कक्षा 12 भूगोल अध्याय 19 NCERT Solutions (प्रश्नावली के हल) हिंदी में

NCERT की पाठ्यपुस्तक भूगोल में प्रयोगात्मक कार्य, भाग-2 के अध्याय 2 (आंकड़ों का प्रक्रमण) की प्रश्नावली/अभ्यास के सभी प्रश्न, ठीक उसी रूप में जैसे किताब के हिंदी संस्करण में छपे हैं, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।

1 बहुविकल्पीय प्रश्न (अभ्यास प्रश्न 1)

प्रश्न 1(i)

प्र. केंद्रीय प्रवृत्ति का जो माप चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है, वह है:
(क) माध्य  (ख) माध्य तथा बहुलक  (ग) बहुलक  (घ) माध्यिका

उत्तर: (घ) माध्यिका। माध्यिका केवल व्यवस्थित श्रेणी में किसी पद की स्थिति पर निर्भर करती है, वास्तविक मूल्य पर नहीं, इसलिए यह चरम (बहुत बड़े या छोटे) मूल्यों से अप्रभावित रहती है। माध्य की गणना में सभी मान (चरम मूल्यों सहित) शामिल होते हैं, इसलिए यह सबसे अधिक प्रभावित होता है।

प्रश्न 1(ii)

प्र. केंद्रीय प्रवृत्ति का वह माप जो किसी वितरण के उभरे भाग (शिखर) से हमेशा संपाती होगा, वह है:
(क) माध्यिका  (ख) माध्य तथा बहुलक  (ग) माध्य  (घ) बहुलक

उत्तर: (घ) बहुलक। बहुलक की परिभाषा ही किसी वितरण में सर्वाधिक बार आने वाला मान है, अर्थात् वह वितरण के उभरे भाग (शिखर, सर्वाधिक आवृत्ति वाले बिंदु) पर होता है, चाहे वितरण सममित हो या विषम; बहुलक सदैव शिखर पर ही मिलता है।

2 लगभग 30 शब्दों में उत्तर (अभ्यास प्रश्न 2)

प्रश्न 2(i)

प्र. माध्य को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: माध्य वह मान है जो सभी मूल्यों के योग को कुल प्रेक्षणों की संख्या से विभाजित करने पर प्राप्त होता है (Xˉ=∑x/N\bar{X}=\sum x/N)। यह अवर्गीकृत तथा वर्गीकृत, दोनों प्रकार के आंकड़ों के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विधि से ज्ञात किया जा सकता है।

प्रश्न 2(ii)

प्र. बहुलक के उपयोग के क्या लाभ हैं?

उत्तर: बहुलक ज्ञात करना सरल है, यह चरम मूल्यों से अप्रभावित रहता है, और गुणात्मक आंकड़ों (जैसे सबसे लोकप्रिय वस्तु या रंग) के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है, जहाँ माध्य या माध्यिका ज्ञात करना संभव नहीं होता।

3 लगभग 125 शब्दों में उत्तर (अभ्यास प्रश्न 3)

प्रश्न 3(i)

प्र. आरेखों की सहायता से सामान्य तथा विषम वितरणों में माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की सापेक्षिक स्थितियों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: सामान्य (सममित) वितरण का वक्र पूर्णतः घंटाकार होता है, इसलिए माध्य, माध्यिका तथा बहुलक तीनों वक्र के ठीक मध्य में, एक ही बिंदु पर संपाती होते हैं (माध्य = माध्यिका = बहुलक)। अधिकतम आवृत्ति ठीक वितरण के मध्य में होती है और उस बिंदु से आधे प्रेक्षण ऊपर तथा आधे नीचे होते हैं।
जब आंकड़े विषम (टेढ़े) होते हैं तो यह समता टूट जाती है। धनात्मक विषमता में वक्र की लंबी पूँछ अधिक मानों की ओर (दाईं ओर) होती है, जिससे माध्य सबसे दाईं ओर खिंच जाता है, बहुलक शिखर के सबसे निकट रहता है, तथा माध्यिका दोनों के बीच होती है, क्रम: बहुलक < माध्यिका < माध्य। ऋणात्मक विषमता में वक्र की लंबी पूँछ कम मानों की ओर (बाईं ओर) होती है, जिससे माध्य सबसे बाईं ओर खिंच जाता है, क्रम: माध्य < माध्यिका < बहुलक। दोनों ही स्थितियों में बहुलक सबसे कम खिसकता है, क्योंकि यह केवल वक्र के शिखर का अनुसरण करता है, जबकि माध्य सभी मानों (चरम मूल्यों सहित) से गणना होने के कारण सबसे अधिक खिसकता है।

