NCERT की मनोविज्ञान पाठ्यपुस्तक, अध्याय 1: “मनोवैज्ञानिक गुणों में विभिन्नताएँ” (Reprint 2025-26) के अंत में दिए गए सभी 12 समीक्षात्मक प्रश्नों के पूर्ण उत्तर। इस पुस्तक में औपचारिक “प्रश्नावली” के स्थान पर समीक्षात्मक प्रश्न दिए गए हैं; इन 12 प्रश्नों का विषय और क्रम अंग्रेज़ी संस्करण के समान है। पाठ के बीच के तीनों क्रियाकलाप (1.1, 1.2, 1.3) और दोनों परियोजना विचार अंत में हल किए गए हैं।
प्र. किस प्रकार मनोवैज्ञानिक बुद्धि का लक्षण वर्णन और उसे परिभाषित करते हैं?
उत्तर: मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि को कई प्रकार से परिभाषित किया है। ऑक्सफ़ोर्ड शब्दकोश इसे प्रत्यक्षण, सीखने, समझने और जानने की शक्ति बताता है। बुद्धि पर काम करने वाले आरंभिक मनोवैज्ञानिकों में से एक, अल्फ्रेड बिने ने इसे अच्छा निर्णय लेने, अच्छा बोध करने और अच्छा तर्क प्रस्तुत करने की योग्यता कहा। सर्वाधिक उपयोग किए जाने वाले बुद्धि परीक्षणों के निर्माता वेश्लर ने बुद्धि को क्रियात्मक रूप से परिभाषित किया: व्यक्ति की वह समग्र क्षमता जिसके द्वारा वह सविवेक चिंतन करता है, सोद्देश्य व्यवहार करता है, और अपने पर्यावरण से प्रभावी ढंग से निपटता है। गार्डनर और स्टर्नबर्ग ने इससे आगे बढ़कर सुझाव दिया कि बुद्धिमान व्यक्ति न केवल पर्यावरण से अनुकूलन करता है बल्कि उसमें सक्रियता से परिवर्तन या परिमार्जन भी करता है। संक्षेप में, बुद्धि को जगत को समझने, सविवेक चिंतन करने और चुनौतियों के सामने उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की व्यापक क्षमता के रूप में लक्षणित किया जाता है।
प्र. किस सीमा तक हमारी बुद्धि आनुवंशिकता (प्रकृति) और पर्यावरण (पोषण) का परिणाम है? विवेचना कीजिए।
उत्तर: मनोवैज्ञानिकों में यह आम सहमति है कि बुद्धि आनुवंशिकता और पर्यावरण की जटिल अंतःक्रिया का परिणाम है। आनुवंशिकता के प्रमाण जुड़वाँ और दत्तक बच्चों के अध्ययनों से मिलते हैं: साथ पले समरूप जुड़वाँ बच्चों में बुद्धि का सहसंबंध लगभग 0.90 होता है; अलग-अलग पर्यावरण में पले समरूप जुड़वाँ बच्चों में 0.72; साथ पले भ्रातृ जुड़वाँ बच्चों में लगभग 0.60; साथ पले भाई-बहनों में लगभग 0.50; और अलग पले सहोदरों में लगभग 0.25: आनुवंशिक निकटता बढ़ने के साथ सहसंबंध भी बढ़ता जाता है, चाहे पर्यावरण भिन्न ही क्यों न हो। दत्तक बच्चों की बुद्धि जन्म देने वाले माता-पिता से अधिक और गोद लेने वाले माता-पिता से कम मिलती-जुलती है। पर्यावरण के प्रमाण भी इन्हीं दत्तक-अध्ययनों से मिलते हैं: आयु बढ़ने के साथ बच्चों की बुद्धि लब्धि गोद लेने वाले माता-पिता के स्तर के निकट पहुँचती जाती है, और सुविधावंचित घरों से उच्च सामाजिक-आर्थिक परिवारों में गोद लिए गए बच्चों की बुद्धि लब्धि में बड़ी वृद्धि देखी जाती है; पर्यावरणी वंचन बुद्धि घटाता है जबकि प्रचुर पोषण, अच्छी पारिवारिक पृष्ठभूमि और गुणवत्तायुक्त शिक्षा बुद्धि बढ़ाते हैं। आनुवंशिकता को उस सीमा के रूप में देखा जा सकता है जिसके भीतर पर्यावरण, उपलब्ध सहायता और अवसरों के माध्यम से, वास्तविक विकास को दिशा देता है।
