Class 12 Psychology Chapter 1 मनोवैज्ञानिक गुणों में विभिन्नताएँ Important Questions with Answers

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. व्यक्तिगत भिन्नताएँ किसे कहते हैं?

उत्तर: व्यक्तिगत भिन्नताएँ व्यक्तियों की विशेषताओं और व्यवहार के स्वरूपों में पाए जाने वाले वैशिष्ट्य तथा विचलनशीलता को कहते हैं।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. स्थितिवाद क्या है?

उत्तर: स्थितिवाद वह दृष्टिकोण है जिसके अनुसार व्यवहार व्यक्ति के स्थायी विशेषकों की अपेक्षा उस स्थिति और परिस्थितियों से अधिक प्रभावित होता है जिनमें व्यक्ति है।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. अभिक्षमता को परिभाषित करें।

उत्तर: अभिक्षमता किसी व्यक्ति की प्रशिक्षण के बाद विशेष ज्ञान या कौशल के अर्जन की अंतर्निहित संभाव्यता है।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. स्पीयरमैन के सिद्धांत में सा-कारक क्या है?

उत्तर: सा-कारक बुद्धि का सामान्य कारक है: वे मानसिक संक्रियाएँ जो प्राथमिक हैं और सभी प्रकार के निष्पादन पर प्रभाव डालती हैं।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. विलियम स्टर्न का बुद्धि लब्धि सूत्र लिखें।

उत्तर: बुद्धि लब्धि = (मानसिक आयु ÷ कालानुक्रमिक आयु) × 100।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. मानसिक आयु (MA) क्या है?

उत्तर: मानसिक आयु व्यक्ति के बौद्धिक विकास को उसकी अपनी आयु वर्ग के अन्य व्यक्तियों की तुलना में मापने वाला माप है।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. गार्डनर की आठ बहु-बुद्धियों में से कोई दो नाम बताएँ।

उत्तर: भाषागत, तार्किक-गणितीय, देशिक, संगीतात्मक, शारीरिक-गतिसंवेदी, अंतर्वैयक्तिक, अंतःव्यक्ति, प्रकृतिवादी में से कोई दो।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. सांवेगिक लब्धि (EQ) क्या है?

उत्तर: सांवेगिक लब्धि किसी व्यक्ति की सांवेगिक बुद्धि की मात्रा बताने में उपयोग होती है, ठीक उसी प्रकार जैसे बुद्धि लब्धि बुद्धि की मात्रा बताती है।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. औपचारिक और अनौपचारिक मूल्यांकन में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: औपचारिक मूल्यांकन वस्तुनिष्ठ, मानकीकृत और व्यवस्थित होता है, प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों द्वारा किया जाता है। अनौपचारिक मूल्यांकन व्यक्ति और मूल्यांकनकर्ता के अनुसार बदलता रहता है और व्यक्तिनिष्ठ व्याख्या के लिए खुला रहता है।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. अभिक्षमता और अभिरुचि में अंतर बताएँ।

उत्तर: अभिरुचि किसी क्रिया को करने की वरीयता है, जबकि अभिक्षमता उस कार्य को करने की संभाव्यता या विभवता है (प्रशिक्षण के बाद उसे सीखकर कर पाने की अंतर्निहित क्षमता)। व्यक्ति में अभिरुचि हो बिना अभिक्षमता के, या अभिक्षमता हो बिना अभिरुचि के, दोनों ही स्थितियों में सफलता के लिए दोनों आवश्यक हैं।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. स्टर्नबर्ग की घटकीय बुद्धि के तीन उप-घटक कौन-से हैं?

