इस अध्याय के 20 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, परीक्षा की प्रचलित शैलियों में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।
1 सीधे प्रश्न
सीधे प्रश्न
- 1 अंकशमशेर बहादुर सिंह का जन्म-स्थान देहरादून किस राज्य में है (पाठ के अनुसार, अब)?
(क) पंजाब(ख) उत्तराखंड(ग) हिमाचल प्रदेश(घ) उत्तर प्रदेश - 1 अंकशमशेर बहादुर सिंह को कौन-सा सम्मान मिला?
(क) ज्ञानपीठ पुरस्कार(ख) लोहिया सम्मान(ग) व्यास सम्मान(घ) साहित्य अकादेमी पुरस्कार - 1 अंकप्रयोगवादी काव्यधारा किस वर्ष से प्रारंभ मानी जाती है?
(क) 1950(ख) 1911(ग) 1943(घ) 1936 - 1 अंकपाठ के अनुसार कवि भोर के आसमान का क्या नहीं है?
(क) मूकद्रष्टा(ख) पाठक(ग) आलोचक(घ) स्रष्टा - 1 अंक‘उषा’ कविता में कुल कितनी पंक्तियाँ हैं?
(क) 12(ख) 16(ग) 10(घ) 14 - 1 अंककविता में ‘बहुत काली सिल’ किस चीज़ से ‘धुल गई हो’ जैसी बताई गई है?
(क) लाल केसर के(ख) पीली हल्दी के(ग) सफ़ेद चूने के(घ) काली स्याही के - 1 अंकआकाश की लालिमा के लिए कविता में स्लेट पर किसकी उपमा दी गई है?
(क) सफ़ेद चूने की(ख) काली स्याही की(ग) लाल खड़िया चाक की(घ) नीली स्याही की - 1 अंक‘नील जल में गौर झिलमिल देह’ किसका बिंब है?
(क) पेड़ों की छाया का(ख) बादलों की गड़गड़ाहट का(ग) आकाश की चमक-हलचल का(घ) नदी में स्नान करते बच्चे का - 1 अंककविता की अंतिम पंक्ति के अनुसार ‘जादू’ कब टूटता है?
(क) बादल छाने पर(ख) सूर्योदय होने पर(ग) रात होने पर(घ) बारिश होने पर - 1 अंक‘नीला शंख जैसे’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा अलंकार(ख) यमक अलंकार(ग) श्लेष अलंकार(घ) रूपक अलंकार
2 अभिकथन-कारण
अभिकथन-कारण
- 1 अंकअभिकथन (A): शमशेर बहादुर सिंह को बिंबधर्मी कवि कहा जाता है।
कारण (R): वे अपनी बात सीधे कहने के बजाय शब्दों से चित्र (बिंब) रचकर कहते हैं।
(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सही है, परंतु R गलत है(घ) A गलत है, परंतु R सही है - 1 अंकअभिकथन (A): शमशेर को केवल दर्शक कवि नहीं कहा जा सकता।
कारण (R): वे आसमानी गति को धरती के जीवन भरे हलचल से जोड़ने वाले स्रष्टा भी हैं।
(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सही है, परंतु R गलत है(घ) A गलत है, परंतु R सही है
3 सुमेलन कीजिए
सुमेलन कीजिए
- 1 अंकसुमेलन कीजिए:
A: 1. नीला शंख 2. राख से लीपा चौका 3. लाल केसर 4. नील जल में देह
B: (i) आकाश की चमक-हलचल (ii) भोर का आकाश (iii) आकाश की धूसरता (iv) सिल पर लालिमा
(क) 1-i, 2-ii, 3-iii, 4-iv(ख) 1-iii, 2-iv, 3-ii, 4-i(ग) 1-iv, 2-iii, 3-i, 4-ii(घ) 1-ii, 2-iii, 3-iv, 4-i
4 कथन आधारित प्रश्न
कथन आधारित प्रश्न
- 1 अंककथन I: कोष्ठक में ‘अभी गीला पड़ा है’ कहकर आकाश के नए-नए बदलने का भाव जोड़ा गया है।
कथन II: यह कोष्ठक कविता की सबसे अंतिम पंक्ति में आता है।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल कथन II सही है(ख) केवल कथन I सही है(ग) कथन I और II दोनों सही हैं(घ) कथन I और II दोनों गलत हैं
5 सही क्रम में लगाइए
सही क्रम में लगाइए
- 1 अंकनिम्न घटनाओं का सही कालक्रम चुनिए (कवि का जन्म-निधन और प्रयोगवाद का आरंभ):
(क) निधन (1993) → प्रयोगवाद का प्रारंभ (1943) → जन्म (1911)(ख) प्रयोगवाद का प्रारंभ (1943) → जन्म (1911) → निधन (1993)(ग) जन्म (1911) → निधन (1993) → प्रयोगवाद का प्रारंभ (1943)(घ) जन्म (1911) → प्रयोगवाद का प्रारंभ (1943) → निधन (1993)
6 रिक्त स्थान
रिक्त स्थान
- 1 अंकरिक्त स्थान भरें: ‘प्रात नभ था बहुत नीला ____ जैसे’
(क) शंख(ख) आईना(ग) सागर(घ) मोती
7 असंगत चुनिए
असंगत चुनिए
- 1 अंकइनमें से कौन-सा ‘उषा’ कविता का उपमान नहीं है?
