेल खाता है। अध्याय स्वयं कहता है कि “धन-दौलत या आमदनी की पूरी समानता संभवतः कभी विद्यमान नहीं रही।” लोगों की प्रतिभा, पसंद और मेहनत में स्वाभाविक अंतर होने से आय में कुछ अंतर बना रहता है, और इसे मिटाना व्यावहारिक भी नहीं और ज़रूरी भी नहीं (समानता का मतलब सभी अंतर मिटाना नहीं है)। जो सचमुच ख़तरनाक है वह है पीढ़ियों से चली आ रही, जड़ जमाई असमानता, जहाँ एक वर्ग हमेशा अमीर और दूसरा हमेशा ग़रीब बना रहे, क्योंकि इससे आक्रोश और हिंसा पैदा हो सकती है। इसलिए लक्ष्य पूर्ण समानता नहीं, बल्कि सबको समान अवसर देकर सबसे अमीर और सबसे ग़रीब के बीच की खाई को कम करना होना चाहिए, जैसा अधिकांश आधुनिक लोकतंत्र करने की कोशिश करते हैं।
3अवधारणाओं का मिलान
नीचे दी गई अवधारणा और उसके उचित उदाहरणों में मेल बैठायें:
(क) सकारात्मक कार्यवाई (ख) अवसर की समानता (ग) समान अधिकार
(1) प्रत्येक वयस्क नागरिक को मत देने का अधिकार है (2) बैंक वरिष्ठ नागरिकों को ब्याज की ऊँची दर देते हैं (3) प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क शिक्षा मिलनी चाहिए
उत्तर:
| अवधारणा | मिलान उदाहरण |
|---|---|
| (क) सकारात्मक कार्यवाई | (2) बैंक वरिष्ठ नागरिकों को ब्याज की ऊँची दर देते हैं, एक विशेष श्रेणी के लिए किया गया अनुकूल बरताव |
| (ख) अवसर की समानता | (3) प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क शिक्षा मिलनी चाहिए, ताकि सभी को विकास का बराबर मौक़ा मिले |
| (ग) समान अधिकार | (1) प्रत्येक वयस्क नागरिक को मत देने का अधिकार है, बिना किसी भेद के सबको एक जैसा अधिकार |
4छोटे-सीमांत किसानों के लिए मूल्य-हस्तक्षेप
किसानों की समस्या से संबंधित एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार छोटे और सीमांत किसानों को बाज़ार से अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता। रिपोर्ट में सलाह दी गई कि सरकार को बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए। लेकिन यह प्रयास केवल लघु और सीमांत किसानों तक ही सीमित रहना चाहिए। क्या यह सलाह समानता के सिद्धांत से संभव है?
उत्तर: हाँ, यह सलाह समानता के सिद्धांत के अनुरूप है। अध्याय बताता है कि समानता का मतलब सबसे हमेशा एक जैसा बरताव करना नहीं, बल्कि कभी-कभी असमान स्थिति में पड़े समूह को बराबरी पर लाने के लिए विशेष (विभेदक) बरताव करना है। छोटे और सीमांत किसान बड़े किसानों की तुलना में बाज़ार में सौदेबाज़ी की कमज़ोर स्थिति में हैं, इसलिए उन पर केंद्रित हस्तक्षेप उन्हें बड़े किसानों के बराबर अवसर देने के लिए ज़रूरी है, ठीक वैसे ही जैसे विकलांगों के लिए रैंप या वंचित समुदायों के लिए सकारात्मक कार्यवाई को उचित माना गया है। यह भेदभाव नहीं, बल्कि समानता को बढ़ावा देने वाला उपाय है।
5समानता के उल्लंघन की पहचान
निम्नलिखित में से किस में समानता के किस सिद्धांत का उल्लंघन होता है और क्यों?
