कक्षा 12 समाजशास्त्र अध्याय 1 भारतीय समाज: एक परिचय MCQ / वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) उत्तर सहित हिंदी में

इस अध्याय के 22 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, आम परीक्षा-शैलियों में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।

1 सीधे प्रश्न

सीधे प्रश्न
  1. 1 अंकअठारह वर्षीय छात्र अपने समाज के बारे में पहले से बहुत कुछ क्यों जानता है?
    (क) क्योंकि समाज ज़्यादा नहीं बदलता(ख) क्योंकि उसने स्कूल में समाजशास्त्र पढ़ा है(ग) क्योंकि वह उसी समाज में रहता और पला-बढ़ा है(घ) क्योंकि पाठ्यपुस्तकें बचपन से पढ़ाई जाती हैं
  2. 1 अंकपूर्व-ज्ञान का बाधक पहलू अध्याय के अनुसार क्या है?
    (क) यह केवल ग्रामीण छात्रों पर लागू होता है(ख) यह हमेशा तथ्यात्मक रूप से ग़लत होता है(ग) समाजशास्त्र सीखने से पहले इसे भूलना ज़रूरी है(घ) इससे परीक्षा कठिन हो जाती है
  3. 1 अंकसमाजशास्त्र के संदर्भ में ‘भूलना’ का क्या मतलब है?
    (क) पाठ्यपुस्तक दोबारा पढ़ना(ख) समाज को वैज्ञानिक ढंग से पढ़ने से पहले बने-बनाए सहज-बोध को छोड़ना(ग) परीक्षा में फ़ेल होकर कक्षा दोहराना(घ) पूरा इतिहास और भूगोल भूल जाना
  4. 1 अंकअध्याय के अनुसार हमारा सहज बोध कहाँ से आता है?
    (क) उस सामाजिक समूह और वातावरण के दृष्टिकोण से जिसमें हम समाजीकृत होते हैं(ख) किसी विश्वविद्यालय के कोर्स से(ग) इसका कोई विशेष स्रोत नहीं(घ) केवल सरकारी पाठ्यपुस्तकों से
  5. 1 अंकअध्याय में ‘अपूर्ण’ शब्द के साथ कोष्ठक में उसका कौन-सा अर्थ दिया गया है?
    (क) संपूर्ण का विलोम(ख) आधुनिक का विलोम(ग) निष्पक्ष का विलोम(घ) वैज्ञानिक का विलोम
  6. 1 अंकअपनी ही दृष्टि को वापस अपनी तरफ़ मोड़ने की क्षमता को अध्याय क्या कहता है?
    (क) व्यक्तिगत परेशानी(ख) स्ववाचक (या आत्मवाचक)(ग) सहज बोध(घ) जनसांख्यिकीय जागरूकता
  7. 1 अंककिताब के अपने उदाहरण में, सत्रह-अठारह साल का व्यक्ति किस सामाजिक समूह का सदस्य है?
    (क) कामकाजी पेशेवर(ख) अधेड़ उम्र के वयस्क(ग) वरिष्ठ नागरिक(घ) युवा पीढ़ी
  8. 1 अंकअध्याय के अनुसार किसी व्यक्ति की आर्थिक वर्ग की सदस्यता किस पर निर्भर करती है?
    (क) सिर्फ़ राज्य पर जहाँ वह रहता है(ख) सिर्फ़ उसकी उम्र पर(ग) स्कूल के अंकों पर(घ) उसके माता-पिता के व्यवसाय और परिवार की आय पर

2 अभिकथन-कारण

अभिकथन-कारण
  1. 1 अंकअभिकथन (A): अपने भविष्य के करियर की चिंता करना, अपने-आप में एक सामाजिक मुद्दा है।
    तर्क (R): सामाजिक मुद्दा बड़े समूहों से जुड़ा होता है, न कि उसे अनुभव करने वाले एकल व्यक्ति से।

    (क) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता(ग) A सत्य है, पर R असत्य है(घ) A असत्य है, पर R सत्य है
  2. 1 अंकअभिकथन (A): अध्याय 4 मुख्यतः भारत में उपनिवेशवाद के इतिहास के बारे में है।
    तर्क (R): अध्याय 4 बाज़ार को एक शक्तिशाली संस्था के रूप में देखता है, जो संपूर्ण विश्व इतिहास में परिवर्तन का एक वाहक रहा है।

    (क) A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता(ग) A सत्य है, पर R असत्य है(घ) A असत्य है, पर R सत्य है