उत्तर: (1) ज्ञानार्जन घटक, जो सीखने के लिए उत्तरदायी है; (2) मेटा या उच्च स्तरीय घटक, जो योजना बनाता है कि क्या और कैसे करना है; (3) निष्पादन घटक, जो कार्यों को वास्तव में करता है।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. पास मॉडल में सहकालिक और आनुक्रमिक प्रक्रमण में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: सहकालिक प्रक्रमण सूचनाओं को एक साथ एक सार्थक, परस्पर संबंधित समग्र प्रतिरूप में समाकलित करता है (जैसे रैवेंस प्रोग्रेसिव मैष्ट्रिसेस)। आनुक्रमिक प्रक्रमण सूचनाओं को क्रम से याद रखता है, ताकि एक का पुनःस्मरण अगले का पुनःस्मरण कराए (जैसे गिनती, वर्णमाला, गुणन सारणी)।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. AAMD की परिभाषा बौद्धिक अशक्तता की कौन-सी तीन विशेषताएँ बताती है?

उत्तर: (1) अवसामान्य बौद्धिक प्रकार्यात्मकता (बुद्धि लब्धि 70 से कम); (2) अनुकूलित व्यवहार में न्यूनता, यानी स्वतंत्र होने और पर्यावरण से प्रभावी ढंग से समायोजन करने की क्षमता में कमी; (3) विकासात्मक अवस्था में, यानी 0 से 18 वर्ष की आयु में, प्रकट होना।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. प्रतिभा (giftedness) और प्रवीणता (talent) में क्या अंतर है?

उत्तर: प्रतिभा असाधारण सामान्य योग्यता है जो विस्तृत क्षेत्रों में श्रेष्ठ निष्पादन में दिखती है, जबकि प्रवीणता एक संकुचित शब्द है जो किसी एक विशिष्ट क्षेत्र (आध्यात्मिक, सामाजिक, सौंदर्यपरक आदि) में उल्लेखनीय योग्यता को दर्शाता है।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. संस्कृति-निष्पक्ष परीक्षण क्या है, और इसे बनाना कठिन क्यों है?

उत्तर: संस्कृति-निष्पक्ष परीक्षण भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के व्यक्तियों में भेदभाव नहीं करता: इसके एकांश सभी संस्कृतियों में सर्वनिष्ठ अनुभवों पर आधारित होते हैं या भाषा की आवश्यकता नहीं रखते। यह कठिन इसलिए है क्योंकि ऐसा परीक्षण बनाना लगभग असंभव है जो सभी संस्कृतियों के लोगों पर समान रूप से सार्थक रूप से लागू हो; बहुत से बुद्धि परीक्षण उस संस्कृति के प्रति अभिनति प्रदर्शित करते हैं जिसमें वे विकसित हुए।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. वाइगॉट्सकी बौद्धिक विकास में संस्कृति की भूमिका को कैसे समझाते हैं?

उत्तर: वाइगॉट्सकी का तर्क है कि संस्कृति वह सामाजिक संदर्भ प्रदान करती है जिसमें व्यक्ति रहता है, विकसित होता है और जगत को समझता है। प्रारंभिक मानसिक प्रक्रियाएँ (रोना, माता की आवाज़ पर ध्यान देना, चलना) सर्वव्यापी हैं, परंतु समस्या-समाधान और चिंतन जैसी उच्च मानसिक प्रक्रियाएँ मुख्यतः संस्कृति की उपज हैं।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. स्पीयरमैन के द्वि-कारक सिद्धांत की व्याख्या करें।

उत्तर: 1927 में चार्ल्स स्पीयरमैन ने कारक विश्लेषण नामक सांख्यिकीय विधि का उपयोग करते हुए द्वि-कारक सिद्धांत प्रस्तुत किया। उन्होंने दिखाया कि बुद्धि में एक सामान्य कारक (सा-कारक) होता है: वे मानसिक संक्रियाएँ जो प्राथमिक हैं और सभी प्रकार के निष्पादन पर प्रभाव डालती हैं; इसके साथ-साथ कुछ विशिष्ट कारक (वि-कारक) भी होते हैं, जो विशिष्ट क्षेत्रों से संबंधित योग्यताएँ हैं। स्पीयरमैन के अनुसार, श्रेष्ठ गायक, वास्तुकार, वैज्ञानिक और खिलाड़ी सा-कारक में उच्च हो सकते हैं, परंतु उनकी अपनी विशिष्ट वि-कारक योग्यताएँ भी होती हैं, जिनके कारण वे अपने-अपने क्षेत्र में श्रेष्ठ हो जाते हैं।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. स्टर्नबर्ग के बुद्धि के त्रिचापीय सिद्धांत का वर्णन करें।

