इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. माध्य को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: माध्य वह मान है जो सभी मूल्यों के योग को कुल प्रेक्षणों की संख्या से विभाजित करने पर प्राप्त होता है।
प्र. माध्यिका के लिए किस प्रतीक का प्रयोग होता है?
उत्तर: माध्यिका को प्रतीक से व्यक्त किया जाता है।
प्र. बहुलक के संकेताक्षर क्या हैं?
उत्तर: बहुलक के संकेताक्षर अथवा हैं।
प्र. कल्पित माध्य किसे कहते हैं?
उत्तर: अप्रत्यक्ष विधि में माध्य ज्ञात करने के लिए हर मान से घटाया गया एक स्थिरांक कल्पित माध्य कहलाता है।
प्र. माध्य ज्ञात करने की अप्रत्यक्ष विधि में ‘कूट पद्धति’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: कल्पित माध्य घटाकर सभी मूल्यों को छोटी संख्याओं में बदलने की क्रिया को कूट पद्धति कहते हैं।
प्र. केंद्रीय प्रवृत्ति के तीन माप कौन-कौन से हैं?
उत्तर: माध्य, माध्यिका और बहुलक केंद्रीय प्रवृत्ति के तीन माप हैं।
प्र. आंकड़ों के विश्लेषण की तीन प्रमुख सांख्यिकीय तकनीकें कौन-सी हैं?
उत्तर: केंद्रीय प्रवृत्ति के माप, प्रकीर्णन के माप तथा संबंध के माप: ये तीन तकनीकें हैं।
प्र. एक-बहुलक श्रेणी किसे कहते हैं?
उत्तर: जिस श्रेणी में केवल एक मान की आवृत्ति सर्वाधिक होती है, वह एक-बहुलक श्रेणी कहलाती है।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. माध्य ज्ञात करने की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विधि में क्या अंतर है?
उत्तर: प्रत्यक्ष विधि में सभी कच्चे मूल्यों को सीधे जोड़कर प्रेक्षणों की संख्या () से भाग दिया जाता है। अप्रत्यक्ष विधि में एक कल्पित माध्य घटाकर मानों को छोटा किया जाता है और फिर विचलनों के योग से माध्य ज्ञात किया जाता है; दोनों विधियों से उत्तर समान ही आता है, केवल गणना सरल हो जाती है।
प्र. बहुलक के उपयोग के क्या लाभ हैं?
उत्तर: बहुलक ज्ञात करना सरल है, यह चरम मूल्यों से अप्रभावित रहता है, और गुणात्मक आंकड़ों (जैसे सबसे लोकप्रिय रंग या पसंद) के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है, जहाँ माध्य या माध्यिका ज्ञात करना संभव नहीं होता।
प्र. निम्न मानों का माध्य प्रत्यक्ष विधि से ज्ञात कीजिए: 6, 9, 12, 15, 18।
उत्तर: , । ।
प्र. निम्न आंकड़ों का बहुलक ज्ञात कीजिए: 4, 7, 4, 9, 11, 7, 4।
उत्तर: मान 4 तीन बार आता है (7 केवल दो बार), अतः बहुलक ।
प्र. द्वि-बहुलक और त्रि-बहुलक श्रेणी में क्या अंतर है?
उत्तर: द्वि-बहुलक श्रेणी में दो मान बराबर व सर्वाधिक आवृत्ति के साथ आते हैं; त्रि-बहुलक श्रेणी में तीन मान बराबर व सर्वाधिक आवृत्ति के साथ आते हैं।
प्र. सूत्र में और का क्या अर्थ है?
उत्तर: माध्यिका वर्ग की निम्न सीमा है; माध्यिका वर्ग से ठीक पहले वाले वर्ग की संचयी आवृत्ति है।
प्र. निम्न आयु (वर्षों में) की माध्यिका ज्ञात कीजिए: 14, 18, 11, 22, 16।
उत्तर: व्यवस्थित: 11, 14, 16, 18, 22 (); स्थिति तीसरा पद। माध्यिका वर्ष।
प्र. विषम वितरण में माध्य सबसे अधिक क्यों खिसकता है?
