कक्षा 12 समाजशास्त्र पुस्तक 2 अध्याय 4 ग्रामीण समाज में विकास एवं परिवर्तन MCQ / वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) उत्तर सहित हिंदी में

इस अध्याय के 25 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, परीक्षा की सामान्य शैलियों में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।

1 सीधे प्रश्न

सीधे प्रश्न
  1. 1 अंकपुस्तक के अनुसार, 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती थी?
    (क) 65 प्रतिशत(ख) 69 प्रतिशत(ग) 72 प्रतिशत(घ) 58 प्रतिशत
  2. 1 अंकइस अध्याय में ‘कृषिक संरचना’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
    (क) किसी राज्य का कुल कृषि क्षेत्रफल(ख) किसी क्षेत्र में उगाई जाने वाली फसलों की संख्या(ग) किसानों के लिए केंद्रीय योजनाओं की सूची(घ) भूस्वामित्व की संरचना या विभाजन
  3. 1 अंककिस समाजशास्त्री ने संचार (सरकुलेशन) करने वाले प्रवासी कृषि मज़दूरों को ‘घुमक्कड़ मज़दूर’ (फूटलूज लेबर) कहा?
    (क) एम.एन. श्रीनिवास(ख) मारियो रट्टन(ग) जान ब्रेमन(घ) राजू जे. दास
  4. 1 अंक1950 से 1970 के बीच पारित भूमि सुधार कानूनों में से, पुस्तक किसे संभवतः सबसे प्रभावी बताती है?
    (क) भूमि हदबंदी अधिनियम(ख) पट्टेदारी उन्मूलन एवं नियमन अधिनियम(ग) ज़मींदारी व्यवस्था का उन्मूलन(घ) संविदा खेती का नियमन
  5. 1 अंकभूमि हदबंदी अधिनियम से बचने के लिए कुछ भूस्वामियों द्वारा अपनाई गई युक्तियों (जैसे ज़मीन नौकरों के नाम करना, या पत्नी को तलाक देकर उसी के साथ रहते रहना) को पुस्तक क्या कहती है?
    (क) ज़मींदारी हस्तांतरण(ख) रैयतवाड़ी बंदोबस्त(ग) पट्टेदारी हस्तांतरण(घ) बेनामी हस्तांतरण
  6. 1 अंकइनमें से कौन-सा क्षेत्र पुस्तक की हरित क्रांति की पहली लहर के क्षेत्रों में शामिल नहीं है?
    (क) पंजाब(ख) पश्चिमी उत्तर प्रदेश(ग) बिहार(घ) तटीय आंध्र प्रदेश
  7. 1 अंककिस समाजशास्त्री ने भूस्वामी-मज़दूर संबंधों में बदलाव को ‘संरक्षण से शोषण’ की ओर बदलाव बताया?
    (क) एम.एन. श्रीनिवास(ख) जान ब्रेमन(ग) मारियो रट्टन(घ) राजू जे. दास
  8. 1 अंकपुस्तक में पंजाब और कर्नाटक जैसे क्षेत्रों में किसानों से संविदा करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उदाहरण के रूप में किनके नाम लिए गए हैं?
    (क) कारगिल(ख) मॉन्सैंटो(ग) पेप्सी और कोक(घ) आईटीसी
  9. 1 अंकपुस्तक के अनुसार, जो कृषक मुख्यतः अपने परिवार के उपयोग के लिए उत्पादन करता है और बाज़ार के लिए उत्पादन नहीं कर पाता, उसे क्या कहा जाता है?
    (क) किसान(ख) जीवननिर्वाही कृषक(ग) काश्तकार(घ) पट्टेदार

2 अभिकथन-कारण

अभिकथन-कारण
  1. 1 अंकअभिकथन (A): ब्राह्मण, सबसे ऊँची जाति होने के कारण, हर जगह बड़े भूस्वामी होते हैं।
    कारण (R): पुस्तक कहती है कि कुछ क्षेत्रों में जाति और वर्ग की पारस्परिकता की धारणा मोटे तौर पर सही है, पर पूर्ण सत्य नहीं है।

    (क) (A) असत्य है, परंतु (R) सत्य है(ख) दोनों (A) और (R) सत्य हैं, तथा (R), (A) की सही व्याख्या करता है(ग) दोनों (A) और (R) सत्य हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता(घ) (A) सत्य है, परंतु (R) असत्य है
  2. 1 अंकअभिकथन (A): अधिकांश क्षेत्रों में भूमि सुधार का ग्रामीण समाज तथा कृषिक संरचना पर एक सीमित प्रभाव ही रहा।
    कारण (R): इसके विपरीत, 1960-70 के दशक की हरित क्रांति ने उन क्षेत्रों में जहाँ यह प्रभावशाली रही, महत्वपूर्ण परिवर्तन किए।