प्र. गार्डनर के द्वारा पहचान की गई बहु-बुद्धि की संक्षेप में व्याख्या कीजिए।
उत्तर: हावर्ड गार्डनर ने प्रस्तावित किया कि बुद्धि एक तत्व नहीं बल्कि आठ भिन्न, स्वतंत्र बुद्धियों का समुच्चय है, जो समस्या-समाधान के लिए आपस में अंतःक्रिया करते हुए साथ कार्य करती हैं: (1) भाषागत: प्रवाह और नम्यता के साथ भाषा का उपयोग, कवियों-लेखकों में; (2) तार्किक-गणितीय: तार्किक-आलोचनात्मक चिंतन, वैज्ञानिकों-नोबेल पुरस्कार विजेताओं में; (3) देशिक: दृश्य बिंबों का निर्माण-उपयोग, विमान-चालकों, मूर्तिकारों और वास्तुकारों में; (4) संगीतात्मक: सांगीतिक रचनाओं का उत्पादन-प्रहस्तन; (5) शारीरिक-गतिसंवेदी: शरीर का लोचपूर्ण उपयोग, धावकों-नर्तकों-शल्य-चिकित्सकों में; (6) अंतर्वैयक्तिक: दूसरों की अभिप्रेरणाओं-भावनाओं को समझना, परामर्शदों-सामाजिक कार्यकर्ताओं में; (7) अंतःव्यक्ति: अपनी निजी भावनाओं-इच्छाओं को समझना, दार्शनिकों-आध्यात्मिक नेताओं में; (8) प्रकृतिवादी: प्राकृतिक जगत की विशेषताओं को पहचानना, किसानों-वनस्पतिविज्ञानियों में। किसी एक बुद्धि में उच्च होने का अर्थ यह नहीं कि किसी दूसरी बुद्धि में भी उच्च या निम्न ही हो।
प्र. किस प्रकार त्रिचापीय सिद्धांत बुद्धि को समझने में हमारी सहायता करता है?
उत्तर: राबर्ट स्टर्नबर्ग (1985) का त्रिचापीय सिद्धांत बुद्धि को उस योग्यता के रूप में परिभाषित करता है जिससे व्यक्ति पर्यावरण के प्रति अनुकूलित होता है, अपने तथा अपने समाज-संस्कृति के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु पर्यावरण के पक्षों का चयन करता है और उन्हें परिवर्तित करता है। यह सिद्धांत बुद्धि को साथ कार्य करने वाले तीन भिन्न प्रकारों में बाँटकर समझने में सहायता करता है: घटकीय (विश्लेषणात्मक) बुद्धि, जो सूचनाओं का विश्लेषण करने और समस्याएँ सुलझाने में उपयोग होती है, इसके तीन उप-घटक हैं: ज्ञानार्जन घटक, मेटा/योजना घटक, और निष्पादन घटक; आनुभविक (सर्जनात्मक) बुद्धि, जो नई समस्याओं के सर्जनात्मक समाधान के लिए पूर्व अनुभवों का उपयोग करती है; और सांदर्भिक (व्यावहारिक) बुद्धि, जिसे व्यावहारिक बुद्धि या व्यावसायिक समझ भी कह सकते हैं, जो व्यक्ति को दैनिक माँगों की पूर्ति हेतु अपने पर्यावरण के प्रति अनुकूलित होने, उसे चुनने या उसमें परिवर्तन करने देती है।