उत्तर: स्टर्नबर्ग (1985) ने बुद्धि को उस योग्यता के रूप में परिभाषित किया जिससे व्यक्ति अपने पर्यावरण के प्रति अनुकूलित होता है, अपने तथा अपने समाज-संस्कृति के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु पर्यावरण के कुछ पक्षों का चयन करता है और उन्हें परिवर्तित करता है। उन्होंने तीन प्रकार की बुद्धियाँ बताईं। घटकीय (विश्लेषणात्मक) बुद्धि समस्या-समाधान के लिए सूचनाओं का विश्लेषण करती है, इसके तीन उप-घटक हैं: ज्ञानार्जन, मेटा/योजना घटक, और निष्पादन घटक। आनुभविक (सर्जनात्मक) बुद्धि पूर्व अनुभवों का सर्जनात्मक उपयोग नई समस्याओं के समाधान में करती है। सांदर्भिक (व्यावहारिक) बुद्धि दैनिक पर्यावरणी माँगों से निपटती है: ‘व्यावहारिक बुद्धि’, जिसमें व्यक्ति पर्यावरण से अनुकूलन करता है, उसे चुनता है, या अपनी आवश्यकतानुसार बदल लेता है।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. पास मॉडल की व्याख्या करें।

उत्तर: जे.पी. दास, जैक नागलीरी और किर्बी (1994) द्वारा विकसित पास मॉडल कहता है कि बौद्धिक क्रिया मस्तिष्क की तीन तंत्रिकीय प्रकार्यात्मक इकाइयों के अन्योन्याश्रित कार्य से बनती है। भाव प्रबोधन/अवधान इकाई व्यक्ति को इष्टतम सतर्कता की स्थिति में लाती है ताकि वह समस्या के प्रासंगिक पक्षों पर ध्यान दे सके। सहकालिक-आनुक्रमिक प्रक्रमण इकाई सूचनाओं को या तो एक साथ, परस्पर संबंधित समग्र रूप में (सहकालिक, जैसे रैवेंस प्रोग्रेसिव मैष्ट्रिसेस), या क्रम से, एक के बाद एक (आनुक्रमिक, जैसे अंकों या वर्णमाला को याद रखना) समाकलित करती है। योजना इकाई व्यक्ति को क्रियाओं के संभावित विकल्पों के बारे में सोचने, चुनी गई योजना को कार्यान्वित करने, उसकी प्रभाविता का मूल्यांकन करने और आवश्यकता पड़ने पर संशोधन करने में सक्षम बनाती है। ये तीनों प्रक्रियाएँ औपचारिक या अनौपचारिक रूप से बने ज्ञान भंडार पर कार्य करती हैं, और दास-नागलीरी ने 5-18 वर्ष के लिए संज्ञानात्मक मूल्यांकन प्रणाली (CAS) नामक परीक्षण माला भी विकसित की।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. अध्याय में दिए प्रमाणों के आधार पर, बुद्धि के विकास में आनुवंशिकता और पर्यावरण की भूमिका पर चर्चा करें।