    (क) (A) असत्य है, परंतु (R) सत्य है(ख) दोनों (A) और (R) सत्य हैं, तथा (R), (A) की सही व्याख्या करता है(ग) दोनों (A) और (R) सत्य हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता(घ) (A) सत्य है, परंतु (R) असत्य है
  3. 1 अंकअभिकथन (A): संविदा खेती किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती प्रतीत होती है।
    कारण (R): संविदा खेती किसानों के लिए अधिक असुरक्षा भी बन सकती है, क्योंकि वे कंपनियों पर अपने जीवन व्यापार के लिए निर्भर हो जाते हैं।

    (क) दोनों (A) और (R) सत्य हैं, तथा (R), (A) की सही व्याख्या करता है(ख) दोनों (A) और (R) सत्य हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता(ग) (A) सत्य है, परंतु (R) असत्य है(घ) (A) असत्य है, परंतु (R) सत्य है

3 सुमेलन कीजिए

सुमेलन कीजिए
  1. 1 अंकसूची I (क्षेत्र) को सूची II (पुस्तक में नामित प्रबल भूस्वामी जाति) से मिलाइए।
    सूची I: (i) उत्तर प्रदेश (ii) कर्नाटक (iii) आंध्र प्रदेश (iv) पंजाब
    सूची II: (1) कम्मास और रेड्डी (2) जाट सिख (3) जाट और राजपूत (4) वोक्कालिगास और लिंगायत

    (क) i-3, ii-4, iii-1, iv-2(ख) i-1, ii-2, iii-3, iv-4(ग) i-4, ii-3, iii-2, iv-1(घ) i-3, ii-1, iii-4, iv-2
  2. 1 अंकसूची I (पुस्तक में नामित योजना) को सूची II (उसका सामान्य उद्देश्य; पुस्तक इन योजनाओं के नाम देती है, उद्देश्य नहीं बताती) से मिलाइए।
    सूची I: (i) दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (ii) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (iii) किसान क्रेडिट कार्ड (iv) सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन
    सूची II: (1) किसानों के लिए फसल बीमा (2) किसानों के लिए ऋण सुविधा (3) निर्बाध ग्रामीण बिजली आपूर्ति (4) सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा

    (क) i-1, ii-3, iii-4, iv-2(ख) i-3, ii-2, iii-1, iv-4(ग) i-3, ii-1, iii-2, iv-4(घ) i-2, ii-1, iii-3, iv-4

4 कथन आधारित प्रश्न

कथन आधारित प्रश्न
  1. 1 अंककथन I: कानून महिलाओं को पारिवारिक संपत्ति में हिस्सा देने से इनकार करता है।
    कथन II: भारत के अधिकांश हिस्सों में महिलाएँ आमतौर पर अपने नाम पर कृषि भूमि की मालिक होती हैं।

    (क) कथन I सत्य है, कथन II असत्य है(ख) कथन I असत्य है, कथन II सत्य है(ग) दोनों कथन सत्य हैं(घ) दोनों कथन असत्य हैं
  2. 1 अंककथन I: मज़दूरों की माँग बढ़ने से कई हरित क्रांति क्षेत्रों में कृषि मज़दूरों का रोज़गार तथा मज़दूरी बढ़ी।
    कथन II: भुगतान के अनाज से नगद होने तथा बढ़ती कीमतों ने वास्तव में अधिकतर ग्रामीण मज़दूरों की आर्थिक दशा को बिगाड़ दिया।

    (क) कथन I सत्य है, कथन II असत्य है(ख) कथन I असत्य है, कथन II सत्य है(ग) दोनों कथन सत्य हैं(घ) दोनों कथन असत्य हैं
  3. 1 अंककथन I: पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में स्वतंत्रता के बाद कृषिक संरचना में अपेक्षाकृत कम बदलाव आया।
    कथन II: इसका कारण इन राज्यों में प्रभावी भूमि सुधार तथा राजनीतिक गतिशीलता का होना है।

    (क) कथन I सत्य है, कथन II असत्य है(ख) कथन I असत्य है, कथन II सत्य है(ग) दोनों कथन सत्य हैं(घ) दोनों कथन असत्य हैं