प्र. “प्रत्येक बौद्धिक क्रिया तीन तंत्रिकीय तंत्रों के स्वतंत्र प्रकार्यों को सम्मिलित करती है।” पास मॉडल के संदर्भ में उक्त कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: पास मॉडल (दास, नागलीरी और किर्बी, 1994) के अनुसार बौद्धिक क्रिया मस्तिष्क की तीन तंत्रिकीय “प्रकार्यात्मक इकाइयों” के कार्य से बनती है, जो साथ कार्य करते हुए भी व्यक्तिगत रूप से विशिष्ट रहती हैं। भाव प्रबोधन/अवधान इकाई व्यक्ति को भाव प्रबोधन के इष्टतम स्तर पर लाती है ताकि वह समस्या के प्रासंगिक पक्षों पर ध्यान केंद्रित कर सके: बहुत अधिक या बहुत कम भाव प्रबोधन अवधान को बाधित करता है। सहकालिक-आनुक्रमिक प्रक्रमण इकाई सूचनाओं को या तो एक अंतःसंबंधित समग्र रूप में समाकलित करती है (सहकालिक प्रक्रमण, जैसे रैवेंस प्रोग्रेसिव मैष्ट्रिसेस) या क्रम से, एक इकाई से अगली की ओर (आनुक्रमिक प्रक्रमण, जैसे अंकों, वर्णमाला या गुणन सारणी का पुनःस्मरण)। योजना इकाई सूचना पर ध्यान दिए जाने और उसके प्रक्रमित होने के बाद सक्रिय होती है: यह व्यक्ति को क्रिया के संभावित विकल्पों के बारे में सोचने, योजना को कार्यान्वित करने, उसकी प्रभाविता का मूल्यांकन करने और आवश्यकता होने पर उसमें संशोधन करने देती है। ये तीनों इकाइयाँ औपचारिक या अनौपचारिक रूप से निर्मित ज्ञान-आधार पर कार्य करती हैं, और यद्यपि वे अंतःक्रियात्मक व गतिशील हैं, प्रत्येक अपना विशिष्ट प्रकार्य बनाए रखती है। प्रत्येक इकाई का अपना विशिष्ट प्रकार्य है (इस अर्थ में वह स्वतंत्र है), पर तीनों इकाइयाँ अंतःक्रियात्मक हैं और बुद्धिमत्तापूर्ण व्यवहार के लिए एक-दूसरे पर निर्भर रहती हैं।
प्र. क्या बुद्धि के संप्रत्ययीकरण में कुछ सांस्कृतिक भिन्नताएँ होती हैं?
उत्तर: हाँ। संस्कृति बौद्धिक विकास के लिए संदर्भ प्रदान करती है। वाइगॉट्सकी के अनुसार संस्कृति वह सामाजिक संदर्भ देती है जिसमें व्यक्ति रहता है, विकसित होता है और जगत को समझता है; प्रारंभिक मानसिक प्रक्रियाएँ सर्वव्यापी हैं, परंतु समस्या-समाधान जैसी उच्च मानसिक प्रक्रियाएँ मुख्यतः संस्कृति की उपज हैं। तकनीकी रूप से उन्नत (पश्चिमी) समाज “तकनीकी बुद्धि” को बढ़ावा देते हैं: सामान्यीकरण, अमूर्तकरण, गति, अवधान, प्रेक्षण, विश्लेषण, निष्पादन और उपलब्धि-प्रवणता के कौशल, जो ठीक वही है जिसे पश्चिम में विकसित बुद्धि परीक्षण मापते हैं। कई एशियाई और अफ्रीकी समाज तकनीकी बुद्धि को उतना महत्व नहीं देते; संज्ञानात्मक सक्षमता के साथ-साथ वे दूसरों से जुड़ने के सामाजिक कौशलों को भी महत्व देते हैं, और कुछ गैर-पश्चिमी समाज निजी उपलब्धि की तुलना में आत्म-परावर्तन और सामूहिक उन्मुखता को अधिक महत्व देते हैं। भारतीय परंपरा “समाकलित बुद्धि” नामक एक समग्र दृष्टिकोण रखती है, जो सामाजिक और वैश्विक पर्यावरण से जुड़ाव पर बल देती है तथा संज्ञानात्मक व असंज्ञानात्मक प्रक्रियाओं को समान महत्व देती है; संस्कृत शब्द “बुद्धि” में संज्ञानात्मक क्षमता के साथ-साथ मानसिक प्रयास, भावनाएँ और आत्मज्ञान भी सम्मिलित हैं, एक विस्तार जो पुस्तक के अनुसार पश्चिमी बुद्धि-संप्रत्यय से कहीं अधिक व्यापक है।
प्र. बुद्धि लब्धि क्या है? किस प्रकार मनोवैज्ञानिक बुद्धि लब्धि प्राप्तांकों के आधार पर लोगों को वर्गीकृत करते हैं?