3 सुमेलन कीजिए

सुमेलन कीजिए
  1. 1 अंकसूची I (अध्याय) को सूची II (विषय) से मिलाइए।
    सूची I: (i) अध्याय 2 (ii) अध्याय 3 (iii) अध्याय 4 (iv) अध्याय 6
    सूची II: (1) सांस्कृतिक विविधता (2) जनसांख्यिकीय संरचना (3) जाति, जनजाति और परिवार (4) बाज़ार

    (क) i-2, ii-3, iii-4, iv-1(ख) i-3, ii-2, iii-1, iv-4(ग) i-1, ii-2, iii-3, iv-4(घ) i-2, ii-4, iii-3, iv-1
  2. 1 अंकसूची I (शब्द) को सूची II (अर्थ) से मिलाइए, जैसा अध्याय परिभाषित करता है।
    सूची I: (i) स्ववाचक (ii) व्यक्तिगत परेशानी (iii) सामाजिक मुद्दा (iv) भूलना
    सूची II: (1) बड़े समूहों से जुड़ा, व्यक्तियों से नहीं (2) समाज के वैज्ञानिक अध्ययन से पहले सहज बोध छोड़ना (3) अपनी ही दृष्टि को आलोचनात्मक ढंग से स्वयं की तरफ़ मोड़ना (4) एक व्यक्ति की चिंता जिसका अर्थ उसी तक सीमित है

    (क) i-3, ii-1, iii-4, iv-2(ख) i-2, ii-1, iii-4, iv-3(ग) i-4, ii-3, iii-2, iv-1(घ) i-3, ii-4, iii-1, iv-2

4 कथन आधारित प्रश्न

कथन आधारित प्रश्न
  1. 1 अंककथन I: स्ववाचक में समीक्षा अधिक और आत्म-मुग्धता कम होनी चाहिए।
    कथन II: स्ववाचक में आत्म-मुग्धता अधिक और समीक्षा कम होनी चाहिए।

    (क) कथन I असत्य है, कथन II सत्य है(ख) कथन I सत्य है, कथन II असत्य है(ग) दोनों कथन असत्य हैं(घ) दोनों कथन सत्य हैं
  2. 1 अंककथन I: अध्याय के अनुसार जाति और जनजाति भी सामाजिक नक्शे पर पहचान की मिसालें हैं।
    कथन II: अध्याय के अनुसार सिर्फ़ उम्र ही सामाजिक नक्शे पर व्यक्ति का स्थान तय करती है।

    (क) कथन I असत्य है, कथन II सत्य है(ख) दोनों कथन सत्य हैं(ग) कथन I सत्य है, कथन II असत्य है(घ) दोनों कथन असत्य हैं

5 काल-क्रम प्रश्न

काल-क्रम प्रश्न
  1. 1 अंकअध्याय के अपने तर्क को सही क्रम में लगाइए।
    1. यह सहज बोध अक्सर अपूर्ण और पूर्वाग्रहपूर्ण होता है
    2. समाज के बारे में सहज बोध हमें बड़े होते समय मिलता है
    3. इसलिए समाजशास्त्र के छात्र को पहले यह सहज बोध भुलाना पड़ता है
    4. यह ज्ञान हमारे अपने सामाजिक समूह के दृष्टिकोण से आता है

    (क) 4-2-1-3(ख) 2-4-1-3(ग) 3-1-2-4(घ) 1-2-3-4
  2. 1 अंकसही क्रम में लगाइए: कौन-सी पुस्तक पहले है, और हर एक में क्या है।
    1. दूसरी पुस्तक भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास बताती है
    2. यह समाजशास्त्र की दो पाठ्यपुस्तकों में से पहली है
    3. पहली पुस्तक भारतीय समाज की आधारभूत संरचना बताती है

    (क) 2-3-1(ख) 2-1-3(ग) 3-1-2(घ) 1-2-3

6 रिक्त स्थान

रिक्त स्थान
  1. 1 अंकअध्याय के अनुसार व्यक्तिगत परेशानियों और सामाजिक मुद्दों में फ़र्क़ बताने वाले समाजशास्त्री ______ हैं।
    (क) एम.एन. श्रीनिवास(ख) एमिल दुर्खीम(ग) मैक्स वेबर(घ) सी. राईट मिल्स
  2. 1 अंकअध्याय के अनुसार छात्र की उम्र या उससे कम उम्र के लोग भारत की लगभग ______ जनसंख्या हैं।
    (क) 10%(ख) 40%(ग) 60%(घ) 25%

