कक्षा 12 हिंदी अध्याय 11 बाज़ार दर्शन MCQ / वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) उत्तर सहित

इस अध्याय के 20 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, परीक्षा की प्रचलित शैलियों में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।

1 सीधे प्रश्न

सीधे प्रश्न
  1. 1 अंकजैनेन्द्र कुमार का जन्म किस वर्ष हुआ?
    (क) सन् 1905(ख) सन् 1911(ग) सन् 1917(घ) सन् 1901
  2. 1 अंकपहले किस्से में मित्र ने ज़्यादा सामान लाने का क्या कारण बताया?
    (क) बाज़ार में भीड़ नहीं थी(ख) पत्नी साथ थीं(ग) सामान सस्ता था(घ) दुकानदार परिचित था
  3. 1 अंकपहले मित्र के “सब उड़ गया” वाले प्रसंग पर लेखक ने क्या तय माना कि सामान किस आधार पर आया?
    (क) ज़रूरत के आधार पर(ख) पर्चेज़िंग पावर के अनुपात में(ग) दुकानदार की सलाह पर(घ) समय की कमी के कारण
  4. 1 अंकनिबंध के अनुसार बाज़ार का जादू किस राह काम करता है?
    (क) आँख की राह(ख) कान की राह(ग) नाक की राह(घ) स्पर्श की राह
  5. 1 अंकभगत जी किस चीज़ का व्यापार करते थे?
    (क) मिठाई(ख) फल(ग) कपड़ा(घ) चूरन
  6. 1 अंकनिबंध के अनुसार किसे धन की ओर झुकाव होता है?
    (क) बलवान को(ख) निर्बल को(ग) विद्वान को(घ) व्यापारी को
  7. 1 अंकनिबंध की अंतिम पंक्ति में ऐसे बाज़ार का पोषण करने वाले अर्थशास्त्र को क्या कहा गया है?
    (क) विज्ञान(ख) अनीतिशास्त्र(ग) समाजशास्त्र(घ) नीतिशास्त्र

2 अभिकथन-कारण

अभिकथन-कारण
  1. 1 अंकअभिकथन (A): निबंध के अनुसार पैसा पावर है, पर उसके सबूत में आस-पास माल-टाल न जमा हो तो वह ‘खाक पावर’ है।
    कारण (R): पैसे की पर्चेज़िंग पावर के प्रयोग में ही पावर का रस है।

    (क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सही है, परंतु R गलत है(घ) A गलत है, परंतु R सही है
  2. 1 अंकअभिकथन (A): निबंध के अनुसार बाज़ार का सीधा आग्रह उसके मूक निमंत्रण से ज़्यादा असरदार होता है।
    कारण (R): सीधा आग्रह तिरस्कार (नापसंदगी) जगाता है।

    (क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सही है, परंतु R गलत है(घ) A गलत है, परंतु R सही है

3 सुमेलन कीजिए

सुमेलन कीजिए
  1. 1 अंकसुमेलन कीजिए:
    सूची I: (i) भगत जी (ii) पहला मित्र (पत्नी वाला प्रसंग) (iii) वही मित्र (टिकट भर वाला प्रसंग) (iv) दूसरा, अलग मित्र (खाली हाथ वाला प्रसंग)
    सूची II: (1) सारा पैसा ख़र्च कर टिकट भर बचाया (2) कुछ भी तय न कर पाने से खाली हाथ लौटा (3) छह आने से ज़्यादा कभी नहीं कमाया (4) पत्नी के साथ होने को कारण बताया

    (क) i-1, ii-2, iii-3, iv-4(ख) i-3, ii-4, iii-1, iv-2(ग) i-4, ii-1, iii-2, iv-3(घ) i-2, ii-3, iii-4, iv-1
  2. 1 अंकसुमेलन कीजिए (शब्द-छवि):
    सूची I: (i) दरकार (ii) परिमित (iii) अतुलित (iv) पसोपेश
    सूची II: (1) असमंजस (2) ज़रूरत (3) सीमित (4) जिसकी तुलना न हो सके

    (क) i-3, ii-4, iii-1, iv-2(ख) i-1, ii-2, iii-3, iv-4(ग) i-4, ii-1, iii-2, iv-3(घ) i-2, ii-3, iii-4, iv-1

4 कथन आधारित प्रश्न

कथन आधारित प्रश्न
  1. 1 अंककथन I: पहले मित्र के प्रसंग में लेखक ने तय माना कि सामान ज़रूरत की तरफ़ देखकर नहीं, पर्चेज़िंग पावर के अनुपात में आया।
    कथन II: निबंध के अनुसार बाज़ार जाओ तो मन खाली होना चाहिए।
    इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