उत्तर: बुद्धि लब्धि (IQ) की अवधारणा जर्मन मनोवैज्ञानिक विलियम स्टर्न ने 1912 में दी थी; यह मानसिक आयु को कालानुक्रमिक आयु से भाग देकर 100 से गुणा करने पर प्राप्त होती है (IQ = MA/CA × 100); ×100 दशमलव बिंदु हटाने के लिए है। जब MA, CA के बराबर हो तो IQ = 100; जब MA, CA से अधिक हो तो IQ, 100 से अधिक; जब MA, CA से कम हो तो IQ, 100 से कम होती है। जनसंख्या में बुद्धि लब्धि प्राप्तांक माध्य 100 के चारों ओर एक सममित, घंटाकार सामान्य वक्र बनाते हैं। तालिका 1-1 लोगों को सात वर्गों में वर्गीकृत करती है: 130 से अधिक → अतिश्रेष्ठ (2.2%); 120-130 → श्रेष्ठ (6.7%); 110-119 → उच्च औसत (16.1%); 90-109 → औसत (50.0%); 80-89 → निम्न औसत (16.1%); 70-79 → सीमावर्ती (6.7%); 70 से कम → बौद्धिक रूप से अशक्त (2.2%)। 90-110 बुद्धि लब्धि वाले व्यक्ति सामान्य बुद्धि के कहलाते हैं; दोनों चरम समूह (लगभग 2% प्रत्येक) क्रमशः बौद्धिक रूप से प्रतिभाशाली और बौद्धिक रूप से अशक्त कहलाते हैं।
प्र. किस प्रकार आप शाब्दिक और निष्पादन बुद्धि परीक्षणों में भेद कर सकते हैं?
उत्तर: शाब्दिक परीक्षणों में परीक्षार्थी को मौखिक या लिखित उत्तर देना होता है, इसलिए ये केवल साक्षर व्यक्तियों को दिए जा सकते हैं: जैसे शब्द या भाषा पर आधारित एकांश। निष्पादन परीक्षणों में परीक्षार्थी को किसी कार्य को पूरा करने के लिए वस्तुओं या सामग्री का प्रहस्तन करना होता है, बिना किसी लिखित भाषा की आवश्यकता के: उदाहरणस्वरूप कोह का ब्लॉक-डिज़ाइन परीक्षण, जिसमें परीक्षार्थी को निर्धारित समय में लकड़ी के गुटकों से एक दिया गया डिज़ाइन बनाना होता है। निष्पादन परीक्षणों का एक बड़ा लाभ यह है कि इन्हें भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के लोगों को आसानी से दिया जा सकता है, क्योंकि ये शाब्दिक परीक्षणों की तरह भाषा-योग्यता पर निर्भर नहीं करते। (चित्रों पर आधारित अशाब्दिक परीक्षण, जैसे रैवेंस प्रोग्रेसिव मैष्ट्रिसेस, जिसमें परीक्षार्थी अपूर्ण दृश्य प्रतिरूप को पूरा करता है, एक तीसरा प्रकार है; कोई परीक्षण इन प्रकारों का मिश्रण भी हो सकता है।)
प्र. सभी व्यक्तियों में समान बौद्धिक क्षमता नहीं होती। कैसे अपनी बौद्धिक योग्यताओं में लोग एक-दूसरे से भिन्न होते हैं? व्याख्या कीजिए।
उत्तर: व्यक्ति बौद्धिक न्यूनता से लेकर बौद्धिक प्रतिभाशालिता तक की पूरी सीमा में भिन्न होते हैं। एक चरम पर, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ मेंटल डिफ़िशेंसी (AAMD) बौद्धिक अशक्तता को अवसामान्य साधारण बौद्धिक प्रकार्यात्मकता के रूप में परिभाषित करती है जो अनुकूलित व्यवहार की न्यूनता के साथ विद्यमान होती है और विकासात्मक अवस्था (0-18 वर्ष) में प्रकट होती है, जिसके चार स्तर हैं: निम्न (IQ 55 से लगभग 70, स्वतंत्र होकर अपने सभी कार्य कर लेते हैं, नौकरी और परिवार की देखभाल कर सकते हैं), सामान्य (IQ 35-40 से लगभग 50-55, आत्म-देखभाल में प्रशिक्षित हो सकते हैं), तीव्र (IQ 20-25 से लगभग 35-40) और अतिगंभीर (IQ 20-25 से कम); तीव्र और अतिगंभीर अशक्तता वाले व्यक्ति जीवनयापन में अक्षम होते हैं और उन्हें जीवन भर लगातार देखभाल की आवश्यकता होती है। दूसरे चरम पर बौद्धिक रूप से प्रतिभाशाली व्यक्ति हैं: प्रतिभाशाली व्यक्तियों का अध्ययन 1925 में शुरू हुआ, जब लेविस टर्मन ने बुद्धि लब्धि 130 और उससे अधिक वाले लगभग 1,500 बच्चों के जीवन का अनुसरण किया, यह जानने के लिए कि बुद्धि व्यावसायिक सफलता और जीवन-समायोजन से कैसे संबंधित है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, अध्यापकों के दृष्टिकोण से प्रतिभाशालिता उच्च योग्यता, उच्च सर्जनात्मकता और उच्च प्रतिबद्धता के संयोजन पर निर्भर करती है; प्रतिभाशाली बच्चों में यह आरंभ में ही अधिक अवधान विस्तृति, अच्छी प्रत्यभिज्ञान स्मृति और शीघ्र भाषा-कौशल के रूप में दिखाई देती है। इन दोनों चरमों के बीच, अधिकांश जनसंख्या (लगभग 82%, बुद्धि लब्धि 80-119) बुद्धि लब्धि के सामान्य वक्र पर निम्न औसत-से-उच्च-औसत सीमा में आती है (तालिका 1-1 के अनुसार)।
प्र. आपके विचार से बुद्धि लब्धि और सांवेगिक लब्धि में से कौन-सी जीवन में सफलता से ज़्यादा संबंधित होगी और क्यों?
