कक्षा 12 समाजशास्त्र अध्याय 1 भारतीय समाज: एक परिचय NCERT समाधान (NCERT Solutions) हिंदी में

यह पृष्ठ आम तौर पर NCERT पाठ्यपुस्तक की अपनी प्रश्नावली के पूर्ण उत्तर देता है। NCERT की इस पाठ्यपुस्तक में अध्याय 1, भारतीय समाज: एक परिचय, के साथ कोई प्रश्नावली नहीं दी गई है। यह किताब की एक असली विशेषता है, इस पृष्ठ की कोई कमी नहीं।

इस अध्याय में प्रश्नावली क्यों नहीं है

NCERT की भारतीय समाज पाठ्यपुस्तक (Reprint 2026-27) अध्याय 1 को एक छोटे, चार पन्नों के परिचयात्मक अध्याय के रूप में छापती है। यह अध्याय 2 से 7 तक का पूर्वदर्शन देकर सीधे समाप्त हो जाता है, बिना किसी “प्रश्नावली” शीर्षक या क्रमांकित प्रश्नों के। CBSE के 2026-27 के कक्षा 12 समाजशास्त्र पाठ्यक्रम में इकाई 1 “भारतीय समाज: एक परिचय” को गैर-मूल्यांकित (Non-evaluative) बताया गया है।

1 अध्याय की समझ जाँचने वाले प्रश्न

चूँकि कोई आधिकारिक प्रश्नावली नहीं है, यहाँ अध्याय की अपनी विषयवस्तु से सीधे बनाए गए छोटे प्रश्न दिए गए हैं, हर एक का पूर्ण उत्तर सहित। इनका उपयोग वैसे ही करें जैसे आगे के किसी अध्याय में किताब की प्रश्नावली का करते।

प्रश्न 1

प्र. अध्याय के अनुसार एक महत्त्वपूर्ण अर्थ में समाजशास्त्र अन्य विषयों से अलग क्यों है?

उत्तर: क्योंकि समाजशास्त्र में कोई भी शून्य से शुरुआत नहीं करता, समाज के बारे में सभी को पहले से ही कुछ न कुछ पता होता है, इतिहास, भूगोल, मनोविज्ञान या अर्थशास्त्र के विपरीत, जिनके बारे में बच्चे से स्कूल से पहले कुछ जानने की उम्मीद नहीं की जाती।

प्रश्न 2

प्र. अध्याय के अनुसार समाज के बारे में हमारे सहज बोध की दो कठिनाइयाँ क्या हैं?

उत्तर: ये आस्थाएँ अक्सर अपूर्ण (संपूर्ण का विलोम) होती हैं, यानी अक्सर सामाजिक वास्तविकता का केवल एक हिस्सा दिखाती हैं; और पूर्वाग्रहपूर्ण (निष्पक्ष का विलोम) होती हैं, यानी सामान्यतः अपने ही सामाजिक समूह के हितों एवं मतों की तरफ़ झुकी होती हैं।

प्रश्न 3

प्र. स्ववाचक को परिभाषित कीजिए, और अध्याय इसके साथ कौन-सी शर्त जोड़ता है?

उत्तर: स्ववाचक (या आत्मवाचक) अपने बारे में सोचने, और अपनी दृष्टि को (जो कि अक्सर बाहर की तरफ़ होती है) लगातार अपनी तरफ़ घुमाने की क्षमता है। अध्याय की शर्त है कि यह स्वनिरीक्षण आलोचनात्मक होना चाहिए: समीक्षा अधिक और आत्म-मुग्धता कम।

प्रश्न 4

प्र. सी. राईट मिल्स के फ़र्क़ का उपयोग करते हुए व्यक्तिगत परेशानी और सामाजिक मुद्दे में अंतर समझाइए।

उत्तर: व्यक्तिगत परेशानी हर किसी की व्यक्तिगत चिंता, समस्या या सरोकार है, जिसका अर्थ एक व्यक्ति के अपने नज़रिए से बनता है; अध्याय के उदाहरण हैं परिवार या दोस्तों के व्यवहार से नाख़ुशी, या भविष्य की नौकरी की चिंता। सामाजिक मुद्दा, इसके विपरीत, बड़े समूहों से जुड़ा होता है, न कि उन एकल व्यक्तियों से जो उन समूहों के सदस्य हैं।

प्रश्न 5

प्र. पहली पुस्तक (यह पुस्तक) क्या बताती है, और दूसरी पुस्तक क्या बताती है?

उत्तर: पहली पुस्तक (यह पुस्तक) भारतीय समाज की आधारभूत संरचना का परिचय देती है। दूसरी पुस्तक भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास की विशिष्टताओं पर केंद्रित है।

प्रश्न 6

प्र. अध्याय 2 से 7 तक, हर अध्याय में क्या है, एक-एक पंक्ति में बताइए।

उत्तर: अध्याय 2, जनसांख्यिकीय संरचना: जनसंख्या और जनसांख्यिकी। अध्याय 3, सामाजिक संस्थाएँ: जाति, जनजाति और परिवार। अध्याय 4, बाज़ार एक सामाजिक संस्था: बाज़ार, जो पहले उपनिवेशवाद और फिर विकासशील नीतियों से आकार लेता है। अध्याय 5, सामाजिक विषमता एवं बहिष्कार: जाति, जनजाति, लिंग और अन्यथा सक्षम लोगों से जुड़ी विषमता। अध्याय 6, सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ: “विविधता में एकता” का कठिन पहलू। अध्याय 7, परियोजना कार्य के लिए सुझाव: पाठ्यक्रम के प्रयोगात्मक घटकों पर चिंतन के लिए छात्रों और शिक्षकों को कुछ सुझाव।