उत्तर: आनुवंशिकता की भूमिका का प्रमाण जुड़वाँ और दत्तक बच्चों के अध्ययन से मिलता है: साथ पले समरूप जुड़वाँ बच्चों की बुद्धि में सहसंबंध लगभग 0.90 है, अलग पर्यावरण में पले समरूप जुड़वाँ बच्चों में 0.72, साथ पले भ्रातृ जुड़वाँ बच्चों में लगभग 0.60, साथ पले भाई-बहनों में लगभग 0.50, और अलग पले सहोदरों में लगभग 0.25 है: आनुवंशिक निकटता बढ़ने के साथ सहसंबंध बढ़ता है, चाहे पर्यावरण भिन्न ही क्यों न हो। पर्यावरण की भूमिका का प्रमाण उन्हीं दत्तक अध्ययनों से मिलता है: जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनकी बुद्धि लब्धि गोद लेने वाले माता-पिता के स्तर के निकट पहुँचती जाती है; सुविधावंचित घरों से उच्च सामाजिक-आर्थिक परिवारों में गोद लिए बच्चों की बुद्धि में बड़ी वृद्धि दिखाई देती है। सामान्य सहमति यह है कि बुद्धि आनुवंशिकता, जो एक सीमा तय करती है, और पर्यावरण, जो उस सीमा के भीतर उपलब्ध अवलंबों और अवसरों के माध्यम से विकास को दिशा देता है, दोनों की जटिल अंतःक्रिया का परिणाम है।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. तालिका 1-1 का उपयोग करते हुए बताएँ कि मनोवैज्ञानिक बुद्धि लब्धि प्राप्तांकों के आधार पर लोगों को कैसे वर्गीकृत करते हैं।

उत्तर: जनसंख्या में बुद्धि लब्धि प्राप्तांक एक सममित, घंटाकार सामान्य वक्र बनाते हैं, जिसका माध्य 100 है। तालिका 1-1 सात वर्गों में वर्गीकरण करती है: 130 से अधिक अतिश्रेष्ठ (2.2%), 120-130 श्रेष्ठ (6.7%), 110-119 उच्च औसत (16.1%), 90-109 औसत (50.0%, सबसे बड़ा वर्ग), 80-89 निम्न औसत (16.1%), 70-79 सीमावर्ती (6.7%), तथा 70 से कम बौद्धिक रूप से अशक्त (2.2%)। 90-110 बुद्धि लब्धि वाले व्यक्ति सामान्य बुद्धि के कहलाते हैं, जबकि दोनों चरम समूह, लगभग 2% प्रत्येक, क्रमशः बौद्धिक रूप से प्रतिभाशाली और बौद्धिक रूप से अशक्त कहलाते हैं, और सामान्य जनसंख्या से संज्ञानात्मक, सांवेगिक और अभिप्रेरणात्मक विशेषताओं में काफ़ी भिन्न होते हैं।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. अध्याय में दी गई प्रतिभाशाली बच्चे की विशेषताओं पर चर्चा करें।

उत्तर: प्रतिभाशाली बच्चे बौद्धिक श्रेष्ठता के लक्षण बहुत पहले ही दिखा देते हैं: शैशवकाल और पूर्व-बाल्यावस्था में ही अधिक अवधान विस्तृति, अच्छी प्रत्यभिज्ञान स्मृति, नवीनता के प्रति रुझान, पर्यावरणी परिवर्तनों के प्रति उच्च संवेदनशीलता और भाषा-कौशल का शीघ्र प्रकटीकरण दिखाई देने लगता है। अध्याय कई विशेषताएँ सूचीबद्ध करता है: उन्नत तार्किक चिंतन, प्रश्न करने की प्रवृत्ति और समस्या-समाधान योग्यता; सूचना प्रक्रमण की उच्च गति; सामान्यीकरण और विभेदन की श्रेष्ठ योग्यता; मौलिक और सर्जनात्मक चिंतन का उन्नत स्तर; अंतर्भूत अभिप्रेरणा और आत्म-सम्मान का उच्च स्तर; और स्वतंत्र, अननुरूप चिंतन, प्रायः लंबी अवधि तक अकेले अध्ययन की वरीयता के साथ। प्रतिभाशालिता को केवल श्रेष्ठ शैक्षिक निष्पादन नहीं समझना चाहिए: श्रेष्ठ मनोगतिक योग्यता वाले खिलाड़ी भी प्रतिभाशाली होते हैं, और पहचान के लिए परीक्षण प्राप्तांकों के साथ-साथ अध्यापकों का निर्णय, विद्यालय-अभिलेख, माता-पिता के साक्षात्कार, तथा समकक्षियों-स्वयं का निर्धारण भी उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. भारतीय परंपरा में ‘समाकलित बुद्धि’ के संप्रत्यय की व्याख्या करें, जैसा अध्याय में वर्णित है।