5 काल-क्रम प्रश्न

काल-क्रम प्रश्न
  1. 1 अंकइन्हें पुस्तक द्वारा प्रस्तुत कालानुक्रम में सजाइए।
    1. ब्रिटिश शासन में ज़मींदारों को संपत्ति के अधिकार मिलते हैं और रैयतवाड़ी बंदोबस्त लागू होता है
    2. पूर्व-औपनिवेशिक काल में स्थानीय राजा/ज़मींदार भूमि को नियंत्रित करते हैं
    3. 1950 के दशक से राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर भूमि सुधार कानून पारित होने शुरू होते हैं
    4. 1960 के दशक में हरित क्रांति का पहला चरण शुरू होता है

    (क) 2-1-3-4(ख) 1-2-3-4(ग) 2-3-1-4(घ) 1-3-2-4
  2. 1 अंकसंविदा खेती व्यवस्था के इन चरणों को उस क्रम में सजाइए जो पुस्तक के विवरण से तर्कसंगत रूप से निकलता है।
    1. कंपनी पहले से तय कीमत पर उपज खरीद लेती है
    2. कंपनी उगाई जाने वाली फसल की पहचान करती है
    3. किसान फसल उगाता है
    4. कंपनी बीज, अन्य निवेश तथा अक्सर कार्यशील पूँजी उपलब्ध कराती है

    (क) 2-3-4-1(ख) 2-4-3-1(ग) 4-2-3-1(घ) 2-4-1-3

6 रिक्त स्थान

रिक्त स्थान
  1. 1 अंकपुस्तक ______ शब्द का प्रयोग किसी क्षेत्र की उस एक-दो जातियों के लिए करती है, जो संख्या में मज़बूत होने के साथ-साथ आर्थिक-राजनीतिक रूप से भी शक्तिशाली हों।
    (क) पिछड़ी जाति(ख) प्रबल जाति(ग) अनुसूचित जाति(घ) द्विज जाति

7 असंगत चुनिए

असंगत चुनिए
  1. 1 अंकइनमें से तीन फसलें/उत्पाद पुस्तक में संविदा खेती के तहत आम तौर पर उगाई जाने वाली बताई गई हैं। असंगत कौन-सी है?
    (क) गेहूँ(ख) फूल (कट फ्लावर)(ग) अंगूर(घ) कपास

8 गद्यांश आधारित प्रश्न

गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश
अघनबीघा में मज़दूरों की कठिन कार्य-दशा, मालिकों की एक वर्ग के रूप में आर्थिक शक्‍ति तथा प्रबल जाति के सदस्य के रूप में अपरिमित शक्‍ति के संयुक्‍त प्रभाव का परिणाम थी। मालिकों की सामाजिक शक्‍ति का एक महत्वपूर्ण पक्ष, राज्य के विभिन्न अंगों का अपने हितों के पक्ष में हस्तक्षेप करवा सकने की क्षमता थी। इस प्रकार प्रबल तथा निम्न वर्ग के मध्य खाई को चौड़ा करने में राजनीतिक कारकों का निर्णयात्मक योगदान रहा है।
  1. 1 अंकगद्यांश के अनुसार, अघनबीघा में मालिकों की शक्ति किन दो चीज़ों के संयुक्‍त प्रभाव से बनी?
    (क) शिक्षा और शहरी संपर्क(ख) एक वर्ग के रूप में आर्थिक शक्‍ति तथा प्रबल जाति के सदस्य के रूप में शक्‍ति(ग) धार्मिक अधिकार और आयु(घ) स्थानीय स्कूल-अस्पताल पर नियंत्रण
गद्यांश
मदभावी गाँव की एक बुज़ुर्ग महिला, भार्गव हुगर, ने सावयवी उपज की संपूर्णता की संकर उपज से तुलना करते हुए कहा: “क्या… वे गेहूँ, लाल सोरघम उगाते हैं… कुछ कंद और मिर्च के पौधे उगाते हैं… कपास। अब सब केवल संकर है… ज्वारी (सावयव/स्थानीय?) कहाँ है? संकर पौधे… और पैदा होने वाले बच्चे भी संकर होते हैं।” (वासवी, 1994ः295-96)
  1. 1 अंकभार्गव हुगर के अनुसार, संकर बीजों के आने से पहले उनके गाँव में किसान क्या उगाते थे?
    (क) गेहूँ, लाल सोरघम, कुछ कंद, मिर्च के पौधे और कपास(ख) सिर्फ कपास, और कुछ नहीं(ग) सिर्फ चावल और गन्ना(घ) चाय और कॉफ़ी

