इस अध्याय के 19 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, परीक्षा की प्रचलित शैलियों में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।
1 सीधे प्रश्न
सीधे प्रश्न
- 1 अंकसूरदास की झोंपड़ी किस उपन्यास से लिया गया अंश है?
(क) कर्मभूमि(ख) रंगभूमि(ग) सेवासदन(घ) गोदान - 1 अंकसूरदास की झोंपड़ी के लेखक कौन हैं?
(क) महादेवी वर्मा(ख) विश्वनाथ त्रिपाठी(ग) जयशंकर प्रसाद(घ) प्रेमचंद - 1 अंकसूरदास की झोंपड़ी किस पुस्तक का पहला पाठ है?
(क) अंतराल भाग 2(ख) अंतरा भाग 2(ग) वितान भाग 2(घ) आरोह भाग 2 - 1 अंकसूरदास की झोंपड़ी में आग किसने लगाई थी?
(क) जगधर(ख) बजरंगी(ग) नायकराम(घ) भैरों - 1 अंकसूरदास की छिपाई पोटली में लगभग कितनी रक़म थी?
(क) ₹200 से कुछ ऊपर(ख) ₹1000 से कुछ ऊपर(ग) ₹500 से कुछ ऊपर(घ) ₹50 से कुछ ऊपर - 1 अंकसुभागी रातभर कहाँ छिपी रही?
(क) मंदिर के पिछवाड़े अमरूद के बाग़ में(ख) भैरों की दुकान में(ग) अपने मायके में(घ) सूरदास की झोंपड़ी में - 1 अंक‘तुम खेल में रोते हो’ यह किसने किससे कहा?
(क) भैरों ने सुभागी से(ख) घीसू ने मिठुआ से(ग) नायकराम ने बजरंगी से(घ) जगधर ने सूरदास से - 1 अंकसूरदास ने अपनी आर्थिक हानि क्यों छुपाई?
(क) उसे रुपये याद ही नहीं थे(ख) उसने जगधर पर भरोसा नहीं किया(ग) उसे शर्म आ रही थी कि रुपये चोरी हो गए(घ) भिखारी के लिए दरिद्रता से अधिक लज्जा की बात धन है
2 अभिकथन-कारण
अभिकथन-कारण
- 1 अंकअभिकथन (A): भैरों ने सूरदास की झोंपड़ी में आग लगाई।
कारण (R): क्योंकि सूरदास ने भैरों के रुपये चुरा लिए थे।
(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता(ग) A सही है, पर R ग़लत है(घ) A ग़लत है, पर R सही है
3 सुमेलन कीजिए
सुमेलन कीजिए
- 1 अंकसही मिलान कीजिए:
सूची A: (A) सूरदास (B) भैरों (C) जगधर (D) सुभागी
सूची B: (i) आग लगाने वाला (ii) उकसाने वाला (iii) झोंपड़ी का मालिक (iv) भैरों की पत्नी
(क) A-ii, B-i, C-iv, D-iii(ख) A-iv, B-iii, C-ii, D-i(ग) A-i, B-ii, C-iii, D-iv(घ) A-iii, B-i, C-ii, D-iv
4 कथन आधारित प्रश्न
कथन आधारित प्रश्न
- 1 अंककथन I: सूरदास अपने रुपयों से मिठुआ का ब्याह करना चाहता था।
कथन II: सूरदास अपने रुपयों से नया मकान बनवाना चाहता था।
(क) कथन I ग़लत है, कथन II सही है(ख) कथन I सही है, कथन II ग़लत है(ग) दोनों कथन ग़लत हैं(घ) दोनों कथन सही हैं - 1 अंककथन I: घीसू के वाक्य ने सूरदास को उसकी निराशा से बाहर निकाला।
कथन II: घीसू ने यह वाक्य सूरदास को सीधे सुनाकर कहा था।
(क) कथन I सही है, कथन II ग़लत है(ख) दोनों कथन ग़लत हैं(ग) कथन I ग़लत है, कथन II सही है(घ) दोनों कथन सही हैं
5 सही क्रम में लगाइए
सही क्रम में लगाइए
- 1 अंकघटनाओं को सही क्रम में लगाइए:
(1) सुभागी का प्रकट होना (2) आग लगना (3) राख में तलाश (4) सूरदास का उठकर राख उड़ाना
(क) 1, 2, 3, 4(ख) 2, 3, 1, 4(ग) 4, 3, 2, 1(घ) 3, 2, 4, 1
6 रिक्त स्थान
रिक्त स्थान
- 1 अंक‘अंधे भिखारी के लिए दरिद्रता इतनी लज्जा की बात नहीं है, जितना ______।’
(क) दुख(ख) अपमान(ग) सुख(घ) धन - 1 अंक‘तो हम भी ______ बार बनाएँगे।’
(क) दस लाख(ख) हज़ार(ग) सौ लाख(घ) सौ
7 असंगत चुनिए
असंगत चुनिए
- 1 अंकउम्र के आधार पर इनमें से कौन-सा पात्र बाक़ी तीन से अलग (असंगत) है?