(क) कक्षा का हर बच्चा नाटक का पाठ अपना क्रम आने पर पढ़ेगा।
(ख) कनाडा सरकार ने दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति से 1960 तक यूरोप के श्वेत नागरिकों को कनाडा में आने और बसने के लिए प्रोत्साहित किया।
(ग) वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से रेलवे आरक्षण की एक खिड़की खोली गई।
(घ) कुछ वन क्षेत्रों को निश्चित आदिवासी समुदायों के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
उत्तर:
| स्थिति | उल्लंघन? | कारण |
|---|---|---|
| (क) बारी-बारी से पाठ पढ़ना | नहीं | सबको बराबर और एक जैसा अवसर मिलता है, कोई भेद नहीं |
| (ख) कनाडा की श्वेत-प्राथमिकता नीति | हाँ | नस्ल/रंग के आधार पर भेद, जो समानता के मूल सिद्धांत का सीधा उल्लंघन है |
| (ग) वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग खिड़की | नहीं | न्यायोचित विभेदक बरताव, बुज़ुर्गों की वास्तविक ज़रूरत के अनुसार सुविधा, बराबरी छीनने वाला नहीं |
| (घ) आदिवासी समुदायों के लिए वन-क्षेत्र आरक्षण | नहीं | सकारात्मक कार्यवाई जैसा उपाय, आदिवासी समुदायों की आजीविका व संस्कृति की रक्षा के लिए ज़रूरी विशेष संरक्षण |
6महिलाओं के मताधिकार के तर्क
यहाँ महिलाओं को मताधिकार देने के पक्ष में कुछ तर्क दिए गए हैं। इनमें से कौन-से तर्क समानता के विचार से संगत हैं। कारण भी दीजिए।
(क) स्त्रियाँ हमारी माताएँ हैं। हम अपनी माताओं को मताधिकार से वंचित करके अपमानित नहीं करेंगे?
(ख) सरकार के निर्णय पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी प्रभावित करते हैं इसलिए शासकों के चुनाव में उनका भी मत होना चाहिए।
(ग) महिलाओं को मताधिकार न देने से परिवारों में मतभेद पैदा हो जाएँगे।
(घ) महिलाओं से मिलकर आधी दुनिया बनती है। मताधिकार से वंचित करके लंबे समय तक उन्हें दबाकर नहीं रखा जा सकता है।
उत्तर:
| तर्क | समानता से संगत? | कारण |
|---|---|---|
| (क) माताएँ हैं इसलिए वोट दें | नहीं | यह भावनात्मक/पारिवारिक-सम्मान का तर्क है, समान नागरिकता के अधिकार पर आधारित नहीं |
| (ख) निर्णय महिलाओं को भी प्रभावित करते हैं | हाँ | यह सीधे राजनीतिक समानता, यानी हर उस नागरिक को शासन में आवाज़ का अधिकार, जिसे निर्णय प्रभावित करते हैं, के सिद्धांत पर आधारित है |
| (ग) पारिवारिक मतभेद से बचना | नहीं | यह व्यावहारिक/सामाजिक-सौहार्द का तर्क है, समानता के अधिकार का तर्क नहीं |
| (घ) महिलाएँ आधी मानवता हैं | हाँ | यह सीधे समान मानवीय महत्त्व और गरिमा के सिद्धांत पर आधारित है, जो समानता का मूल आधार है |
7 पाठ के बीच के प्रश्न