9 सत्य-असत्य

सत्य-असत्य
  1. 1 अंकइन कथनों पर विचार कीजिए।
    (i) जान ब्रेमन के ‘घुमक्कड़ मज़दूर’ शब्द का अर्थ है कि प्रवासी कृषि मज़दूर स्वतंत्र होते हैं और उन्हें पूरे अधिकार मिलते हैं।
    (ii) कावेरी वेसिन जैसे सुनिश्चित सिंचाई वाले क्षेत्रों में बहुत असमान कृषिक संरचना विकसित हुई।

    (क) केवल (i) सत्य है(ख) केवल (ii) सत्य है(ग) दोनों सत्य हैं(घ) दोनों असत्य हैं
  2. 1 अंकइन कथनों पर विचार कीजिए।
    (i) संविदा खेती कृषि भूमि को खाद्यान्न उत्पादन से हटाकर निर्यातोन्मुखी फसलों की ओर मोड़ सकती है।
    (ii) संविदा खेती में हमेशा कम मात्रा में खाद-कीटनाशक की ज़रूरत होती है, इसलिए यह पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

    (क) केवल (ii) सत्य है(ख) केवल (i) सत्य है(ग) दोनों सत्य हैं(घ) दोनों असत्य हैं
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
  1. (ख) अध्याय की शुरुआत में ही बताया गया है कि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की 69 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती थी।
  2. (घ) पुस्तक कृषिक संरचना को भूस्वामित्व की संरचना या विभाजन के रूप में परिभाषित करती है, जो ग्रामीण वर्ग संरचना को आकार देती है।
  3. (ग) पुस्तक बताती है कि जान ब्रेमन ने इन प्रवासी मज़दूरों को ‘घुमक्कड़ मज़दूर’ कहा, हालाँकि इसका अर्थ स्वतंत्रता नहीं है।
  4. (ग) पुस्तक कहती है कि ज़मींदारी व्यवस्था का उन्मूलन संभवतः सबसे प्रभावी भूमि सुधार था, क्योंकि इसने किसान और राज्य के बीच के बिचौलियों की परत हटाई।
  5. (घ) पुस्तक कहती है कि इन्हें ‘बेनामी हस्तांतरण’ भी कहा जाता था।
  6. (ग) पुस्तक के अनुसार पहली लहर के क्षेत्र पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, तटीय आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु के कुछ हिस्से थे। बिहार को अलग से उस क्षेत्र के रूप में बताया गया है जहाँ भूमि सुधार का असर बहुत कम रहा, हरित क्रांति की पहली लहर के क्षेत्र के रूप में नहीं।
  7. (ख) पुस्तक इस बदलाव का श्रेय जान ब्रेमन (1974) को देती है, जिन्होंने इसे ‘संरक्षण से शोषण’ की ओर बदलाव बताया।
  8. (ग) पुस्तक कहती है कि पंजाब और कर्नाटक जैसे कुछ क्षेत्रों में किसानों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों (जैसे पेप्सी, कोक) से टमाटर और आलू जैसी फसलें उगाने की संविदा दी गई है।
  9. (ख) पुस्तक ऐसे कृषक को ‘जीवननिर्वाही कृषक’ कहती है, जबकि जो बाज़ार के लिए अतिरिक्‍त उत्पादन करता है उसे किसान/काश्तकार कहा जाता है।
अभिकथन-कारण
  1. (क) (A) असत्य है: पुस्तक कहती है कि कई जगहों पर सबसे ऊँची जाति ब्राह्मण बड़े भूस्वामी नहीं हैं, इसलिए वे कृषिक संरचना से बाहर हो जाते हैं। (R) सत्य है: पुस्तक कहती है कि ऊँची जातियों के पास अधिक भूमि और आमदनी होने की धारणा कुछ क्षेत्रों में मोटे तौर पर सही है, पर पूर्ण सत्य नहीं, और ब्राह्मणों का उदाहरण पुस्तक इसी बात के लिए देती है।
  2. (ग) दोनों कथन सत्य हैं, ठीक जैसा पुस्तक कहती है। परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता: हरित क्रांति का अपना प्रभाव एक अलग, तुलनात्मक तथ्य है; भूमि सुधार के सीमित प्रभाव के पीछे पुस्तक का अपना विवरण है: पट्टेदारी कानून अधिकतर राज्यों में प्रभावशाली ढंग से लागू नहीं हुए और हदबंदी अधिनियम ‘दंतविहीन’ साबित हुए।