7 असंगत चुनिए

असंगत चुनिए
  1. 1 अंकअध्याय के अनुसार इनमें से कौन-सा विषय ऐसा है जिसमें कोई भी शून्य से शुरुआत नहीं करता?
    (क) इतिहास(ख) समाजशास्त्र(ग) अर्थशास्त्र(घ) भूगोल

8 गद्यांश आधारित प्रश्न

गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश
एक छात्रा ने कहा, “मुझे तो पहले से पता है कि समाज कैसे चलता है, तो समाजशास्त्र मेरे लिए आसान विषय होगा।” अध्याय बताता है कि यह पूर्व-ज्ञान सहायक भी है और बाधक भी। हर कोई समाज में ही पलता-बढ़ता है, इसलिए कोई भी समाजशास्त्र को उस तरह शून्य से शुरू नहीं करता जैसे एक छः वर्षीय बच्चा इतिहास शून्य से शुरू करता है। लेकिन यही जान-पहचान एक समस्या भी है: बड़े होते समय हमें जो ज्ञान मिलता है वह हमारे अपने सामाजिक समूह के नज़रिए से मिलता है, इसलिए वह अक्सर सामाजिक वास्तविकता का सिर्फ़ एक हिस्सा दिखाता है, और सामान्यतः अपने ही समूह के हितों की तरफ़ झुका होता है। इसीलिए, अध्याय कहता है, समाजशास्त्र सीखना इसी सहज बोध को भुलाने से शुरू होता है।
  1. 1 अंकगद्यांश के अनुसार समाजशास्त्र को सही ढंग से सीखने से पहले क्या होना चाहिए?
    (क) छात्र के पास नौकरी होनी चाहिए(ख) छात्र को समाज के बारे में मौजूदा सहज-बोध को भुलाना चाहिए(ग) छात्र की उम्र अठारह साल से ज़्यादा होनी चाहिए(घ) छात्र को बाक़ी सभी विषय भूलने चाहिए
गद्यांश
(अभ्यास गद्यांश, पुस्तक से नहीं।) रोहन को चिंता है कि स्कूल के बाद उसे कौन-सा करियर चुनना चाहिए, और यह चिंता उसे रात में सोने नहीं देती। वहीं, उसके पूरे शहर में उसी आर्थिक पृष्ठभूमि के हज़ारों युवा भी यही अनिश्चितता झेल रहे हैं। अध्याय, समाजशास्त्री सी. राईट मिल्स का सहारा लेते हुए, हमें बताता है कि ये दोनों अलग-अलग तरह की चिंताएँ हैं, भले ही वे आपस में जुड़ी हों।
  1. 1 अंकइस गद्यांश में, रोहन की अपनी करियर की चिंता, मिल्स के शब्दों में, किस तरह की चिंता है?
    (क) सांस्कृतिक परिवर्तन(ख) सामाजिक मुद्दा(ग) व्यक्तिगत परेशानी(घ) जनसांख्यिकीय रुझान

9 सत्य-असत्य

सत्य-असत्य
  1. 1 अंकनिम्न कथनों पर विचार कीजिए।
    (i) अध्याय कहता है स्वनिरीक्षण आलोचनात्मक होना चाहिए।
    (ii) अध्याय कहता है समाज के बारे में सहज बोध कभी अपूर्ण नहीं होता।