(क) हरी घास पर ओस(ख) राख से लीपा चौका(ग) नील जल में गौर देह(घ) नीला शंख
8 पद्यांश आधारित प्रश्न
पद्यांश आधारित प्रश्न
पद्यांश
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)
- 1 अंकउपर्युक्त पद्यांश में चौके के ‘राख से लीपा हुआ’ होने से नभ के किस रंग की ओर संकेत मिलता है?
(क) गहरे लाल रंग की(ख) चमकीले सुनहरे रंग की(ग) हरे रंग की(घ) हल्के धूसर (स्लेटी) रंग की
पद्यांश
और…
जादू टूटता है इस उषा का अब
सूर्योदय हो रहा है।
जादू टूटता है इस उषा का अब
सूर्योदय हो रहा है।
- 1 अंकउपर्युक्त पद्यांश में ‘जादू’ शब्द किसके लिए आया है?
(क) भोर के पल-पल बदलते रंगों वाले दृश्य के लिए(ख) किसी जादूगर के खेल के लिए(ग) रात के अँधेरे के लिए(घ) बादलों की गड़गड़ाहट के लिए
9 सत्य-असत्य
सत्य-असत्य
- 1 अंकनिम्न कथनों को सत्य (स) या असत्य (अ) के रूप में चिह्नित करें:
I. ‘उषा’ कविता 14 पंक्तियों की है।
II. कविता में चौका, सिल और स्लेट जैसे गाँव-जीवन के उपमान हैं।
III. कविता तुकांत छंद में लिखी गई है।
(क) I-स, II-स, III-अ(ख) I-स, II-अ, III-स(ग) I-अ, II-स, III-स(घ) I-स, II-स, III-स
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
- (ख) पाठ के अनुसार देहरादून उस समय उत्तर प्रदेश में था, जो अब उत्तराखंड में है।
- (घ) शमशेर को ‘साहित्य अकादेमी’ तथा ‘कबीर सम्मान’ सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
- (ग) पाठ के अनुसार प्रयोगवादी काव्यधारा सन् 1943 से प्रारंभ मानी जाती है।
- (क) कवि भोर के आसमान का मूकद्रष्टा नहीं है, बल्कि आसमानी गति को धरती के जीवन से जोड़ने वाला स्रष्टा भी है।
- (घ) ‘उषा’ कविता पाठ में 14 पंक्तियों में छपी है।
- (क) ‘बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से / कि जैसे धुल गई हो’।
- (ग) ‘स्लेट पर या लाल खड़िया चाक मल दी हो किसी ने’, यह भी लालिमा की ही दूसरी उपमा है।
- (ग) यह बिंब आकाश की नीली चमक और हलचल की ओर संकेत करता है (‘नील जल में या किसी की / गौर झिलमिल देह / जैसे हिल रही हो’); बाकी विकल्प पाठ से मेल नहीं खाते।
- (ख) ‘जादू टूटता है इस उषा का अब / सूर्योदय हो रहा है।’: सूर्योदय होते ही उषा का जादू टूट जाता है।
- (क) ‘जैसे’ तुलनावाचक शब्द के प्रयोग से यह उपमा अलंकार है।
अभिकथन-कारण
- (ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है: R केवल ‘बिंबधर्मी’ शब्द का अर्थ बताता है, उसका कारण नहीं। पाठ के अनुसार उनकी बिंबधर्मिता शब्दों से रंग, रेखा, स्वर और कूची की अद्भुत कशीदाकारी का माद्दा रखती है।
- (ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A का ही दूसरा रूप है (पाठ: ‘कवि भोर के आसमान का मूकद्रष्टा नहीं है। वह … जोड़ने वाला स्रष्टा भी है।’); यह A का कारण नहीं बताता, इसलिए R, A की सही व्याख्या नहीं है।
सुमेलन कीजिए
- (घ) शंख = भोर का आकाश (ii); चौका = धूसरता (iii); केसर = सिल पर लालिमा (iv); नील जल-देह = चमक-हलचल (i)। सही मिलान: 1-ii, 2-iii, 3-iv, 4-i।
कथन आधारित प्रश्न
- (ख) कथन I सही है (इसे इसी अर्थ में पढ़ा जा सकता है)। कथन II गलत है, यह कोष्ठक कविता की शुरुआत के पास (चौके वाली पंक्ति के तुरंत बाद) आता है, अंत में नहीं।
सही क्रम में लगाइए
- (घ) सही क्रम: जन्म 1911, प्रयोगवादी काव्यधारा का प्रारंभ 1943 से, निधन 1993 में।
रिक्त स्थान
- (क) मूल पंक्ति है: ‘प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे’।
असंगत चुनिए
- (क) ‘हरी घास पर ओस’ कविता में कहीं नहीं आता; बाकी तीनों कविता के अपने उपमान हैं।
पद्यांश आधारित प्रश्न
- (घ) राख से लीपा चौका हल्का धूसर दिखता है; भोर के नभ को ऐसा चौका कहकर उसके हल्के धूसर रंग की ओर संकेत किया गया है।
- (क) ‘जादू टूटता है इस उषा का अब’: उषा (भोर) के बदलते रंगों का जो दृश्य बना था, वही ‘जादू’ है, जो सूर्योदय होने पर टूटता है।
सत्य-असत्य
- (क) पहले दो कथन सही हैं (14 पंक्तियाँ; चौका, सिल, स्लेट जैसे गाँव-जीवन के उपमान); तीसरा गलत है क्योंकि कविता मुक्त छंद में है, तुकांत नहीं।
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री