उत्तर: पश्चिमी ‘तकनीकी बुद्धि’ (विश्लेषण, गति, निष्पादन और उपलब्धि-प्रवणता पर आधारित) के विपरीत, भारतीय परंपरा बुद्धि को समग्र दृष्टिकोण से ‘समाकलित बुद्धि’ के रूप में देखती है, जो समाज और व्यापक विश्व-पर्यावरण से व्यक्ति के संबंधों पर बल देती है, तथा संज्ञानात्मक और असंज्ञानात्मक दोनों प्रक्रियाओं तथा उनके समाकलन को समान महत्व देती है। बुद्धि के लिए प्रयुक्त संस्कृत शब्द ‘बुद्धि’ पश्चिमी संप्रत्यय से कहीं अधिक व्यापक है: जे.पी. दास के अनुसार, इसमें मानसिक प्रयास, दृढ़ निश्चय के साथ की जाने वाली क्रियाएँ, अनुभूतियाँ और मत, ज्ञान-विभेदन-समझ जैसी संज्ञानात्मक क्षमताओं के साथ-साथ अंतर्विवेक, संकल्प और अभिलाषाओं पर आधारित आत्मज्ञान भी सम्मिलित है। भारतीय परंपरा बुद्धि के चार पक्ष पहचानती है: संज्ञानात्मक क्षमता, सामाजिक क्षमता (सामाजिक व्यवस्था के प्रति सम्मान, बड़ों-छोटों-वंचितों के प्रति प्रतिबद्धता), सांवेगिक क्षमता (आत्म-नियमन, ईमानदारी, अच्छा आचरण), और उद्यमी क्षमता (प्रतिबद्धता, अध्यवसाय, कठिन परिश्रम, लक्ष्यनिर्देशित व्यवहार)।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. हावर्ड गार्डनर द्वारा पहचानी गई बहु-बुद्धि के आठों प्रकारों की उदाहरण सहित व्याख्या करें।

उत्तर: हावर्ड गार्डनर ने प्रस्तावित किया कि बुद्धि एक तत्व नहीं बल्कि कई भिन्न, स्वतंत्र बुद्धियों का समुच्चय है, जो फिर भी समस्या-समाधान के लिए आपस में अंतःक्रिया करते हुए साथ कार्य करती हैं; किसी एक में उच्च होना किसी अन्य में उच्च या निम्न होने का संकेत नहीं देता। आठ प्रकार हैं: (1) भाषागत: भाषा का प्रवाह और नम्यता से उपयोग, कवियों और लेखकों में अधिक; (2) तार्किक-गणितीय: तार्किक-आलोचनात्मक चिंतन और अमूर्त तर्कना, वैज्ञानिकों और नोबेल पुरस्कार विजेताओं में अधिक; (3) देशिक: दृश्य बिंबों का निर्माण और परिवर्तन, विमान-चालक, मूर्तिकार, चित्रकार, वास्तुकार और शल्य-चिकित्सकों में अधिक; (4) संगीतात्मक: सांगीतिक लय और रचनाओं का उत्पादन-प्रहस्तन; (5) शारीरिक-गतिसंवेदी: संपूर्ण शरीर या उसके अंगों का लोचपूर्ण, सर्जनात्मक उपयोग, धावकों, नर्तकों और शल्य-चिकित्सकों में अधिक; (6) अंतर्वैयक्तिक: दूसरों की अभिप्रेरणाओं, भावनाओं और व्यवहारों को समझना, परामर्शद, राजनीतिज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ताओं में अधिक; (7) अंतःव्यक्ति: अपनी निजी भावनाओं, अभिप्रेरणाओं और इच्छाओं को जानना, दार्शनिकों और आध्यात्मिक नेताओं में अधिक; (8) प्रकृतिवादी: प्राकृतिक जगत की विशेषताओं को पहचानना, किसानों, वनस्पतिविज्ञानियों और पक्षीविज्ञानियों में अधिक। गार्डनर इस सूची तक अत्यंत प्रतिभाशाली व्यक्तियों का अध्ययन करके पहुँचे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में असाधारण योग्यता दिखाई थी।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. बुद्धि के मनोमितिक उपागम को प्रस्तुत करने वाले विभिन्न सिद्धांतों की चर्चा करें।