    (क) केवल कथन I सही है(ख) केवल कथन II सही है(ग) कथन I और II दोनों सही हैं(घ) कथन I और II दोनों गलत हैं
  2. 1 अंककथन I: निबंध में भगत जी का पूरा नाम कहीं नहीं दिया गया है, केवल ‘भगत जी’ कहा गया है।
    कथन II: लेखक स्पष्ट करते हैं कि वे स्वयं चूरन नहीं बेचते।
    इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

    (क) केवल कथन I सही है(ख) केवल कथन II सही है(ग) कथन I और II दोनों सही हैं(घ) कथन I और II दोनों गलत हैं
  3. 1 अंककथन I: निबंध के अनुसार सभी इच्छाओं का पूरी तरह दमन कर लेना ही सच्चा तप है।
    कथन II: मन को पूरी तरह बंद कर लेने से मुक्ति मिलती है।
    इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

    (क) केवल कथन I सही है(ख) केवल कथन II सही है(ग) कथन I और II दोनों सही हैं(घ) कथन I और II दोनों गलत हैं

5 सही क्रम में लगाइए

सही क्रम में लगाइए
  1. 1 अंकनिबंध में आने वाले मित्रों के प्रसंगों का सही क्रम चुनिए:
    (क) पत्नी का साथ होने का बहाना → मनीबैग फैलाकर ‘रेल-टिकट भर’ बचना → ‘शैतान का जाल’ कहना → दूसरे मित्र का खाली हाथ लौटना(ख) पत्नी का साथ होने का बहाना → ‘शैतान का जाल’ कहना → मनीबैग फैलाकर ‘रेल-टिकट भर’ बचना → दूसरे मित्र का खाली हाथ लौटना(ग) दूसरे मित्र का खाली हाथ लौटना → ‘शैतान का जाल’ कहना → मनीबैग फैलाकर ‘रेल-टिकट भर’ बचना → पत्नी का साथ होने का बहाना(घ) मनीबैग फैलाकर ‘रेल-टिकट भर’ बचना → पत्नी का साथ होने का बहाना → दूसरे मित्र का खाली हाथ लौटना → ‘शैतान का जाल’ कहना

6 रिक्त स्थान

रिक्त स्थान
  1. 1 अंकरिक्त स्थान भरें: ‘पैसा ____ है।’
    (क) पावर(ख) कमज़ोरी(ग) बेकार(घ) ज़रूरत

7 असंगत चुनिए

असंगत चुनिए
  1. 1 अंकनिम्न में से कौन-सा निबंध ‘बाज़ार दर्शन’ का पात्र नहीं है?
    (क) भगत जी(ख) लेखक का मित्र(ग) जैनेन्द्र कुमार (लेखक स्वयं)(घ) प्रेमचंद

8 गद्यांश आधारित प्रश्न

गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश
बाज़ार में एक जादू है। वह जादू आँख की राह काम करता है। वह रूप का जादू है पर जैसे चुंबक का जादू लोहे पर ही चलता है, वैसे ही इस जादू की भी मर्यादा है। जेब भरी हो, और मन खाली हो, ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है। जेब खाली पर मन भरा न हो, तो भी जादू चल जाएगा।
  1. 1 अंकगद्यांश के अनुसार जादू का असर किस हालत में खूब होता है?
    (क) जेब खाली, मन भरा हो(ख) जेब भरी, मन खाली हो(ग) जेब भरी, मन भी भरा हो(घ) जब मन बंद कर लिया गया हो
गद्यांश
भाँति-भाँति के बढ़िया माल से चौक भरा पड़ा है। उस सबके प्रति अप्रीति इस भगत के मन में नहीं है। जैसे उस समूचे माल के प्रति भी उनके मन में आशीर्वाद हो सकता है। विद्रोह नहीं, प्रसन्नता ही भीतर है, क्योंकि कोई रिक्त भीतर नहीं है। देखता हूँ कि खुली आँख, तुष्ट और मग्न, वह चौक-बाज़ार में से चलते चले जाते हैं। राह में बड़े-बड़े फैंसी स्टोर पड़ते हैं, पर पड़े रह जाते हैं। कहीं भगत नहीं रुकते। रुकते हैं तो एक छोटी पंसारी की दुकान पर रुकते हैं।
  1. 1 अंकगद्यांश के अनुसार भरे-पूरे चौक के प्रति भगत जी के मन में कैसा भाव है?
    (क) विद्रोह का(ख) ईर्ष्या का(ग) प्रसन्नता का(घ) भय का