उत्तर: क्योंकि माध्य की गणना में सभी मान, लंबी पूँछ के चरम मानों सहित, शामिल होते हैं, जबकि बहुलक केवल वक्र के शिखर (सर्वाधिक आवृत्ति वाले बिंदु) का अनुसरण करता है, इसलिए वह लगभग नहीं खिसकता।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. उदाहरण सहित समझाइए कि माध्य दोनों विधियों (प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष) से समान क्यों आता है।
उत्तर: मान लीजिए आंकड़े 22, 28, 34, 40, 46 हैं। प्रत्यक्ष विधि: , , । अप्रत्यक्ष विधि: कल्पित माध्य लेने पर विचलन , , । दोनों विधियों में उत्तर समान (34) है, क्योंकि , बीजगणितीय रूप से दोनों सूत्र एक ही राशि के बराबर सरल हो जाते हैं, कल्पित माध्य स्वतः कट जाता है।
प्र. निम्न वर्गीकृत आंकड़ों से प्रत्यक्ष विधि द्वारा माध्य ज्ञात कीजिए: वर्ग 0-10, 10-20, 20-30, 30-40; आवृत्ति क्रमशः 3, 5, 7, 5।
उत्तर: मध्य बिंदु: 5, 15, 25, 35। : 15, 75, 175, 175। , । ।
प्र. वर्गीकृत आंकड़ों से माध्यिका ज्ञात करने की विधि सूत्र सहित समझाइए।
उत्तर: पहले आवृत्ति सारणी बनाकर प्रत्येक वर्ग की संचयी आवृत्ति (Cf) ज्ञात की जाती है। फिर ज्ञात कर, संचयी आवृत्ति के वितरण में ऊपर से नीचे गिनते हुए वह वर्ग (माध्यिका वर्ग) पहचाना जाता है जिसकी संचयी आवृत्ति से ठीक अधिक हो। अंत में सूत्र में (माध्यिका वर्ग की निम्न सीमा), (वर्ग अंतराल), (माध्यिका वर्ग की आवृत्ति) और (पिछले वर्ग की संचयी आवृत्ति) के मान रखकर माध्यिका की गणना की जाती है।
प्र. उदाहरण सहित बताइए कि सामान्य वितरण में माध्य, माध्यिका व बहुलक का संबंध कैसा होता है।
उत्तर: सामान्य वितरण पूर्णतः सममित (घंटाकार) होता है, इसलिए इसमें माध्य, माध्यिका तथा बहुलक तीनों बराबर (संपाती) होते हैं। अध्याय के चित्र 2.3 के उदाहरण में यह उभयनिष्ठ मान 100 है, अर्थात् उस वितरण में । अधिकतम आवृत्ति ठीक वितरण के मध्य में होती है, और उस बिंदु से आधे प्रेक्षण ऊपर तथा आधे नीचे होते हैं।
प्र. निम्न वितरण की माध्यिका ज्ञात कीजिए: वर्ग 0-10, 10-20, 20-30, 30-40, 40-50; आवृत्ति क्रमशः 6, 8, 14, 9, 3।
उत्तर: संचयी आवृत्तियाँ: 6, 14, 28, 37, 40। , , जो 20-30 वर्ग (Cf) में आता है, अतः , (पिछले वर्ग की संचयी आवृत्ति), , । ।
प्र. माध्य, माध्यिका व बहुलक में से कौन-सा माप चरम मूल्यों से सर्वाधिक प्रभावित होता है, और क्यों?
उत्तर: माध्य सर्वाधिक प्रभावित होता है, क्योंकि इसकी गणना में समूह के सभी मान (अत्यधिक बड़े या छोटे चरम मान सहित) शामिल किए जाते हैं। माध्यिका केवल पद की स्थिति पर निर्भर करती है और बहुलक केवल सर्वाधिक बार आने वाले मान पर, इसलिए ये दोनों चरम मूल्यों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं।
प्र. निम्न आंकड़ों 15, 22, 15, 30, 45, 22, 15 का बहुलक ज्ञात कर उसका प्रकार भी बताइए।
उत्तर: मान 15 तीन बार आता है (22 केवल दो बार), अतः बहुलक । चूँकि केवल एक ही मान की आवृत्ति सर्वाधिक है, यह श्रेणी एक-बहुलक है।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. आरेखों की सहायता से सामान्य तथा विषम वितरणों में माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की सापेक्षिक स्थितियों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: सामान्य (सममित) वितरण में वक्र पूर्णतः घंटाकार व सममित होता है, इसलिए तीनों माप, माध्य, माध्यिका तथा बहुलक, वक्र के ठीक मध्य में, एक ही बिंदु पर संपाती होते हैं (माध्य = माध्यिका = बहुलक)। जब आंकड़े विषम (टेढ़े) हों, तो यह समता टूट जाती है: धनात्मक विषमता में वक्र की लंबी पूँछ अधिक मानों (दाईं ओर) होती है, जिससे माध्य सबसे दाईं ओर खिंच जाता है, बहुलक शिखर के सबसे निकट रहता है और माध्यिका दोनों के बीच होती है, क्रम: बहुलक < माध्यिका < माध्य। ऋणात्मक विषमता में वक्र की लंबी पूँछ कम मानों (बाईं ओर) होती है, जिससे माध्य सबसे बाईं ओर खिंच जाता है, क्रम: माध्य < माध्यिका < बहुलक। दोनों ही स्थितियों में बहुलक सबसे कम खिसकता है, क्योंकि यह केवल वक्र के शिखर का अनुसरण करता है, जबकि माध्य सभी मानों (चरम मूल्यों सहित) से गणना होने के कारण सबसे अधिक खिसकता है।