उत्तर: पुस्तक सीधे यह तुलना नहीं करती कि IQ या EQ में से कौन जीवन-सफलता से अधिक जुड़ा है, इसलिए अच्छे उत्तर में केवल पक्ष चुनने के बजाय कारण स्पष्ट होना चाहिए। पुस्तक कहती है कि जीवन में सफल होने के लिए उच्च बुद्धि लब्धि तथा विद्यालयीय परीक्षाओं में अच्छा निष्पादन ही पर्याप्त नहीं है: कई उच्च शैक्षिक प्रतिभा वाले व्यक्ति परिवार, कार्यस्थल और अंतर्वैयक्तिक संबंधों में समस्याओं का सामना करते हैं, और कुछ मनोवैज्ञानिकों का विश्वास है कि ये समस्याएँ सांवेगिक बुद्धि की कमी के कारण होती हैं। साथ ही, बुद्धि उपलब्धियों का एक संभाव्य कारक है (बॉक्स 1-1)। सैलोवी और मेयर द्वारा परिभाषित सांवेगिक बुद्धि, अर्थात अपने और दूसरों के संवेगों का परिवीक्षण करने, उनमें विभेदन करने और उस सूचना से चिंतन-व्यवहार को निर्देशित करने की योग्यता, ठीक इन्हीं क्षेत्रों को संबोधित करती है: संबंधों का प्रबंधन, अभिप्रेरणा और अंतर्वैयक्तिक सामंजस्य। विद्यार्थियों की सांवेगिक बुद्धि बढ़ाने वाले कार्यक्रम शैक्षिक उपलब्धि बढ़ाते हैं, सहयोगी व्यवहार को प्रोत्साहित करते हैं और समाज-विरोधी गतिविधियाँ कम करते हैं; इससे पता चलता है कि EQ, IQ का स्थान नहीं लेती बल्कि उसके साथ सफलता में योगदान देती है। (एक विद्यार्थी इसके विपरीत यह तर्क भी दे सकता है कि अनेक व्यवसायों में प्रवेश के लिए IQ अब भी बहुत महत्वपूर्ण है: पुस्तक से उचित रूप से तर्कित होने पर दोनों में से कोई भी पक्ष स्वीकार्य है।)
प्र. ‘अभिक्षमता’ ‘अभिरुचि और बुद्धि’ से कैसे भिन्न है? अभिक्षमता का मापन कैसे किया जाता है?