उत्तर: मनोमितिक उपागम बुद्धि को योग्यताओं के एक समुच्चय के रूप में देखता है, जो एक ही संज्ञानात्मक क्षमता के सूचकांक में व्यक्त होता है। बिने का एक-कारक (उनि-फैक्टर) सिद्धांत मानता था कि बुद्धि एक ही समुच्चय की योग्यताएँ हैं जो किसी भी समस्या के समाधान में उपयोग हो सकती हैं, परंतु बिने के अपने परीक्षण से मिले आँकड़ों के विश्लेषण के बाद यह विवादग्रस्त हो गया। स्पीयरमैन का द्वि-कारक सिद्धांत (1927) कारक विश्लेषण द्वारा एक सामान्य सा-कारक, जो सभी निष्पादन में उभयनिष्ठ है, तथा कुछ विशिष्ट वि-कारक दिखाता है। थर्स्टन का प्राथमिक मानसिक योग्यताओं का सिद्धांत सात अपेक्षाकृत स्वतंत्र योग्यताएँ बताता है: वाचिक बोध, संख्यात्मक योग्यताएँ, देशिक संबंध, प्रात्यक्षिक गति, शब्द प्रवाह, स्मृति और आगमनात्मक तर्कना। जेन्सेन का पदानुक्रमिक मॉडल प्रथम स्तर (साहचर्यात्मक अधिगम, जैसे रट कर सीखना) को द्वितीय स्तर (संज्ञानात्मक सक्षमता, आगत को प्रभावी निर्गत में बदलने वाले उच्च-स्तरीय कौशल) से अलग करता है। गिलफोर्ड का बुद्धि-संरचना मॉडल बौद्धिक विशेषताओं को तीन विमाओं: संक्रियाएँ, विषय-वस्तु और उत्पाद: में वर्गीकृत करता है, जिससे 180 प्रकोष्ठ (6×5×6) बनते हैं, हर प्रकोष्ठ में कम से कम एक योग्यता-कारक की प्रत्याशा है।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. ‘प्रत्येक बौद्धिक क्रिया तीन तंत्रिकीय तंत्रों के स्वतंत्र प्रकार्यों को सम्मिलित करती है।’ पास मॉडल के संदर्भ में इस कथन की व्याख्या करें।