चित्र 2.3: सामान्य वितरण वक्र
चित्र 2.4: धनात्मक विषमता (बहुलक < माध्यिका < माध्य)
चित्र 2.5: ऋणात्मक विषमता (माध्य < माध्यिका < बहुलक)
प्र. माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की उपयोगिता पर, उनके गुण-दोषों के आधार पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर: माध्य का गुण यह है कि यह समूह के सभी मूल्यों पर आधारित होता है और आगे के सांख्यिकीय विश्लेषण (जैसे प्रकीर्णन के माप) में सर्वाधिक प्रयुक्त होता है; इसका दोष यह है कि यह चरम मूल्यों (बहुत बड़े या छोटे मानों) से अत्यधिक प्रभावित हो जाता है। माध्यिका का गुण यह है कि यह चरम मूल्यों से अप्रभावित रहती है (क्योंकि यह केवल स्थिति पर निर्भर करती है) और विषम वितरणों के लिए उपयुक्त प्रतिनिधि मान देती है; इसका दोष यह है कि यह समूह के सभी वास्तविक मूल्यों का उपयोग नहीं करती, केवल क्रम का। बहुलक का गुण यह है कि इसकी गणना सरल है, यह चरम मूल्यों से अप्रभावित रहता है और गुणात्मक आंकड़ों (जैसे सर्वाधिक लोकप्रिय वस्तु) के लिए भी प्रयोग हो सकता है; इसका दोष यह है कि किसी श्रेणी में बहुलक हो ही नहीं (बहुलक-रहित) या एक से अधिक हो सकते हैं, जिससे यह अस्थिर व कम विश्वसनीय माप बन जाता है। अतः तीनों माप एक-दूसरे के पूरक हैं, और आंकड़ों की प्रकृति (सममित/विषम, गुणात्मक/मात्रात्मक) के अनुसार उपयुक्त माप चुना जाता है।
प्र. किसी उपयुक्त काल्पनिक उदाहरण की सहायता से अवर्गीकृत आंकड़ों से माध्य ज्ञात करने की प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष विधियाँ समझाइए, तथा दिखाइए कि परिणाम समान आता है।
उत्तर: मान लीजिए पाँच गाँवों की जनसंख्या (सैकड़ों में) 22, 28, 34, 40, 46 है। प्रत्यक्ष विधि: , । । अप्रत्यक्ष विधि: कल्पित माध्य लीजिए (श्रेणी के मध्य के निकट)। विचलन : , । । दोनों विधियों से माध्य समान (34 सैकड़ा, अर्थात् 3,400) प्राप्त हुआ, क्योंकि अप्रत्यक्ष विधि केवल गणना को सरल बनाने के लिए संख्याओं को छोटा करती है, राशि नहीं बदलती।
प्र. निम्न वर्गीकृत आंकड़ों से माध्य ज्ञात कीजिए, प्रत्यक्ष विधि से भी और अप्रत्यक्ष विधि से भी, तथा दिखाइए कि दोनों का उत्तर समान आता है: वर्ग 10-20, 20-30, 30-40, 40-50, 50-60; आवृत्ति क्रमशः 4, 6, 10, 7, 3।
उत्तर: मध्य बिंदु: 15, 25, 35, 45, 55। प्रत्यक्ष विधि: : 60, 150, 350, 315, 165। , । । अप्रत्यक्ष विधि: कल्पित माध्य वर्ग 30-40 () लीजिए। विचलन : ; : ; । । दोनों विधियों से माध्य समान (34.67) प्राप्त होता है।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक प्रत्यक्ष विधि से मालवा पठार की माध्य वर्षा ज्ञात कीजिए।
उत्तर: , ; मिमी।
(ख) 1 अंक यदि कल्पित माध्य 800 माना जाए, तो सातों जिलों के विचलनों (d) का योग क्या होगा?
उत्तर: ।
(ग) 2 अंक अप्रत्यक्ष विधि से माध्य ज्ञात कीजिए और दिखाइए कि यह प्रत्यक्ष विधि के उत्तर के समान है।
उत्तर: मिमी, जो प्रत्यक्ष विधि से प्राप्त उत्तर (926.29 मिमी) के ठीक समान है।
(क) 1 अंक पहले समूह का बहुलक क्या है?
उत्तर: 61, क्योंकि यह मान तीन बार आता है, किसी भी अन्य मान से अधिक बार।
(ख) 1 अंक दूसरे समूह में कुल कितने बहुलक हैं, और वे क्या हैं?
उत्तर: दो बहुलक हैं: 11 और 82, दोनों तीन-तीन बार आते हैं।
(ग) 2 अंक दूसरे समूह की श्रेणी को किस नाम से जाना जाता है, और क्यों?
उत्तर: इसे द्वि-बहुलक श्रेणी कहा जाता है, क्योंकि इसमें दो मानों (11 और 82) की आवृत्ति बराबर और सर्वाधिक (तीन-तीन बार) है।