उत्तर: अभिक्षमता किसी विशेष क्षेत्र में, प्रशिक्षण के बाद, विशेष ज्ञान या कौशल के अर्जन की व्यक्ति की अंतर्निहित संभाव्यता है। यह अभिरुचि से भिन्न है, जो केवल किसी क्रिया में संलग्न रहने की वरीयता है: व्यक्ति में अभिरुचि के बिना अभिक्षमता, या अभिक्षमता के बिना अभिरुचि हो सकती है, और दोनों ही स्थितियों में निष्पादन संतोषजनक नहीं रहता; सफलता के लिए दोनों साथ चाहिए (उदाहरणस्वरूप, उच्च यांत्रिक अभिक्षमता और अभियांत्रिकी में प्रबल अभिरुचि रखने वाला विद्यार्थी सफल यांत्रिक अभियंता बनने की अधिक संभावना रखता है)। अभिक्षमता बुद्धि से इस अर्थ में भिन्न है कि बुद्धि एक व्यापक क्षमता है जो कार्यों की विस्तृत श्रेणी में लागू होती है, जबकि अभिक्षमता किसी विशेष क्षेत्र तक सीमित एक विशेष योग्यता है: समान सामान्य बुद्धि वाले दो व्यक्ति किसी विशिष्ट अभिक्षमता में व्यापक रूप से भिन्न हो सकते हैं। अभिक्षमता का मापन स्वतंत्र (विशेषीकृत) अभिक्षमता परीक्षणों, जैसे लिपिकीय, यांत्रिक, आंकिक या टंकण अभिक्षमता परीक्षण, तथा बहुल (सामान्यीकृत) अभिक्षमता परीक्षणमालाओं, जैसे विभेदक अभिक्षमता परीक्षण (DAT, विद्यालयों में सर्वाधिक प्रयुक्त, जिसमें 8 उप-परीक्षण हैं: शाब्दिक तर्कना, आंकिक तर्कना, अमूर्त तर्कना, लिपिकीय गति-परिशुद्धता, यांत्रिक तर्कना, देशिक संबंध, वर्तनी, और भाषा का उपयोग), सामान्य अभिक्षमता परीक्षणमाला (GATB), और आर्म्ड सर्विसेस व्यावसायिक अभिक्षमता परीक्षणमाला (ASVAB) से किया जाता है।
प्र. किस प्रकार सर्जनात्मकता बुद्धि से संबंधित होती है?
उत्तर: यह संबंध सकारात्मक परंतु सीमित है। प्रत्येक सर्जनात्मक कार्य के लिए ज्ञान अर्जित करने तथा सूचना को समझने, धारण करने और पुनःप्राप्त करने की कुछ न्यूनतम योग्यता आवश्यक होती है: एक सर्जनात्मक लेखक को भाषा में दक्षता चाहिए, एक वैज्ञानिक को तर्कना की योग्यता। परंतु टर्मन ने 1920 में पाया कि उच्च बुद्धि लब्धि वाले व्यक्ति आवश्यक रूप से सर्जनशील नहीं होते और सर्जनात्मक विचार बहुत उच्च बुद्धि लब्धि के बिना भी व्यक्तियों में आ सकते हैं; कुछ शोधकर्ताओं ने यह भी प्रदर्शित किया कि जिन बच्चों की पहचान प्रतिभाशाली के रूप में की गई थी, उनमें से शायद ही किसी एक ने भी जीवन में अपनी सर्जनात्मकता के कारण प्रसिद्धि प्राप्त की; उच्च और निम्न दोनों प्रकार की सर्जनात्मकता उच्च बुद्धि तथा औसत बुद्धि वाले बच्चों, दोनों में पाई जाती है। सर्जनात्मकता परीक्षण अपसारी चिंतन (कई मौलिक विचार, कोई निश्चित उत्तर नहीं) का उपयोग करते हैं, जबकि बुद्धि परीक्षण मुख्यतः अभिसारी चिंतन (एक सही उत्तर, स्मृति-तार्किक तर्कना-परिशुद्धता की जाँच) का उपयोग करते हैं, यही कारण है कि दोनों योग्यताएँ इतने भिन्न ढंग से मापी जाती हैं। पुस्तक का अपना निष्कर्ष है कि सर्जनात्मकता के लिए एक निश्चित मात्रा में बुद्धि आवश्यक है, परंतु उस न्यूनतम मात्रा से आगे, बुद्धि का सर्जनात्मकता से अच्छा सहसंबंध नहीं होता।
