कक्षा 11 राजनीति विज्ञान अध्याय 8 स्थानीय शासन शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, संख्याएँ, तारीख़ें और तुलना की तालिकाएँ। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 पंचायती राज का त्रि-स्तरीय ढाँचा

स्तर नाम क्षेत्र
ज़िला स्तर ज़िला पंचायत पूरा ज़िला
मध्य स्तर मंडल / खंड / तालुका पंचायत ब्लॉक / तहसील
गाँव स्तर ग्राम पंचायत एक या कुछ गाँव
सबसे आधार ग्राम सभा गाँव के सभी वयस्क मतदाता

2 याद रखने लायक़ संख्याएँ

73वाँ / 74वाँसंविधान संशोधन: 1992, ग्रामीण / शहरी स्थानीय शासन को संवैधानिक दर्जा
1/3महिलाओं के लिए हर स्तर पर आरक्षण, SC/ST/OBC सीटों के भीतर भी
29ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों को सौंपे गए विषय
5 वर्षकार्यकाल; भंग होने पर 6 महीने में फिर से चुनाव अनिवार्य
~32 लाख73वें और 74वें संशोधन से निर्वाचित कुल प्रतिनिधि, इनमें 13 लाख से ज़्यादा महिलाएँ
वर्ष क्या हुआ
1882 लार्ड रिपन का प्रस्ताव: स्थानीय शासन का पहला बड़ा क़दम
1919 / 1935 भारत सरकार अधिनियम: स्थानीय शासन प्रांतीय विषय बना
1948 संविधान सभा में अनंतशयनम अयंगर का पंचायतों के पक्ष में भाषण
1952 सामुदायिक विकास कार्यक्रम (Community Development Programme)
1989 पी. के. थुंगन समिति: पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की सिफ़ारिश
1992 73वाँ और 74वाँ संविधान संशोधन पारित
1995 गीता राठौड़ आरक्षित सीट से सरपंच निर्वाचित (जामोनिया तालाब, सीहोर, म.प्र.)
1996 PESA अधिनियम: अनुसूचित क्षेत्रों तक पंचायत विस्तार
1997 वेंगैवसल (तमिलनाडु) ग्राम पंचायत बनाम कलेक्टर, तालाब-भूमि विवाद
2000 गीता राठौड़ सामान्य सीट से पुनर्निर्वाचित

3 परिभाषाएँ, ठीक जैसी लिखनी हैं

सारी परिभाषाएँ एक जगह
73वाँ संशोधनग्रामीण स्थानीय शासन (पंचायती राज) को संवैधानिक दर्जा, त्रि-स्तरीय ढाँचा अनिवार्य
74वाँ संशोधनशहरी स्थानीय शासन (नगरपालिका) को संवैधानिक दर्जा, बारहवीं अनुसूची
ग्राम सभागाँव के सभी वयस्क मतदाताओं की सभा, प्रत्यक्ष लोकतंत्र का आधार
अनुच्छेद 243(छ)ग्यारहवीं अनुसूची के विषयों पर योजना बनाने और लागू करने की शक्ति पंचायतों को
राज्य निर्वाचन आयुक्तस्थानीय निकायों के चुनाव करवाने वाली स्वतंत्र संवैधानिक संस्था
राज्य वित्त आयोगराज्य और स्थानीय निकायों के बीच राजस्व-बँटवारे की सिफ़ारिश करने वाली संस्था
PESA, 1996पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा को विशेष शक्तियाँ

4 दो नामी उदाहरण, एक नज़र में

4.1 गीता राठौड़ बनाम वेंगैवसल

गीता राठौड़ (जामोनिया तालाब, सीहोर, म.प्र.)

  • 1995: आरक्षित सीट से सरपंच निर्वाचित
  • 2000: सामान्य सीट से पुनर्निर्वाचित
  • दिखाती हैं कि आरक्षण महिला-नेतृत्व को असली स्वीकृति दिला सकता है

वेंगैवसल (कांचिपुरम, तमिलनाडु)

  • 1997: 71 सरकारी कर्मचारियों को तालाब-भूमि आबंटन
  • ग्राम पंचायत का विरोध, कलेक्टर से टकराव
  • मद्रास हाईकोर्ट: एकल पीठ कलेक्टर के पक्ष में, खंडपीठ पंचायत के पक्ष में

4.2 ब्राज़ील और बोलिविया : विकेंद्रीकरण के दो विदेशी उदाहरण

ब्राज़ील: प्रांत, संघीय ज़िले और नगरपालिका परिषद्, तीनों को स्वतंत्र शक्तियाँ, राज्य नगरपालिका परिषद् के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकते, जैसे गणराज्य राज्यों के कामकाज में नहीं करता।

1994पॉपुलर पार्टिसिपेशन लॉ (जनभागीदारी क़ानून)
314निर्वाचित महापौर वाली नगरपालिकाएँ
20%देशव्यापी राजस्व का नगरपालिकाओं को प्रतिव्यक्ति हस्तांतरण
आख़िरी दोहराव
  • त्रि-स्तरीय ढाँचा: ज़िला पंचायत, मंडल/खंड/तालुका पंचायत, ग्राम पंचायत, आधार में ग्राम सभा
  • 73वाँ संशोधन: 5 वर्ष कार्यकाल, 1/3 महिला आरक्षण (SC/ST/OBC सीटों के भीतर भी), 29 विषय (ग्यारहवीं अनुसूची), PESA 1996
  • 74वाँ संशोधन: शहरी निकाय, जनगणना की शहरी-क्षेत्र परिभाषा, बारहवीं अनुसूची
  • गीता राठौड़ और वेंगैवसल: आरक्षण की सफलता और स्थानीय-बनाम-प्रशासनिक टकराव के दो असली उदाहरण
  • सीमा: ग्रामीण स्थानीय निकायों का राजस्व-योगदान केवल 0.24 प्रतिशत, पर ख़र्च सरकारी बजट का 4 प्रतिशत, धन के लिए ऊपर पर निर्भरता बनी हुई
  • राज्य निर्वाचन आयुक्त चुनाव करवाता है, राज्य वित्त आयोग राजस्व-बँटवारे की सिफ़ारिश करता है, दोनों संस्थाएँ 73वें और 74वें संशोधन की देन हैं
  • बोलिविया: 1994 का जनभागीदारी क़ानून, 314 नगरपालिकाएँ, विकेंद्रीकरण की दुनिया-भर में चर्चित मिसाल