    (क) दोनों सत्य हैं(ख) केवल (ii) सत्य है(ग) दोनों असत्य हैं(घ) केवल (i) सत्य है
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
  1. (ग) अध्याय साफ़ कहता है कि यह ज्ञान समाज में रहने और पलने-बढ़ने से आता है, अध्ययन करने से नहीं।
  2. (ग) अध्याय कहता है कि यह पूर्व-ज्ञान ख़ुद एक समस्या है, और समाजशास्त्र सीखने का प्रारंभिक चरण मुख्यतः इसे भुलाना ही है।
  3. (ख) भूलना यानी समाज के बारे में पहले से बने सहज बोध को छोड़ना, ताकि समाजशास्त्र का व्यवस्थित अध्ययन शुरू हो सके।
  4. (क) अध्याय के अनुसार सहज बोध उस सामाजिक समूह और वातावरण के दृष्टिकोण से आता है जिसमें हम समाजीकृत होते हैं।
  5. (क) अध्याय कहता है कि सहज बोध की आस्थाएँ अक्सर ‘अपूर्ण (संपूर्ण का विलोम)’ एवं ‘पूर्वाग्रहपूर्ण (निष्पक्ष का विलोम)’ होती हैं; ‘अपूर्ण’ के साथ ‘संपूर्ण का विलोम’ लिखा है।
  6. (ख) अध्याय इस क्षमता को स्ववाचक, या कभी-कभी आत्मवाचक कहता है।
  7. (घ) किताब का उदाहरण सत्रह-अठारह साल के व्यक्ति को ‘युवा पीढ़ी’ नामक सामाजिक समूह में रखता है।
  8. (घ) अध्याय कहता है आर्थिक वर्ग (जैसे निम्न मध्यम वर्ग या उच्च वर्ग) माता-पिता के व्यवसाय और परिवार की आय पर निर्भर करता है।
अभिकथन-कारण
  1. (घ) A असत्य है: अपने भविष्य की चिंता करना व्यक्तिगत परेशानी है, सामाजिक मुद्दा नहीं। R सत्य है, और यही बताता है कि A ग़लत क्यों है: सामाजिक मुद्दा बड़े समूहों से जुड़ा होता है, एक व्यक्ति से नहीं।
  2. (घ) A असत्य है: पूर्वदर्शन के अनुसार अध्याय 4 बाज़ार के सामाजिक-सांस्कृतिक आयामों को खोजता है; उपनिवेशवाद और फिर विकासशील नीतियाँ वे शक्तियाँ बताई गई हैं जिनसे सबसे गहरे आर्थिक परिवर्तन आए, जो भारत में बाज़ारों के उदय का संदर्भ है। R सत्य है: यह अध्याय 4 के बारे में किताब का अपना वर्णन है।
सुमेलन कीजिए
  1. (क) अध्याय 2 = जनसांख्यिकीय संरचना, अध्याय 3 = जाति/जनजाति/परिवार, अध्याय 4 = बाज़ार, अध्याय 6 = सांस्कृतिक विविधता।
  2. (घ) स्ववाचक = अपनी दृष्टि आलोचनात्मक ढंग से मोड़ना; व्यक्तिगत परेशानी = एक व्यक्ति की सीमित चिंता; सामाजिक मुद्दा = बड़े समूहों से जुड़ा; भूलना = सहज बोध छोड़ना।
कथन आधारित प्रश्न
  1. (ख) कथन I अध्याय की अपनी शर्त को सही बताता है। कथन II इसे उल्टा बताता है, इसलिए असत्य है।
  2. (ग) कथन I सत्य है: जाति/जनजाति अध्याय की एक पहचान-मिसाल है। कथन II असत्य है: उम्र सिर्फ़ एक पहचान है, अकेली नहीं।
काल-क्रम प्रश्न
  1. (ख) अध्याय का तर्क-क्रम है: हमें बड़े होते समय सहज बोध मिलता है, यह अपने समूह के नज़रिए से आता है, इसलिए यह अक्सर अपूर्ण और पूर्वाग्रहपूर्ण होता है, इसलिए इसे भुलाना पड़ता है, यानी 2-4-1-3।
  2. (क) अध्याय पहले बताता है कि दो पुस्तकें हैं, फिर कि पहली (यह पुस्तक) आधारभूत संरचना बताती है, और दूसरी सामाजिक परिवर्तन एवं विकास।
रिक्त स्थान
  1. (घ) अध्याय यह फ़र्क़ सी. राईट मिल्स से जोड़ता है, जिन्हें प्रसिद्ध अमेरिकी समाजशास्त्री बताया गया है।
  2. (ख) अध्याय का अपना आँकड़ा लगभग चालीस प्रतिशत है।
असंगत चुनिए
  1. (ख) अध्याय कहता है कि एक महत्त्वपूर्ण अर्थ में समाजशास्त्र अन्य विषयों से अलग है: छात्र को इसके बारे में पहले से कुछ पता होता है, बाक़ी तीन विषयों के विपरीत।
गद्यांश आधारित प्रश्न
  1. (ख) गद्यांश कहता है कि समाजशास्त्र सीखना इसी सहज बोध को भुलाने से शुरू होता है।
  2. (ग) रोहन की अपनी, निजी नज़रिए से बनी चिंता व्यक्तिगत परेशानी है, सामाजिक मुद्दा नहीं।
सत्य-असत्य
  1. (घ) (i) सत्य है, ठीक जैसा अध्याय बताता है। (ii) असत्य है: अध्याय यह कठिनाई बताता है कि सहज बोध अक्सर अपूर्ण और पूर्वाग्रहपूर्ण होता है।