उत्तर: यह कथन जे.पी. दास, जैक नागलीरी और किर्बी (1994) के पास (योजना, अवधान-भाव प्रबोधन, सहकालिक-आनुक्रमिक) मॉडल को संदर्भित करता है, जो कहता है कि बौद्धिक क्रिया मस्तिष्क की तीन तंत्रिकीय प्रकार्यात्मक इकाइयों के अन्योन्याश्रित, फिर भी व्यक्तिगत रूप से विशिष्ट कार्यों से बनती है। भाव प्रबोधन/अवधान इकाई किसी भी व्यवहार के मूल में है: भाव प्रबोधन का इष्टतम स्तर ध्यान को समस्या के प्रासंगिक पक्षों पर केंद्रित करता है, जबकि बहुत अधिक या बहुत कम भाव प्रबोधन अवधान को बाधित करता है। सहकालिक-आनुक्रमिक प्रक्रमण इकाई सूचनाओं को या तो एक परस्पर संबंधित, सार्थक समग्र रूप में (सहकालिक, जैसे रैवेंस प्रोग्रेसिव मैष्ट्रिसेस में) या क्रम से, एक के बाद एक (आनुक्रमिक, जैसे अंकों या वर्णमाला को याद रखने में) समाकलित करती है। योजना इकाई सूचना के अवधानित और प्रक्रमित हो जाने के बाद सक्रिय होती है: यह व्यक्ति को क्रियाओं के संभावित विकल्पों के बारे में सोचने, चुनी हुई योजना को लक्ष्य प्राप्ति हेतु कार्यान्वित करने, उसकी प्रभाविता का मूल्यांकन करने, और यदि योजना कारगर न हो तो संशोधन करने में सक्षम बनाती है। ये तीनों इकाइयाँ औपचारिक (पढ़ने-लिखने-प्रयोग से) या अनौपचारिक रूप से बने ज्ञान भंडार पर कार्य करती हैं, और यद्यपि वे अंतःक्रियात्मक तथा गतिशील ढंग से साथ कार्य करती हैं, हर एक का अपना स्वतंत्र अस्तित्व और विशिष्ट प्रकार्य भी है: ठीक इसी अर्थ में मॉडल इनके कार्य को ‘स्वतंत्र’ कहता है जबकि साथ ही ‘अन्योन्याश्रित’ भी।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. सुनीता और रीता के उदाहरण तथा टर्मन के शोध के संदर्भ में, सर्जनात्मकता बुद्धि से कैसे संबंधित है?

उत्तर: अध्याय दो विद्यार्थियों के उदाहरण से यह समझाता है: सुनीता समय पर काम पूरा करती है, कक्षा में उच्चतम ग्रेड पाती है, अनुदेशों को ध्यान से सुनती है और शीघ्र समझती है, परंतु शायद ही कभी अपना कोई मौलिक विचार रखती है: उसे अधिक बुद्धिमान कहा जाता है। रीता औसत छात्रा है जो स्वयं सीखना पसंद करती है, घर में सहायता करने और अपने दत्तकार्य करने के नए-नए तरीके खोज लेती है: उसे अधिक सर्जनशील कहा जाता है। जो व्यक्ति तीव्रगति से सीखता है और सटीक रूप से पुनःप्रस्तुत करता है, उसे अधिक बुद्धिमान कहा जाएगा, जब तक कि वह सीखने और कार्य करने के नए तरीकों की खोज भी न करे। टर्मन ने 1920 में पाया कि उच्च बुद्धि लब्धि वाले व्यक्ति आवश्यक रूप से सर्जनशील नहीं होते, सर्जनात्मक विचार बिना बहुत उच्च बुद्धि लब्धि वाले व्यक्तियों में भी आ सकते हैं, और कुछ शोधकर्ताओं ने यह भी प्रदर्शित किया कि जिन बच्चों की पहचान प्रतिभाशाली के रूप में की गई थी, उनमें से शायद ही किसी एक ने भी जीवन में किसी क्षेत्र में अपनी सर्जनात्मकता के कारण प्रसिद्धि प्राप्त की। शोधकर्ताओं ने उच्च तथा औसत, दोनों प्रकार की बुद्धि वाले बच्चों में उच्च और निम्न, दोनों स्तर की सर्जनात्मकता पाई। फिर भी शोधकर्ताओं ने सर्जनात्मकता और बुद्धि के बीच सकारात्मक संबंध पाया: हर सर्जनात्मक कार्य के लिए ज्ञान अर्जित करने और उसे समझने-धारण करने-पुनःप्राप्त करने की एक न्यूनतम योग्यता आवश्यक है: सर्जनशील लेखक को भाषा में दक्षता चाहिए, वैज्ञानिक को तर्कना में कुशल होना चाहिए। पुस्तक का अपना निष्कर्ष है कि सर्जनात्मकता के लिए एक विशेष मात्रा में बुद्धि आवश्यक है, परंतु उस मात्रा से आगे बुद्धि का सर्जनात्मकता से अच्छा सहसंबंध नहीं होता।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
रोहित और मीरा दोनों कक्षा 12 के विद्यार्थी हैं जो स्कूल की प्रतिभा-प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं। रोहित को दिया गया कोई भी तार्किक पहेली शीघ्र समझ में आ जाती है और वह कक्षा में सबसे तेज़ गति से एकमात्र गणितीय ‘सही’ उत्तर खोज लेता है। मीरा को वही पहेलियाँ हल करने में कठिनाई होती है, परंतु जब पूरी कक्षा से केवल एक गेंद और एक रस्सी का उपयोग करके एक बिल्कुल नया खेल बनाने को कहा जाता है, तो वह तीन मौलिक खेल सुझाती है, जिनमें से किसी के बारे में किसी और ने नहीं सोचा था, हर एक में उसी सामग्री का अलग उपयोग करते हुए। उनके अध्यापक, जो स्टर्नबर्ग के त्रिचापीय सिद्धांत और सर्जनात्मकता के मनोविज्ञान के बारे में पढ़ रहे हैं, इस प्रेक्षण का उपयोग दोनों विद्यार्थियों की विशेषताओं को उनके माता-पिता को समझाने में करना चाहते हैं।