अध्याय के भीतर भी कई प्रश्न और गतिविधियाँ छपी हैं: “आओ कुछ करके सीखें”, “वाद-विवाद-संवाद” और “चिंतन-मंथन” के बॉक्स, कार्टून, हाशिये की टिप्पणियाँ और तालिकाओं के साथ पूछे गए प्रश्न। नीचे इन्हें किताब के क्रम में, हिंदी संस्करण के अपने शब्दों में, हल किया गया है। गतिविधियों और वाद-विवाद का कोई एक “सही” उत्तर नहीं होता; आदर्श उत्तर दिखाते हैं कि एक अच्छे उत्तर में क्या-क्या होना चाहिए।
प्र. विभिन्न धार्मिक ग्रंथों से ऐसे उदाहरण खोजो, जो समानता के विचार को सबल करते हों। इन उद्धरणों को अपनी कक्षा में पढ़ो।
उत्तर: यह कक्षा की गतिविधि है। अध्याय का अपना आधार यही है कि समानता की बात सभी आस्थाओं और धर्मों में समाविष्ट है, क्योंकि हर धर्म ईश्वर की रचना के रूप में प्रत्येक मनुष्य के समान महत्त्व की घोषणा करता है। ऐसे अंश खोजिए जो कहते हों कि सभी मनुष्य एक ही स्रोत से आए हैं, आपस में भाई-बहन हैं या ईश्वर के सामने बराबर हैं, जैसे वेद-उपनिषद, गुरु ग्रंथ साहिब, क़ुरान, बाइबिल, बुद्ध की शिक्षाएँ और कबीर जैसे संतों की वाणी में। हर उद्धरण का स्रोत (ग्रंथ, अध्याय या पद) लिखिए और कक्षा में पढ़िए। फिर इसे अध्याय से जोड़िए: इन ग्रंथों में साझी मानवता का जो विचार है, वही “सार्वभौम मानवाधिकार” की धारणा के पीछे भी है।
प्र. मैं जिन लोगों को जानता हूँ, वे सभी किसी न किसी धर्म में विश्वास करते हैं। मैं जिन धर्मों के बारे में जानता हूँ, वे सभी समानता का संदेश देते हैं। जब ऐसा है, तो दुनिया में असमानता क्यों हैं?
उत्तर: क्योंकि किसी आदर्श को मान लेना और उसके अनुसार जीना एक बात नहीं है। अध्याय इसे विरोधाभास कहता है: लगभग हर कोई समानता के आदर्श को स्वीकार करता है, जबकि लगभग हर तरफ़ हमें असमानता दिखती है। असमानता को सामाजिक संस्थाएँ और नियम बनाए रखते हैं, जैसे जाति-व्यवस्था, औरतों को उत्तराधिकार का समान अधिकार न देने वाले रीति-रिवाज़ और महत्त्वपूर्ण संसाधनों का निजी स्वामित्व, और वे लोग भी, जिन्हें पद, धन या हैसियत के विशेषाधिकारों का लाभ मिलता है। केवल विश्वास से ये ढाँचे नहीं बदलते; इसके लिए क़ानून, नीतियाँ और सामाजिक आंदोलन चाहिए। इसीलिए फ्रांसीसी क्रांति से लेकर आज की महिलाओं और दलितों के संघर्ष तक समानता के लिए लड़ना पड़ा है।
प्र. यहाँ भारत की 2011 की जनगणना से लिए गए घरेलू संपदा और सुविधाओं के बारे में कुछ आँकड़े प्रस्तुत हैं। आपका परिवार इन आँकड़ों में कहाँ आता है? (अपने परिवार के लिए ✓ या ✗ लगाएँ।)