सामान्य वितरण: माध्य, माध्यिका और बहुलक केंद्र पर संपाती
चित्र 2.3: सामान्य वितरण वक्र
धनात्मक विषमता: लंबी पूँछ दाईं ओर, बहुलक, माध्यिका, फिर माध्य
चित्र 2.4: धनात्मक विषमता (बहुलक < माध्यिका < माध्य)
ऋणात्मक विषमता: लंबी पूँछ बाईं ओर, माध्य, माध्यिका, फिर बहुलक
चित्र 2.5: ऋणात्मक विषमता (माध्य < माध्यिका < बहुलक)
प्रश्न 3(ii)

प्र. माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की उपयोगिता पर टिप्पणी कीजिए (संकेत: उनके गुण तथा दोषों से)।

उत्तर: माध्य का गुण यह है कि यह समूह के सभी मूल्यों पर आधारित होता है और आगे के सांख्यिकीय विश्लेषण (जैसे प्रकीर्णन के माप) में सर्वाधिक प्रयुक्त होता है; इसका दोष यह है कि यह चरम मूल्यों से अत्यधिक प्रभावित हो जाता है। माध्यिका का गुण यह है कि यह चरम मूल्यों से अप्रभावित रहती है (क्योंकि यह केवल पद की स्थिति पर निर्भर करती है) और विषम वितरणों के लिए उपयुक्त प्रतिनिधि मान देती है; इसका दोष यह है कि यह समूह के सभी वास्तविक मूल्यों का उपयोग नहीं करती, केवल क्रम (रैंक) का। बहुलक का गुण यह है कि इसकी गणना सरल है, यह चरम मूल्यों से अप्रभावित रहता है और गुणात्मक आंकड़ों के लिए भी प्रयोग हो सकता है; इसका दोष यह है कि किसी श्रेणी में बहुलक हो ही नहीं (बहुलक-रहित) या एक से अधिक हो सकते हैं (द्वि/त्रि/बहु-बहुलक), जिससे यह अस्थिर व कम विश्वसनीय माप बन जाता है। अतः तीनों माप एक-दूसरे के पूरक हैं और आंकड़ों की प्रकृति के अनुसार उपयुक्त माप चुना जाता है।

परीक्षा संकेत, क्रियाकलाप

अध्याय के अंत में एक क्रियाकलाप भी है: भौगोलिक विश्लेषण के लिए स्वयं कोई काल्पनिक उदाहरण लेकर अवर्गीकृत आंकड़ों से माध्य ज्ञात करने की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विधियों को समझाना है। यह प्रश्नावली में गिना नहीं जाता, पर परीक्षा में व्यावहारिक/स्रोत-आधारित प्रश्न के रूप में पूछा जा सकता है।

हल किया हुआ उदाहरण (क्रियाकलाप शैली): पाँच गाँवों की जनसंख्या (सैकड़ों में) 22, 28, 34, 40, 46 लीजिए। प्रत्यक्ष विधि: ∑x=170\sum x=170, N=5N=5, Xˉ=170/5=34\bar X=170/5=34। अप्रत्यक्ष विधि (कल्पित माध्य A=30A=30): विचलन −8,−2,4,10,16-8,-2,4,10,16, ∑d=20\sum d=20, Xˉ=30+20/5=34\bar X=30+20/5=34। दोनों विधियों से माध्य समान (34 सैकड़ा) प्राप्त होता है, यही इस क्रियाकलाप का मूल उद्देश्य है।

परीक्षा संकेत

प्रश्न 1 के दोनों वस्तुनिष्ठ प्रश्न और प्रश्न 3(i) का आरेख-आधारित प्रश्न अभ्यास में विशेष ध्यान देने योग्य हैं। प्रश्न 1(i) और 1(ii) को गड़बड़ाइए मत: माध्यिका “चरम मूल्यों से अप्रभावित” है, जबकि बहुलक “शिखर से संपाती” है, ये दोनों अलग-अलग गुण हैं।