9 सत्य-असत्य

सत्य-असत्य
  1. 1 अंकनिम्न कथनों को सत्य (स) या असत्य (अ) के रूप में चिह्नित करें:
    I. भगत जी बाज़ार-चौक में सबको हँसकर पहचानते हैं।
    II. वे किसी को अभिवादन नहीं करते।
    III. वे केवल एक छोटी पंसारी की दुकान पर रुकते हैं।

    (क) अ-स-अ(ख) अ-अ-स(ग) स-अ-स(घ) स-स-अ
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
  1. (क) पाठ के लेखक-परिचय के अनुसार जैनेन्द्र कुमार का जन्म सन् 1905 में हुआ।
  2. (ख) मित्र ने कहा ‘यह जो साथ थीं’ यानी पत्नी का साथ होना ही कारण बताया गया।
  3. (ख) यह निष्कर्ष लेखक का है: “मैंने तब तय माना कि और पैसा होता और सामान आता। वह सामान ज़रूरत की तरफ़ देखकर नहीं आया, अपनी ‘पर्चेज़िंग पावर’ के अनुपात में आया है।”
  4. (क) निबंध कहता है: ‘वह जादू आँख की राह काम करता है। वह रूप का जादू है।’
  5. (घ) भगत जी पड़ोस में रहने वाले महानुभाव हैं, जो चूरन बेचते हैं।
  6. (ख) निबंध स्पष्ट कहता है: ‘निर्बल ही धन की ओर झुकता है।’
  7. (ख) निबंध की अंतिम पंक्ति है: ‘वह अर्थशास्त्र अनीति-शास्त्र है।’
अभिकथन-कारण
  1. (ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है: R उसी बात को दोहराता है कि पैसे की पावर उसके प्रयोग में दिखती है; पाठ R को A का कारण नहीं बताता।
  2. (घ) A गलत है: निबंध के अनुसार “आग्रह तिरस्कार जगाता है”, जबकि ऊँचे बाज़ार का मूक आमंत्रण चाह जगाता है। R सही है।
सुमेलन कीजिए
  1. (ख) सही मिलान: भगत जी=छह आने से ज़्यादा नहीं कमाया, पहला मित्र=पत्नी को कारण बताया, वही मित्र=टिकट भर बचाया, दूसरा-अलग मित्र=खाली हाथ लौटा। पूरे निबंध में कुल दो मित्र हैं।
  2. (घ) सही मिलान: दरकार=ज़रूरत, परिमित=सीमित, अतुलित=जिसकी तुलना न हो सके, पसोपेश=असमंजस।
कथन आधारित प्रश्न
  1. (क) कथन I सही है (यह लेखक का निष्कर्ष है)। कथन II गलत है, निबंध उल्टा कहता है: ‘बाज़ार जाओ तो खाली मन न हो।’
  2. (ग) दोनों कथन पाठ के अनुसार सही हैं।
  3. (घ) दोनों कथन निबंध के विपरीत हैं: निबंध कहता है कि इच्छाओं का पूर्ण दमन झूठ है, और मन बंद करना हठ-योग है, मुक्ति का रास्ता नहीं।
सही क्रम में लगाइए
  1. (क) निबंध में प्रसंग इसी क्रम में आते हैं: पहले पत्नी की महिमा वाली बात, फिर उसी मित्र का मनीबैग फैलाकर टिकट भर बचने की बात, फिर उसी मित्र का ‘शैतान का जाल’ कहना, अंत में दूसरे मित्र का खाली हाथ लौटना।
रिक्त स्थान
  1. (क) मूल पंक्ति है: ‘पैसा पावर है। पर उसके सबूत में आस-पास माल-टाल न जमा हो तो क्या वह खाक पावर है!’
असंगत चुनिए
  1. (घ) प्रेमचंद इस निबंध में पात्र के रूप में कहीं नहीं आते, पाठ के लेखक-परिचय में उनका नाम केवल जैनेन्द्र कुमार से तुलना के लिए आता है (‘हिंदी में प्रेमचंद के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण कथाकार’)। भगत जी, मित्र और स्वयं लेखक इसी निबंध के पात्र हैं।
गद्यांश आधारित प्रश्न
  1. (ख) गद्यांश में स्पष्ट लिखा है: ‘जेब भरी हो, और मन खाली हो, ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है।’
  2. (ग) गद्यांश कहता है: ‘विद्रोह नहीं, प्रसन्नता ही भीतर है, क्योंकि कोई रिक्त भीतर नहीं है।’
सत्य-असत्य
  1. (ग) पहला और तीसरा कथन सत्य हैं। दूसरा असत्य है, भगत जी सबका अभिवादन लेते और देते हैं।