(क) मिठुआ(ख) जगधर(ग) सूरदास(घ) भैरों
8 गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश
उस समय तक राख ठंडी हो चुकी थी। सूरदास अटकल से द्वार की ओर झोंपड़े में घुसा; पर दो-तीन पग के बाद एकाएक पाँव भूबल में पड़ गया। ऊपर राख थी, लेकिन नीचे आग। तुरंत पाँव खींच लिया और अपनी लकड़ी से राख को उलटने-पलटने लगा, जिससे नीचे की आग भी जल्द राख हो जाए। … उसने उसी जगह की सीध में राख को टटोलना शुरू किया, जहाँ छप्पर में पोटली रखी थी। उसका दिल धड़क रहा था। … एक-एक मुट्ठी राख हाथ में लेकर देखी। लोटा मिला, तवा मिला, किंतु पोटली न मिली।
- 1 अंकगद्यांश के अनुसार सूरदास राख में क्या ढूँढ़ रहा था?
(क) दियासलाई(ख) अपनी छिपाई पोटली(ग) अपनी लकड़ी(घ) लोटा और तवा - 1 अंकगद्यांश के अनुसार राख छानने पर सूरदास को क्या मिला?
(क) ईंट और चाँदी(ख) कुछ भी नहीं मिला(ग) पोटली और रुपये(घ) लोटा और तवा, पर पोटली नहीं
9 सत्य-असत्य
सत्य-असत्य
- 1 अंकनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(i) सूरदास एक अंधा भिखारी है।
(ii) भैरों सूरदास का मित्र है।
(iii) जगधर एक बेईमान खोंचेवाला है।
(iv) सुभागी भैरों की बहन है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
(क) केवल (i) और (iii)(ख) केवल (ii) और (iv)(ग) (i), (ii) और (iii)(घ) सभी चारों
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
- (ख) यह अंश प्रेमचंद के उपन्यास रंगभूमि से लिया गया है, जैसा पाठ के अंत में भी लिखा है।
- (घ) इस अंश के लेखक प्रेमचंद हैं; पाठ के आरंभ में लेखक का नाम दिया गया है।
- (क) यह अंतराल भाग 2 (कक्षा 12 हिंदी ऐच्छिक) का पहला पाठ है।
- (घ) भैरों ने ख़ुद कबूल किया, ‘हाँ, चुपके से एक दियासलाई लगा दी’।
- (ग) सूरदास मन में सोचता है, ‘पूरे पाँच सौ रुपये थे, कुछ पैसे ऊपर हो गए थे’, और भैरों रुपये गिनकर बताता है, ‘पाँच सौ से ऊपर हैं’।
- (क) पाठ में स्पष्ट है, ‘रातभर मंदिर के पिछवाड़े अमरूद के बाग में छिपी बैठी थी’।
- (ख) घीसू मिठुआ को चिढ़ाते हुए यह कहता है, जिसे सुनकर सूरदास को झटका लगता है।
- (घ) पाठ की सीधी पंक्ति है, ‘अंधे भिखारी के लिए दरिद्रता इतनी लज्जा की बात नहीं है, जितना धन’, और ‘भिखारियों के लिए धन-संचय पाप-संचय से कम अपमान की बात नहीं है’।
अभिकथन-कारण
