कक्षा 12 इतिहास अध्याय 4 विचारक, विश्वास और इमारतें शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

आख़िरी वक़्त की रिवीज़न के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, ज़रूरी तथ्य, तारीख़ें और तालिकाएँ। पूरी व्याख्या वाले विस्तृत नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 पूरा अध्याय एक फ़्रेम में

विचारक, विश्वास और इमारतें (लगभग 600 ई.पू.-600 ई.)
विचारकयज्ञ-परंपरा पर नए प्रश्न: उपनिषद, आजीविक, लोकायत, महावीर, बुद्ध
विश्वासत्रिपिटक, संघ, महायान, वैष्णव-शैव भक्ति परंपराएँ
इमारतेंसाँची का स्तूप, मूर्तिकला, आरंभिक मंदिर, औपनिवेशिक “खोज”
स्रोत क्या बताता है
ग्रंथ त्रिपिटक, उपनिषद, उत्तराध्ययन सूत्र, पुराण, थेरीगाथा
अभिलेख दान-अभिलेख (साँची, भरहुत), धनवती का अभिलेख, ताम्रपत्र (एलोरा)
स्मारक साँची-भरहुत-सारनाथ-अमरावती के स्तूप, अजंता की चित्रकला, एलोरा के गुफ़ा-मंदिर
औपनिवेशिक अभिलेख कनिंघम, मेकेंज़ी, इलियट, कोल, मार्शल के सर्वेक्षण व प्रकाशन

2 याद रखने लायक़ आँकड़े

64बौद्ध ग्रंथों में गिनाए गए वाद-विवादी संप्रदाय/विचारधाराएँ
23महावीर से पहले जैन तीर्थंकर
1818साँची की ‘खोज’, तब भी चार में से तीन तोरणद्वार खड़े थे
आँकड़ा किस बात का
1500-1000 ई.पू. ऋग्वेद के संकलन का काल
5 व्रत जैन भिक्षु-भिक्षुणियों के व्रत
200 वर्ष बुद्ध के बाद अशोक के लुम्बिनी-स्तंभ तक का अंतराल
10 अवतार वैष्णव धर्म के दस अवतार
33वाँ वर्ष धनवती का अभिलेख, कुषाण शासक हुविष्क के शासन-काल में

3 तारीख़ें एक नज़र में

तारीख़ क्या हुआ
लगभग 1500-1000 ई.पू. आरंभिक वैदिक परंपराएँ, ऋग्वेद
लगभग 1000-500 ई.पू. परवर्ती वैदिक परंपराएँ, गृहस्थ यज्ञ
लगभग छठी शताब्दी ई.पू. आरंभिक उपनिषद; जैन धर्म (महावीर), बौद्ध धर्म (बुद्ध)
लगभग तीसरी शताब्दी ई.पू. पहले स्तूप; अशोक की आजीविक गुफ़ाएँ
लगभग दूसरी शताब्दी ई.पू. से आगे महायान बौद्ध धर्म, वैष्णव धर्म, शैव धर्म और देवी-पंथों का विकास
लगभग तीसरी शताब्दी ई. सबसे पुराने मंदिर
आठवीं शताब्दी ई. एलोरा का कैलाशनाथ मंदिर, एक ही चट्टान से तराशा गया
1796 अमरावती की खोज, स्थानीय राजा द्वारा
1814 भारतीय संग्रहालय, कलकत्ता की स्थापना
1818 साँची की खोज
1854 कनिंघम की भिलसा टोप्स; वाल्टर इलियट का “एलियट संगमरमर” संग्रह
1868-1901 शाहजहाँ बेगम का शासनकाल, साँची संरक्षण का वित्तपोषण
1880 एच.एच. कोल को प्राचीन इमारतों का संग्रहाध्यक्ष बनाया गया
1888 ट्रेज़र-ट्रोव एक्ट, जिसके अनुसार सरकार पुरातात्विक महत्त्व की किसी भी चीज़ को हस्तगत कर सकती थी
1914 जॉन मार्शल और अल्फ्रेड फूसे की द मॉन्युमेंट्स ऑफ़ साँची
1989 साँची को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया

4 सभी परिभाषाएँ एक जगह

शब्द अर्थ
व्यक्तिगत प्रयास से मुक्ति यह विचार कि कोई भी मुक्ति की दिशा में प्रयास कर सकता है, जन्म-जाति से बंधे बिना
अहिंसा जीवों को हानि न पहुँचाना; जैन दर्शन का केंद्र बिंदु
संतचरित्र किसी संत की जीवनी, शब्दशः सटीक न भी हो, अनुयायियों की मान्यता दर्शाती है
अनिच्च / अनत्त / दुक्ख क्षणभंगुरता / आत्मा-रहितता / अस्तित्व में अंतर्निहित दुख
निब्बान अहंकार और इच्छा का बुझना; संन्यासियों के लिए पुनर्जन्म-चक्र की समाप्ति
त्रिपिटक “तीन टोकरियाँ”: विनय पिटक (नियम), सुत्त पिटक (शिक्षाएँ), अभिधम्म पिटक (दर्शन)
संघ बुद्ध द्वारा स्थापित मठवासी संगठन; सर्वसम्मति-फिर-मतदान पर चलता था
चैत्य पवित्र स्थान/वृक्ष/चट्टान, संभवतः ‘चिता’ से संबंधित
स्तूप अवशेष रखने वाला टीला; संस्कृत में शाब्दिक अर्थ ‘ढेर’
अंड / हर्मिका / यष्टि स्तूप का गोल भाग / ऊपर की वेदिका / छत्री धारण करने वाला स्तंभ
शालभंजिका वृक्ष पकड़े स्त्री का शुभ, बौद्ध-पूर्व लोक-प्रतीक
महायान / हीनयान / थेरवादी “महान वाहन” (मूर्ति-पूजा केंद्रित) / महायान द्वारा पुरानी परंपरा को दिया नाम “छोटा वाहन” / उसी परंपरा का स्व-नाम, थेरों के अनुयायी
बोधिसत्त करुणामय प्राणी जो निब्बान त्यागकर दूसरों की सहायता करता है
भक्ति भक्त और भगवान के बीच प्रेम का संबंध
गर्भगृह / शिखर मंदिर का सबसे भीतरी वर्गाकार कक्ष / मंदिर के ऊपर का ऊँचा भाग
परिचित के आधार पर पैमाना उन्नीसवीं सदी के यूरोपीय विद्वानों का तरीका: भारतीय मूर्तियों को परिचित यूनानी कला से तुलना कर समझना, यानी ‘परिचित चीज़ों के आधार पर अपरिचित चीज़ों को समझने का पैमाना’

5 साँची बनाम अमरावती

साँची अमरावती
खोज वर्ष 1818 1796
स्थिति चार में से तीन प्रवेश-द्वार खड़े मिले पत्थर के लिए खोदा गया, मूर्तियाँ बिखरीं
परिणाम ASI पुनर्स्थापन का आदर्श बना आज “तुच्छ छोटा टीला” मात्र
निर्णायक कारण भोपाल की बेगमों का अनुदान; खोज की जगह पर ही संरक्षण की कोल की बात यहाँ मान ली गई शायद खोज तब हुई जब विद्वान मूल स्थान पर संरक्षण का महत्त्व नहीं समझ पाए थे; कोल अधिकारियों को राज़ी नहीं कर पाए

6 बौद्ध-जीवन के चार पवित्र स्थल

स्थल घटना
लुम्बिनी जन्म
बोधगया ज्ञान-प्राप्ति
सारनाथ प्रथम उपदेश
कुशीनगर निब्बान (महापरिनिब्बान)