उत्तर: यह स्व-मूल्यांकन की गतिविधि है। आपके परिवार के पास जो सुविधा है (बिजली का कनेक्शन, मकान में सरकारी नल का कनेक्शन, मकान में स्नानघर, टेलिविज़न, स्कूटर/मोपेड/मोटर साइकिल, कार/जीप/वैन), उस पर ✓ लगाइए और अपनी पंक्ति की तुलना ग्रामीण और शहरी आँकड़ों से कीजिए: बिजली 55% और 93%, नल 35% और 71%, स्नानघर 45% और 87%, टेलिविज़न 33% और 77%, दोपहिया 14% और 35%, कार 2% और 10%। इस गतिविधि का उद्देश्य यह देखना है कि गाँव और शहर के बीच की खाई कितनी चौड़ी है, आँकड़े याद करना नहीं।
प्र. हमारे चारों ओर बहुत-सी असमानताएँ ऐसी हैं, जिन पर कोई आपत्ति नहीं करता। ऐसे में देश और दुनिया की असमानताओं पर बात करना बकवास है। ज़रा इस पर ही ध्यान दो कि कैसे मेरे माता-पिता मेरे भाई की तरफदारी करते हैं।
उत्तर: दोनों पर बात करना ज़रूरी है, और दोनों जुड़ी हुई हैं। टिप्पणी में जो रोज़मर्रा की असमानता है, परिवार का बेटे को बेटी से ज़्यादा महत्त्व देना, वह ठीक वही असमानता है जिसकी चर्चा अध्याय करता है: नारीवादी बताते हैं कि यह पितृसत्ता से पैदा होती है, जो पुरुष को स्त्री से अधिक महत्त्व देती है, और यह प्रकृति की नहीं, समाज की देन है। जिन असमानताओं पर “कोई आपत्ति नहीं करता”, वे अक्सर सबसे गहरी जड़ें जमाई होती हैं, क्योंकि लंबे समय से चलते रहने के कारण वे प्राकृतिक लगने लगती हैं। देश और दुनिया के आँकड़े यही प्रवृत्ति बड़े पैमाने पर दिखाते हैं। इसलिए घर की असमानता को पहचानना, देश और दुनिया की असमानता को समझने की पहली सीढ़ी है, उसे अनदेखा करने का कारण नहीं।
प्र. “पुरुष स्त्रियों से बढ़कर हैं। यह एक प्राकृतिक असमानता है। आप इस संबंध में कुछ नहीं कर सकते।” / “मेरे हर विषय में तुमसे ज़्यादा अंक आते हैं। मैं घर के काम में माँ का हाथ भी बँटाती हूँ। तुम मुझसे बढ़कर कैसे हो?”
उत्तर: यह कार्टून दिखाता है कि किसी सामाजिक असमानता को कैसे “प्राकृतिक” बताकर पेश किया जाता है। लड़का अपनी श्रेष्ठता को जन्मजात बताता है, पर लड़की का रिकॉर्ड (हर विषय में ज़्यादा अंक और साथ में घर का काम) दिखाता है कि इस दावे का कोई प्राकृतिक आधार नहीं है। अध्याय बताता है कि औरतें अनादि काल से “अबला” कही जाती थीं, उन्हें भीरु और पुरुषों से कम बुद्धि का माना जाता था, और इसी आधार पर उन्हें समान अधिकार से वंचित करना न्यायसंगत मान लिया गया था; अब ऐसे मूल्यांकनों पर सवाल उठाए जा रहे हैं और इन्हें जन्मजात लक्षणों पर नहीं, शक्ति के अंतर पर आधारित माना जाता है। पढ़ाई और घर के काम का यही “दोहरा बोझ” नारीवादी भी दिखाते हैं।
प्र. नीचे दी गई तालिका में विभिन्न समुदायों की शैक्षिक स्थिति से जुड़े कुछ आँकड़े दिए गए हैं। इन समुदायों की शैक्षिक स्थिति में जो अंतर हैं, क्या वे महत्त्वपूर्ण हैं? क्या इन अंतरों का होना केवल एक संयोग है या ये अंतर जाति-व्यवस्था के असर की ओर संकेत करते हैं? आप यहाँ जाति-व्यवस्था के अलावा और किन कारणों का प्रभाव देखते हैं?
