कक्षा 12 हिंदी अंतरा भाग 2 अध्याय 11 सुमिरिनी के मनके शॉर्ट नोट्स

कक्षा 12 हिंदी, अंतरा भाग 2, अध्याय 11 (सुमिरिनी के मनके, पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी) का त्वरित पुनरीक्षण। हर परिभाषा, हर शब्दार्थ और हर नामित तथ्य एक ही जगह, बीच का कुछ नहीं। पहले पूरे नोट्स पढ़ें, यह परीक्षा की सुबह पढ़ें।

1 लेखक-परिचय एक नज़र में

तथ्य विवरण
जीवनकाल सन् 1883-1922
जन्मस्थान पुरानी बस्ती, जयपुर
पहचान बहुभाषाविद्, संस्कृत के पंडित
प्रिय विषय प्राचीन इतिहास और पुरातत्व (गहरी रुचि: भाषा विज्ञान)
तीन कहानियाँ सुखमय जीवन, बुद्धू का काँटा, उसने कहा था (गुलेरी जी का पर्याय ही बन चुकी)
अध्यापन 1904 से 1922 तक कई संस्थानों में
उपाधि इतिहास दिवाकर
प्राचार्य पद 11 फरवरी 1922, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, प्राच्य विभाग (पं. मदन मोहन मालवीय के आग्रह पर)
1903-06समालोचक
1911-12मर्यादा
1918-20प्रतिभा
1920-22नागरी प्रचारिणी पत्रिका

2 परिभाषाएँ

परिभाषाएँ
सुमिरिनी के मनकेइस नाम से तीन लघु निबंध पाठ्यपुस्तक में दिए गए हैं (सुमिरिनी = जप की माला, मनका = उसका दाना; शीर्षक को एक माला के तीन अलग दानों की तरह पढ़ा जा सकता है)
व्यंग्यसीधी आलोचना की जगह चुटीले, तीखे ढंग से किसी बात पर चोट करने की शैली

3 तीनों निबंधों का सार

निबंध मुख्य कथा मूल तर्क/संदेश
(क) बालक बच गया आठ वर्षीय बालक से रटे हुए कठिन प्रश्न पुछवाए गए; इनाम में उसने “लड्डू” माँगा मूल प्रतिपाद्य: शिक्षा ग्रहण की सही उम्र; शिक्षा मानस के विकास के लिए हो, मनुष्य शिक्षा के लिए नहीं; लक्ष्य “मनुष्य और मनुष्यता को बचाए रखना”; “सहज पके सो मीठा होए”
(ख) घड़ी के पुर्ज़े धर्माचार्य घड़ी के दृष्टांत से आम आदमी को धर्म-रहस्य जानने से रोकते हैं धर्म को समझने और सवाल पूछने का हक़ हर व्यक्ति का है, किसी एक वर्ग की बपौती नहीं
(ग) ढेले चुन लो पोर्शिया (मर्चेंट ऑफ वेनिस) और पुरश्री (बबुआ हरिश्चंद्र के दुर्लभ बंधु) की पेटी-कथा जैसी (पाठ: “ठीक ऐसी ही लाटरी”) वैदिक-काल की मिट्टी-ढेले (संख्या तय नहीं, कहीं सात, कहीं कम, कहीं ज़्यादा) वाली विवाह-प्रथा पाठ के अनुसार लोक विश्वासों में निहित अंधविश्वासी मान्यताओं पर चोट; आँखों देखी मिट्टी बनाम ग्रहों की कल्पित चाल, पर निष्कर्ष लेखक नहीं देते (“यह मैं क्या कह सकता हूँ?”)

4 बालक से पूछे गए 7 प्रश्न

4.1 सातों विषय एक नज़र में

1

धर्म के दस लक्षण

2

नौ रस के उदाहरण

3

जल 4° से नीचे फैलना

4

चंद्रग्रहण

5

अभाव-पदार्थ शास्त्रार्थ

6

हेनरी अष्टम की पत्नियाँ

7

पेशवा-कुर्सीनामा

5 मिट्टी के ढेले और उनका फल

मिट्टी का स्रोत माना जाने वाला फल
वेदि संतान “वैदिक पंडित”
गौशाला (गोबर) संतान “पशुओं का धनी”
खेत संतान “ज़मींदार पुत्र”
मसान पुरानी मान्यता (लेखक की राय नहीं): घर मसान बनेगा, कन्या जन्मभर घर को जलाती रहेगी
चौराहा पाठ में अलग फल नहीं बताया गया

6 महत्वपूर्ण उद्धरण

याद रखने योग्य उद्धरण
निबंध 1 का अंत“वह ‘लड्डू’ की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।”
वात्स्यायन“आज का कबूतर अच्छा है कल के मोर से, आज का पैसा अच्छा है कल के मोहर से”
कबीर“पत्थर पूजे हरि मिलें तो तू पूज पहार। इससे तो चक्की भली, पीस खाय संसार।।”

7 शब्दार्थ

शब्द अर्थ
वार्षिकोत्सव सालाना जलसा
नुमाइश प्रदर्शनी, दिखावा
कोल्हू तेल निकालने की मशीन
यावज्जन्म जीवनभर
उल्लास खुशी, हर्ष
कुर्सीनामा राज की अवधि
कान ढलकाकर कान खोलकर
दृष्टांत उदाहरण
टंटा झंझट, संकट
घड़ीसाज़ी घड़ी बनाने/मरम्मत की कला
मर्चेंट ऑफ वेनिस शेक्सपियर का प्रसिद्ध नाटक
पोर्शिया उस नाटक की नायिका
प्रतिमूर्ति प्रतिमा, उसके ही जैसा
अकड़बाज़ अकड़ने वाला, अपने फैसले को ही सही मानने वाला, अपने आगे किसी की न मानने वाला
जस यश, कीर्ति
मिट्टी के डगले मिट्टी के ढेले
त्वरित पुनरावृत्ति
  • पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (1883-1922): “उसने कहा था” कहानी उनका पर्याय ही बन चुकी है
  • “सुमिरिनी के मनके” तीन स्वतंत्र लघु निबंध, एक कहानी नहीं
  • बालक बच गया: रटी हुई विद्वत्ता बनाम बच्चे की सहज इच्छा (लड्डू)
  • घड़ी के पुर्ज़े: धर्म पर सवाल पूछने के हक़ की माँग
  • ढेले चुन लो: लोक विश्वासों में निहित अंधविश्वासी मान्यताओं पर चोट (पाठ)
  • तीनों निबंध समाज की मूल समस्याओं पर विचार करने वाले हैं (पाठ); भाषा-शैली सरल, बोलचाल की, फिर भी गंभीर