7 कौन क्या

नाम किस बात के लिए याद रखें
शाहजहाँ बेगम, सुल्तानजहाँ बेगम भोपाल की शासिकाएँ; साँची के संरक्षण, संग्रहालय और प्रकाशनों के लिए अनुदान दिया
अलेक्ज़ेंडर कनिंघम साँची के चित्र बनाए, अभिलेख पढ़े; भिलसा टोप्स (1854) लिखी
जॉन मार्शल, अल्फ़्रेड फ़ूशे द मॉन्युमेंट्स ऑफ़ साँची (1914) प्रकाशित की, सुल्तानजहाँ बेगम को समर्पित
कॉलिन मेकेंज़ी अमरावती की मूर्तियों के चित्र बनाए; उनकी रिपोर्ट कभी प्रकाशित नहीं हुई
वाल्टर एलियट गुंटूर के कमिश्नर; 1854 में अमरावती से ले जाई गई मूर्तियाँ “एलियट संगमरमर” कहलाईं
एच.एच. कोल मूल स्थान पर संरक्षण के पक्षधर; साँची में सफल, अमरावती में असफल
जेम्स फर्गुसन अनूदित ग्रंथों के बिना साँची को वृक्ष और सर्प-पूजा का केंद्र मान बैठे
महावीर (वर्धमान) उनसे पहले 23 तीर्थंकर हुए; अहिंसा और पाँच व्रतों की शिक्षा
बुद्ध (सिद्धार्थ) शाक्य कबीले के; ज्ञान-प्राप्ति के बाद धम्म और मध्यम मार्ग की शिक्षा दी
आनंद बुद्ध के प्रिय शिष्य; उन्होंने बुद्ध को समझाकर महिलाओं के संघ में आने की अनुमति प्राप्त की
महाप्रजापति गोतमी बुद्ध की उपमाता; संघ में आने वाली पहली भिक्खुनी
पुन्ना एक दासी; थेरीगाथा में उसकी रचना कर्मकांडी पवित्रता पर प्रश्न उठाती है
मक्खलि गोसाल, अजीत केसकंबलिन् आजीविक (नियतिवादी) और लोकायत (भौतिकवादी) परंपराओं के उपदेशक
धनवती भिक्खुनी, जिसके अभिलेख में उसके परिवार और गुरु के नाम दर्ज हैं
फा-शिएन, श्वैन त्सांग चीनी तीर्थयात्री, जो बौद्ध ग्रंथ भारत से अपने देश ले गए

8 फटाफट पुनरावृत्ति · परीक्षा से एक रात पहले यही पढ़ें

ईसा पूर्व प्रथम सहस्राब्दि का मध्य विश्व इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था: ईरान में ज़रथुस्त्र, चीन में खुंगत्सी, यूनान में सुकरात, प्लेटो, अरस्तु और भारत में महावीर और बुद्ध; भारत में महावीर और बुद्ध ने वेदों के प्रभुत्व पर प्रश्न उठाए और माना कि मुक्ति का प्रयास हर व्यक्ति स्वयं कर सकता है। जैन धर्म अहिंसा और पाँच व्रतों के माध्यम से संन्यास पर केंद्रित है; महावीर से पहले 23 तीर्थंकर माने जाते हैं। बुद्ध का मार्ग तप और भोग के बीच मध्यम मार्ग है, अनिच्च-अनत्त-दुक्ख पर आधारित, निब्बान लक्ष्य है। बुद्ध की शिक्षाएँ त्रिपिटक के रूप में बचीं, मृत्यु के बाद वेसाली में मौखिक रूप से संकलित, बाद में पालि फिर संस्कृत में लिखी गईं। संघ ने हर सामाजिक समूह को समान रूप से स्वीकार किया, आनंद के हस्तक्षेप से स्त्रियाँ भी शामिल हुईं। एक स्तूप अंड में अवशेष रखता है, ऊपर हर्मिका-यष्टि-छत्री, चारों ओर रेलिंग; पूजक दक्षिणावर्त परिक्रमा करते थे। साँची बच गया (बेगमों का अनुदान, प्लास्टर प्रतिकृतियाँ, कोल की बात मानी गई); अमरावती शायद पहले खोजा गया, जब मूल स्थान पर संरक्षण का महत्त्व नहीं समझा गया था, और उसके पत्थर बिखर गए। मूर्तिकला को उस परंपरा से पढ़ना ज़रूरी है जिसने इसे बनाया: ख़ाली आसन, चक्र और स्तूप जैसे प्रतीक बुद्ध के जीवन की घटनाओं के लिए खड़े हैं, शालभंजिका जैसे लोकप्रिय बौद्ध-पूर्व प्रतीक बौद्ध स्मारकों में साथ-साथ मौजूद हैं। महायान ने बौद्ध धर्म में मुक्तिदाता की कल्पना, बोधिसत्त की अवधारणा और बुद्ध व बोधिसत्तों की मूर्ति-पूजा जोड़ी; वैष्णव और शैव धर्म ने समानांतर रूप से भक्ति और अवतार परंपराएँ विकसित कीं, और पहले मंदिर (गर्भगृह-शिखर) बनने लगे। यूरोपीय विद्वानों ने भारतीय मूर्तियों को परिचित यूनानी मूर्तियों के पैमाने से समझा; ग्रंथों से मिलाना बेहतर तरीका है, पर महाबलीपुरम जैसे उदाहरण दिखाते हैं कि इससे भी मतभेद बने रह सकते हैं।