उत्तर: हाँ, ये अंतर महत्त्वपूर्ण हैं। शहरी भारत में प्रति हज़ार लोगों में स्नातकों की संख्या अनुसूचित जाति में 47 से लेकर अन्य धार्मिक समुदायों में 315 तक है, जबकि अखिल भारतीय औसत 155 है; यानी सबसे नीचे और सबसे ऊपर के समूह के बीच छह गुने से भी ज़्यादा का अंतर (नेशनल सेंपल सर्वे आर्गेनाइजेशन, 55वाँ राउंड सर्वे, 1999-2000)। इतना बड़ा और नियमित अंतर संयोग नहीं हो सकता। यह जाति-व्यवस्था के असर की ओर संकेत करता है: अनुसूचित जाति (47) और हिंदू अन्य पिछड़ी जातियाँ (86), हिंदू उच्च जातियों (253) से बहुत पीछे हैं। पर जाति ही अकेला कारण नहीं है, क्योंकि तालिका धार्मिक समुदायों के बीच भी अंतर दिखाती है (मुस्लिम 61, ईसाई 237, सिक्ख 250), जो आर्थिक स्थिति और ग़रीबी, अच्छे स्कूलों तक पहुँच और समुदाय की सामाजिक स्थिति जैसे कारणों की ओर इशारा करता है। कई कारण एक साथ काम करते हैं।
प्र. महिलाओं को सेना की लड़ाकू टुकड़ियों में शामिल होने और सेना के सर्वोच्च पद पर पहुँचने की अनुमति होनी चाहिए।
उत्तर: पक्ष में तर्क: समानता का अर्थ है कि हमें जो अवसर प्राप्त होते हैं, वे जन्म या सामाजिक परिस्थितियों से तय न हों, और लिंग जन्म से जुड़ी विशेषता है; अध्याय दिखाता है कि औरतों को “अबला” मानना एक सामाजिक धारणा थी, प्राकृतिक तथ्य नहीं; और लड़ाकू भूमिका से रोकना उन्हें सर्वोच्च पदों से भी रोकता है, जो अवसर की असमानता है। विपक्ष में उठाए जाने वाले तर्क: युद्ध की कठिन शारीरिक माँगें और मोर्चे की व्यावहारिक व्यवस्थाएँ। संतुलित उत्तर यह कह सकता है कि हर उम्मीदवार के लिए, स्त्री हो या पुरुष, मानक एक जैसे हों, और जहाँ विशेष सुविधाओं की ज़रूरत हो (जैसे कार्यस्थल पर मातृत्व अवकाश), वे समानता को बढ़ाती हैं, घटाती नहीं। अपनी राय कारण के साथ लिखिए।
प्र. संयुक्त राज्य अमेरिका में नस्ली असमानता के बारे में और भी खोज करें। हमारे देश में कौन-कौन से समूह इसी प्रकार की असमानता के शिकार हैं। अमेरिका में इस असमानता को कम करने के लिए किस प्रकार की नीतियाँ अपनाई गई? क्या उनके अनुभवों से कुछ सीखा जा सकता है? क्या उन्होंने भी हमारे अनुभवों से कुछ सीखा है?
उत्तर: कार्टून “एक अधूरा स्वप्न” (आर.जे. मैटसन, 2006) अमेरिका में नस्लीय असमानता के आँकड़े दिखाता है: 40 वर्ष से कम उम्र के 10 लाख अफ़्रीकी-अमेरिकी लोग जेल की सलाखों के पीछे हैं, 13 प्रतिशत अश्वेत पुरुष वयस्क मताधिकार से वंचित हुए, 1968 से 2006 के बीच न्यूनतम मज़दूरी में वास्तविक रूप से 35 प्रतिशत की कमी आई, और ऊपर के 20% लोगों का 83% धन-संपदा पर अधिकार है जबकि नीचे के 20% लोगों के पास धन-संपदा बिल्कुल नहीं। हमारे देश में जन्म पर आधारित ऐसी ही गहरी असमानता के शिकार दलित (अनुसूचित जातियाँ) और अनुसूचित जनजातियाँ हैं। अमेरिका ने नस्लीय भेदभाव वाले क़ानून ख़त्म किए और सकारात्मक कार्यवाई अपनाई, जैसे दाख़िले और नौकरियों में विशेष ध्यान। भारत ने छुआछूत की प्रथा को समाप्त किया और मुख्य रूप से नौकरियों और शिक्षा में आरक्षित स्थान या कोटा की नीति अपनाई। दोनों एक-दूसरे से सीख सकते हैं: भारत छात्रवृत्ति और सहायता जैसे अमेरिका के विविध उपायों से, और अमेरिका भारत में संविधान से समर्थित आरक्षण-व्यवस्था के लंबे अनुभव से। (यह खोज पर आधारित प्रश्न है; अपनी जानकारी भी जोड़िए।)