- (ग) भैरों ने वाक़ई आग लगाई (A सही), पर इसका कारण सूरदास द्वारा रुपये चुराना नहीं था; पाठ-परिचय के अनुसार सुभागी और सूरदास की चर्चा से हुई अपनी बदनामी और अपमान का बदला लेने के लिए भैरों ने ऐसा किया (R ग़लत)। सूरदास का यह अनुमान कि ‘शायद उस जन्म में मैंने भैरों के रुपये चुराए होंगे’ उसकी निराशा का विचार है, कोई कारण नहीं; पाठ में रुपये भैरों ने उठाए। इसलिए उत्तर (ग) है।
सुमेलन कीजिए
- (घ) सूरदास झोंपड़ी का मालिक (iii) है, भैरों ने आग लगाई (i), जगधर उकसाने वाला है (ii), सुभागी भैरों की पत्नी है (iv), यानी A-iii, B-i, C-ii, D-iv। अतः सही विकल्प (घ) है।
कथन आधारित प्रश्न
- (ख) कथन I सही है। कथन II ग़लत है: पाठ में रुपयों के उपयोग के रूप में पिंडदान, मिठुआ का ब्याह और कुआँ बताए गए हैं। आग के बाद सूरदास ‘दूसरा घर बनाएँगे’ कहता है, पर वह रुपयों से नया मकान बनवाने की इच्छा नहीं है।
- (क) कथन I सही है। कथन II ग़लत है, घीसू यह वाक्य मिठुआ को चिढ़ाते हुए कह रहा था, सूरदास ने इसे संयोगवश सुन लिया।
सही क्रम में लगाइए
- (ख) सही क्रम है: पहले आग लगती है (2), फिर सूरदास राख में तलाश करता है (3), फिर सुभागी प्रकट होती है (1), और अंत में सूरदास उठकर राख उड़ाता है (4)। अतः सही विकल्प (ख) है।
रिक्त स्थान
- (घ) पाठ की मूल पंक्ति है, ‘जितना धन’, यानी भिखारी के लिए धन का दिखना ही बड़ी बात है, ग़रीबी नहीं।
- (ग) सूरदास का अंतिम और सबसे प्रसिद्ध वाक्य है ‘तो हम भी सौ लाख बार बनाएँगे’।
असंगत चुनिए
- (क) सूरदास, भैरों और जगधर तीनों वयस्क पात्र हैं, जबकि मिठुआ एक बालक है (पाठ: ‘बालकों को संख्याओं से विशेष रुचि होती है’)। उम्र के आधार पर वही असंगत है।
गद्यांश आधारित प्रश्न
- (ख) गद्यांश स्पष्ट कहता है कि वह उसी जगह की सीध में राख टटोल रहा था, जहाँ पोटली रखी थी।
- (घ) गद्यांश के अनुसार सारी राख छान डालने पर ‘लोटा मिला, तवा मिला, किंतु पोटली न मिली’। (पूरे पाठ में इससे पहले एक ईंट का टुकड़ा भी हाथ लगता है।)
सत्य-असत्य
- (क) (i) सही है, सूरदास अंधा भिखारी है। (ii) ग़लत है, भैरों उसका शत्रु बन जाता है, मित्र नहीं। (iii) सही है, जगधर खोंचा लेकर घूमता है और स्वयं मानता है कि टेनी मारता है, बाट खोटे रखता है। (iv) ग़लत है, सुभागी भैरों की पत्नी है, बहन नहीं। इसलिए सही कथन केवल (i) और (iii) हैं।
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री