(क) 1 अंक रोहित की पहेली-समाधान क्षमता स्टर्नबर्ग की किस बुद्धि के सबसे निकट है?
उत्तर: घटकीय (विश्लेषणात्मक) बुद्धि: सूचनाओं का विश्लेषण करके समस्या का एक ही सही समाधान शीघ्र खोजना।

(ख) 2 अंक अध्याय के अभिसारी और अपसारी चिंतन के भेद का उपयोग करते हुए समझाएँ कि मीरा की खेल-निर्माण योग्यता एक साधारण बुद्धि परीक्षण द्वारा अच्छी तरह क्यों नहीं मापी जा सकती।
उत्तर: मानक बुद्धि परीक्षण मुख्यतः अभिसारी चिंतन का उपयोग करते हैं, जिसमें एक ही सही उत्तर खोजना होता है; मीरा का कार्य इसके विपरीत अपसारी चिंतन माँगता है: एक ही सामग्री से कई अलग, मौलिक विचार उत्पन्न करना, जो ठीक वही है जो सर्जनात्मकता परीक्षण मापते हैं और साधारण बुद्धि परीक्षण नहीं मापते।

(ग) 3 अंक बुद्धि और सर्जनात्मकता के संबंध पर पुस्तक के अपने निष्कर्ष का उपयोग करते हुए बताएँ कि क्या रोहित की श्रेष्ठ पहेली-समाधान बुद्धि यह सिद्ध करती है कि वह मीरा से अधिक सर्जनशील भी है।
उत्तर: नहीं। पुस्तक का अपना निष्कर्ष है कि सर्जनात्मकता के लिए एक न्यूनतम स्तर की बुद्धि आवश्यक है, परंतु उस न्यूनतम से आगे बुद्धि सर्जनात्मकता से अच्छा सहसंबंध नहीं रखती: व्यक्ति (पारंपरिक, विश्लेषणात्मक अर्थ में) अधिक बुद्धिमान हो सकता है बिना अधिक सर्जनशील हुए। टर्मन के अपने शोध में पाया गया कि उच्च बुद्धि लब्धि वाले व्यक्ति आवश्यक रूप से सर्जनशील नहीं होते। इसलिए अभिसारी, पहेली-प्रकार के कार्यों में रोहित का श्रेष्ठ निष्पादन यह सिद्ध नहीं करता कि वह मीरा से अधिक सर्जनशील है: मीरा का अपसारी, मौलिक चिंतन सर्जनात्मकता का संकेत देता है।