प्र. अपने विद्यालय के छात्र/छात्राओं पर ध्यान दो और उनमें नज़र आने वाली सभी आर्थिक-सामाजिक असमानताओं की सूची बनाओ।
उत्तर: यह कक्षा की गतिविधि है। अच्छी सूची दोनों तरह की असमानताओं को अलग-अलग रखती है। आर्थिक: कौन ट्यूशन/कोचिंग, किताबें-कॉपियाँ, घर पर कंप्यूटर या इंटरनेट, स्कूल की यात्रा और फ़ीस, आने-जाने का साधन जुटा पाता है। सामाजिक: जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर कौन किसके साथ बैठता-खाता है, लिंग (जैसे लड़कियों को घर के काम के लिए रोक लेना, या खेलों में लड़कों को प्राथमिकता), और पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी, जिनके माता-पिता पढ़ाई में मदद नहीं कर पाते। फिर हर बिंदु पर अध्याय का प्रश्न पूछिए: यह असमानता छात्र की अपनी पसंद से आई है, या उस परिवार या परिस्थिति से, जिसमें वह पैदा हुआ? समानता के पक्षधर दूसरी तरह की असमानता को कम करना चाहते हैं।
प्र. अलग-अलग तरह की शारीरिक विकलांगता के शिकार छात्रों को अन्य छात्रों की भाँति सीखने के लिए आवश्यक सुविधाओं की एक सूची बनाओ। आपके विद्यालय में इनमें से कौन-कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध हैं?
उत्तर: यह कक्षा का सर्वेक्षण है। ज़रूरी सुविधाएँ: पहियादार कुर्सी वालों के लिए ढलान वाले रास्ते (रैंप), रेलिंग, लिफ़्ट और भूतल पर कक्षाएँ; सुलभ शौचालय; दृष्टिहीन छात्रों के लिए ब्रेल पुस्तकें, ऑडियो पुस्तकें, पढ़कर सुनाने वाले कंप्यूटर और परीक्षा में लेखक या अतिरिक्त समय (अध्याय भी कहता है कि कंप्यूटर नेत्रहीन व्यक्ति की मदद कर सकते हैं); श्रवण-बाधित छात्रों के लिए सुनने की मशीन, सांकेतिक भाषा की सहायता और आगे की सीट। आपके विद्यालय में जो उपलब्ध हैं, उन पर निशान लगाइए। यह गतिविधि अध्याय की इस बात को समझाती है कि ऐसा विशेष बरताव समानता का उल्लंघन नहीं, बल्कि उसे बढ़ाने वाला उपाय है, क्योंकि इससे हर छात्र को सीखने का बराबर अवसर मिलता है।
प्र. अनुसूचित जाति और जनजातियों के लिए सकारात्मक कार्यवाही (कोटा, छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण आदि) की नीतियाँ निजी शैक्षिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए भी लागू की जानी चाहिए।