प्र. 1. आपकी कक्षा में सबसे बुद्धिमान सहपाठी कौन है? उसके गुणों के बारे में कुछ शब्दों/वाक्यांशों में उसका वर्णन कीजिए। 2. इसके पश्चात् अपने परिचितों में से तीन अन्य बुद्धिमान व्यक्तियों को छाँटकर उनमें से प्रत्येक के गुणों के बारे में कुछ शब्दों/वाक्यांशों में वर्णन कीजिए। 3. प्रथम बिंदु के अंतर्गत लिखे गए गुणों के संदर्भ में बाद के तीन व्यक्तियों के गुणों का तुलनात्मक मूल्यांकन कीजिए। 4. ऐसे सभी गुणों की एक सूची बनाइए जिन्हें आप बुद्धिमत्तापूर्ण व्यवहारों की अभिव्यक्ति समझते हैं। इस सूची के आधार पर बुद्धि को परिभाषित करने का प्रयास कीजिए। 5. अपने विवरण के बारे में अपने सहपाठियों तथा अध्यापक से विचार-विमर्श कीजिए। 6. अपने विवरण की तुलना ‘बुद्धि’ के बारे में शोधकर्ताओं के विवरण से कीजिए।
उत्तर: आपकी सूचियाँ अलग होंगी, पर एक अच्छी रिपोर्ट प्रायः उन्हीं गुणों तक पहुँचती है जो अध्याय बुद्धि की सामान्य समझ के रूप में बताता है: मानसिक सतर्कता, हाज़िरजवाबी, शीघ्र सीखना और संबंधों को समझने की योग्यता। ऐसी सूची से बनी परिभाषा कुछ इस तरह हो सकती है: “बुद्धि शीघ्र सीखने, संबंधों को समझने और जो ज्ञात है उसका उपयोग करके समस्याएँ सुलझाने की योग्यता है।” चरण 6 के लिए इसकी तुलना शोधकर्ताओं से करें: बिने (अच्छा निर्णय लेने, अच्छा बोध करने और अच्छा तर्क करने की योग्यता), वेश्लर (सविवेक चिंतन करने, सोद्देश्य व्यवहार करने और पर्यावरण से प्रभावी रूप से निपटने की समग्र क्षमता) और गार्डनर व स्टर्नबर्ग (बुद्धिमान व्यक्ति पर्यावरण से अनुकूलन ही नहीं करता, उसमें सक्रियता से परिवर्तन भी करता है)। प्रायः आपकी सूची आरंभिक परिभाषाओं के निकट होगी, जबकि बाद के सिद्धांतकार पर्यावरण से अनुकूलन और उसे बदलने की बात जोड़ते हैं।
प्र. आपका किसी विद्यालय/कॉलेज में कुछ ही दिनों पूर्व प्रवेश हुआ है। पूरे वर्ष में आपकी तीन परीक्षाएँ होंगी। आप अवश्य ही परीक्षा में अच्छे अंक पाना चाहते होंगे। इसकी कितनी संभावना है कि आप निम्नलिखित में से प्रत्येक कार्य में सन्नद्ध होंगे? निम्नलिखित कार्यों का कोटि क्रम निर्धारण करें और अपने सहपाठियों से उनको मिलाएँ: कक्षा में नियमित रूप से आना; साप्ताहिक विवेचना के लिए अपने मित्रों के साथ अध्ययन समूह का निर्माण करना; कक्षा में विस्तृत नोट्स बनाना; किसी कोचिंग संस्था में नामांकन करा लेना; प्रत्येक अध्याय के लिए लिखित नोट्स बनाना; पाठ्यपुस्तक के अध्यायों को अच्छी तरह से पढ़ना; पिछले तीन वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर तैयार करना। कक्षा के उपरांत अपने अध्यापक से विचार-विमर्श कीजिए।
उत्तर: इसका कोई एक सही क्रम नहीं है; यह क्रियाकलाप आपकी अपनी व्यावहारिक समझ के बारे में है। सबसे ऊपर वे कार्य रखें जो पूरी तरह आपके नियंत्रण में हों और लक्ष्य के लिए सबसे उपयोगी हों, जैसे कक्षा में नियमित रूप से आना, पाठ्यपुस्तक के अध्याय अच्छी तरह पढ़ना और कक्षा में विस्तृत नोट्स बनाना; फिर अध्यायवार लिखित नोट्स और पिछले तीन वर्षों के प्रश्न; अध्ययन समूह और कोचिंग सहायक साधन हैं। सहपाठियों से मिलाने पर आप देखेंगे कि एक ही लक्ष्य के लिए अलग-अलग क्रम बनते हैं। यही इस क्रियाकलाप का बिंदु है: स्टर्नबर्ग के त्रिचापीय सिद्धांत में यह सांदर्भिक या व्यावहारिक बुद्धि है, यानी दैनिक माँगों से निपटने की योग्यता, जिसमें व्यक्ति परिस्थिति से अनुकूलन करता है, बेहतर परिस्थिति चुनता है या उसे अपनी आवश्यकता के अनुसार बदलता है। क्रियाकलाप के अनुसार अपना क्रम सहपाठियों से मिलाएँ। (‘कक्षा के उपरांत अपने अध्यापक से विचार-विमर्श कीजिए’ स्वयं क्रम में रखे जाने वाले कार्यों में से एक है।)