  3. (ख) दोनों कथन सत्य हैं, ठीक जैसा पुस्तक कहती है। (R) एक अलग, विपरीत दिशा का जोखिम बताता है और (A) की सही व्याख्या नहीं करता।
सुमेलन कीजिए
  1. (क) उत्तर प्रदेश = जाट और राजपूत (3); कर्नाटक = वोक्कालिगास और लिंगायत (4); आंध्र प्रदेश = कम्मास और रेड्डी (1); पंजाब = जाट सिख (2): i-3, ii-4, iii-1, iv-2.
  2. (ग) दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना = बिजली आपूर्ति (3); प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना = फसल बीमा (1); किसान क्रेडिट कार्ड = ऋण सुविधा (2); सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन = सतत कृषि (4): i-3, ii-1, iii-2, iv-4.
कथन आधारित प्रश्न
  1. (घ) दोनों कथन असत्य हैं: पुस्तक कहती है कि कानून महिलाओं को पारिवारिक संपत्ति में बराबर की हिस्सेदारी दिलाने में सहायक होता है, पर वास्तव में उनके पास बहुत सीमित अधिकार होते हैं: परिवार का हिस्सा होने के नाते उनका भूमि पर अधिकार होता है, जिसका मुखिया एक पुरुष होता है; अपने नाम पर स्वामित्व नहीं।
  2. (ग) दोनों कथन सत्य हैं, पुस्तक इन्हें साथ ही प्रस्तुत करती है: कई क्षेत्रों में मज़दूरों की माँग बढ़ने से रोज़गार और दिहाड़ी बढ़ी, पर कीमतों की बढ़ोतरी तथा खाद्यान्न के स्थान पर नगद भुगतान से अधिकतर ग्रामीण मज़दूरों की आर्थिक दशा खराब हो गई।
  3. (क) कथन I सत्य है, पर कथन II पुस्तक के असली कारण को उलट देता है: पुस्तक कहती है कि प्रभावी भूमि सुधार, राजनीतिक गतिशीलता और पुनर्वितरण के साधनों के अभाव के कारण ही यहाँ कम बदलाव आया।
काल-क्रम प्रश्न
  1. (क) क्रम: पूर्व-औपनिवेशिक राजा/ज़मींदार (2), औपनिवेशिक ज़मींदारी/रैयतवाड़ी व्यवस्था (1), स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधार कानून (3), हरित क्रांति का पहला चरण (4): 2-1-3-4.
  2. (ख) पहले कंपनी फसल की पहचान करती है (2), फिर बीज/निवेश/पूँजी देती है (4), किसान फसल उगाता है (3), और अंत में कंपनी तय कीमत पर उपज खरीदती है (1): 2-4-3-1.
रिक्त स्थान
  1. (ख) एम.एन. श्रीनिवास का ‘प्रबल जाति’ शब्द ठीक इसी समूह के लिए है।
असंगत चुनिए
  1. (क) पुस्तक फूल (कट फ्लावर), अंगूर, अंजीर, अनार, कपास और तिलहन को संविदा खेती की सामान्य उपज बताती है। गेहूँ की चर्चा हरित क्रांति और भारत के गेहूँ आयात के फ़ैसले के संदर्भ में है, संविदा खेती की फसल के रूप में नहीं।
गद्यांश आधारित प्रश्न
  1. (ख) गद्यांश ठीक इन्हीं दो स्रोतों को बताता है: मालिकों की एक वर्ग के रूप में आर्थिक शक्‍ति, और प्रबल जाति के सदस्य के रूप में उनकी शक्‍ति।
  2. (क) भार्गव हुगर याद करती हैं कि संकर किस्मों के आने से पहले किसान गेहूँ, लाल सोरघम, कुछ कंद, मिर्च के पौधे और कपास उगाते थे।
सत्य-असत्य
  1. (ख) (i) असत्य है: पुस्तक स्पष्ट कहती है कि इस शब्द का अर्थ स्वतंत्रता नहीं है। (ii) सत्य है: बॉक्स 4.1 कहता है कि कावेरी वेसिन जैसे सुनिश्चित सिंचाई, गहन खेती वाले क्षेत्रों में बहुत असमान कृषिक संरचना विकसित हुई।
  2. (ख) (i) सत्य है, ठीक वैसे ही जैसे पुस्तक फूल और खीरे जैसी निर्यातोन्मुखी फसलों के बारे में कहती है। (ii) असत्य है: पुस्तक कहती है कि संविदा खेती में आमतौर पर उच्च मात्रा में खाद-कीटनाशक चाहिए, इसलिए यह बहुधा पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित नहीं होती।