उत्तर: पक्ष में तर्क: सकारात्मक कार्यवाई का उद्देश्य अतीत की असमानताओं के संचयी दुष्प्रभावों को दुरुस्त करना है, और उच्च तथा व्यावसायिक शिक्षा की बहुत-सी सीटें निजी संस्थाओं में हैं, इसलिए उन्हें छोड़ देने से अवसर की समानता सीमित हो जाती है; पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी और विशेष कोचिंग या ऊँची फ़ीस न दे पाने वाले छात्र हर जगह अलाभकारी स्थिति में होते हैं। विपक्ष में तर्क: आलोचक कहते हैं कि आरक्षण अन्य वर्गों को समान बरताव के अधिकार से मनमाने ढंग से वंचित करता है और यह उलटा भेदभाव है; निजी संस्थाएँ अपने छात्र स्वयं चुनने की स्वतंत्रता का तर्क दे सकती हैं। संतुलित उत्तर अध्याय के इस अंतर का सहारा ले सकता है कि राज्य-नीति के मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में समानता और व्यक्तियों के समान अधिकार अलग-अलग हैं, और किसी भी नीति को इस आधार पर जाँचा जाए कि उसने सबके लिए समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज बनाने में कितनी सफलता पाई। ध्यान दीजिए कि हिंदी संस्करण का यह कथन कोटा के साथ छात्रवृत्ति और प्रशिक्षण को भी गिनाता है, इसलिए पक्ष का तर्क केवल आरक्षण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अपनी राय कारण के साथ लिखिए।
प्र. नीचे दी गई स्थितियों पर विचार करें। क्या इनमें से किसी भी स्थिति में विशेष और विभेदकारी बरताव करना न्यायोचित होगा?
- कामकाजी महिलाओं को मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए। न्यायोचित। मातृत्व अवकाश के बिना महिलाएँ गंभीरतापूर्वक स्पर्धा में भाग नहीं ले सकतीं; अध्याय यही उदाहरण देता है कि पुरुषों के समान अधिकार पाने के लिए कभी-कभी स्त्रियों से अलग बरताव ज़रूरी होता है।
- एक विद्यालय में दो छात्र दृष्टिहीन हैं। विद्यालय को उनके लिए कुछ विशेष उपकरण खरीदने के लिए धन-राशि खर्च करनी चाहिए। न्यायोचित। उपकरण उन्हें सीखने का बराबर अवसर देते हैं, जैसे रैंप विकलांगों को भवन में प्रवेश का बराबर अवसर देता है; छात्रों की संख्या कम होने से सिद्धांत नहीं बदलता।
- गीता बास्केटबॉल बहुत अच्छा खेलती है। विद्यालय को उसके लिए बास्केटबॉल कोर्ट बनाना चाहिए जिससे वह अपनी योग्यता का और भी विकास कर सके। विशेष बरताव के रूप में न्यायोचित नहीं। प्रतिभा कोई अलाभकारी स्थिति नहीं है जिसे दूर किए बिना गीता समान अधिकार न पा सके; कोर्ट सभी छात्रों के लिए अच्छा हो सकता है, पर केवल एक छात्रा के लिए बनाना विशेषाधिकार है, समानता बढ़ाने का उपाय नहीं।
- जीत की पगड़ी और इरफान की जुम्मे की नमाज़। आंशिक रूप से न्यायोचित। इरफान के नमाज़ के समय और जीत की पगड़ी का सम्मान उनकी धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता की रक्षा करता है, इसलिए उचित व्यवस्था की जा सकती है (जैसे अतिरिक्त कक्षा किसी और दिन रखना)। पर हेलमेट का उद्देश्य सुरक्षा है, उसे यूँ ही छोड़ा नहीं जाना चाहिए; विद्यालय को ऐसा तरीका खोजना चाहिए जिससे जीत की पगड़ी का सम्मान भी हो और उसकी सुरक्षा भी। विशेष बरताव तभी न्यायोचित है जब वह व्यक्ति को समान अधिकार दिलाने में मदद करे, उसे जोखिम में न डाले।
- समानता-आधारित तर्क वही हैं जो समान मानवीय गरिमा या समान नागरिकता पर टिके हों, भावनात्मक या व्यावहारिक तर्क नहीं
- विभेदक बरताव तभी न्यायोचित है जब वह किसी वास्तविक असुविधा या ऐतिहासिक वंचना को दूर करके बराबरी लाए