प्र. 1. एक 14 साल के बच्चे की मानसिक आयु 16 वर्ष है। उसकी बुद्धि लब्धि ज्ञात कीजिए। 2. यदि 12 साल के एक बच्चे की बुद्धि लब्धि 90 हो तो उसकी मानसिक आयु ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 1. बुद्धि लब्धि = मानसिक आयु / कालानुक्रमिक आयु × 100 = 16/14 × 100 = 114.29, यानी लगभग 114। तालिका 1-1 के अनुसार यह 110-119 वर्ग, ‘उच्च औसत’, में आती है। 2. मानसिक आयु = बुद्धि लब्धि × कालानुक्रमिक आयु / 100 = 90 × 12 / 100 = 10.8 वर्ष, यानी लगभग 10 वर्ष 10 महीने। बुद्धि लब्धि 90, 90-109 वर्ग, ‘औसत’, में आती है।
प्र. आप अपने पड़ोस के पाँच व्यक्तियों का प्रेक्षण और साक्षात्कार यह देखने के लिए करें कि किस प्रकार वे कुछ मनोवैज्ञानिक गुणों में एक-दूसरे से भिन्न हैं। अध्याय में वर्णित सभी पाँच क्षेत्रों को सम्मिलित करें। प्रत्येक व्यक्ति की एक मनोवैज्ञानिक परिच्छेदिका तैयार कर उनकी तुलना करें।
उत्तर: पाँच क्षेत्र वही हैं जो अध्याय बताता है: बुद्धि, अभिक्षमता, अभिरुचि, व्यक्तित्व और मूल्य। हर व्यक्ति के लिए अध्याय की अपनी विधियाँ अपनाएँ: साक्षात्कार (आमने-सामने प्रश्न), व्यवहार का प्रेक्षण, और एक छोटा आत्म-प्रतिवेदन (व्यक्ति अपने बारे में क्या बताता है)। हर क्षेत्र के अंतर्गत कुछ पंक्तियाँ लिखें: व्यक्ति समस्याओं से कैसे निपटता है (बुद्धि), किस काम की उसमें विशेष योग्यता है (अभिक्षमता), उसे क्या करना पसंद है (अभिरुचि), वह जावक है या विनिवर्तित, प्रभावी है या विनम्र आदि (व्यक्तित्व), और वह व्यवहार का कौन-सा तरीका सही मानता है (मूल्य)। पाँचों परिच्छेदिकाएँ एक तालिका में साथ-साथ रखें और जो भिन्नताएँ मिलीं उन्हें लिखें। याद रखें कि यह अनौपचारिक मूल्यांकन है, जिसकी व्याख्या आपकी अपनी व्यक्तिनिष्ठ समझ पर निर्भर रहती है, जबकि प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक का औपचारिक मूल्यांकन मानकीकृत परीक्षणों से होता है।
प्र. पाँच व्यवसायों का चयन करें तथा लोगों द्वारा इन व्यवसायों में किए जा रहे कार्यों की प्रकृति के बारे में सूचनाएँ एकत्र करें। साथ ही इन व्यवसायों में सफल निष्पादन के लिए अपेक्षित मनोवैज्ञानिक गुणों का विश्लेषण करें और एक रिपोर्ट लिखें।
उत्तर: पाँच व्यवसाय चुनें, हर एक के दैनिक कार्य का वर्णन करें, फिर उसे अध्याय के गुणों से जोड़ें। उदाहरण: शल्य-चिकित्सक (देशिक और शारीरिक-गतिसंवेदी बुद्धि, उच्च अभिक्षमता, संवेगों पर नियंत्रण); अध्यापक या परामर्शदाता (अंतर्वैयक्तिक बुद्धि और सांवेगिक बुद्धि); इंजीनियर (यांत्रिक अभिक्षमता के साथ इंजीनियरी में अभिरुचि, क्योंकि अध्याय के अनुसार सफलता के लिए अभिक्षमता और अभिरुचि दोनों आवश्यक हैं); लेखक या पत्रकार (भाषागत बुद्धि और भाषा-अभिक्षमता); किसान (प्रकृतिवादी बुद्धि और व्यावहारिक बुद्धि)। रिपोर्ट के अंत में लिखें कि कौन-से गुण अधिकांश व्यवसायों में आते हैं, और यह भी कि शैक्षिक पर्यावरण में DAT जैसे अभिक्षमता परीक्षण यह पूर्वकथन करने के लिए उपयोग होते हैं कि उचित प्रशिक्षण मिलने पर व्यक्ति क्या कर पाएगा।