परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, प्रमुख उदाहरण, और पूरी पुस्तक का एक-पृष्ठीय पूर्वदर्शन। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 समाजशास्त्र अलग क्यों है
समाजशास्त्र, अन्य विषयों से अलग
सहायकछात्र पहले से कुछ जानते हैं, डरते नहीं
बाधकपहले सहज बोध को “भूलना” पड़ता है
क्यों भूलेंसहज बोध अक्सर अपूर्ण + पूर्वाग्रहपूर्ण होता है
2 सभी परिभाषाएँ एक जगह
सभी परिभाषाएँ एक जगह
भूलनासमाज को वैज्ञानिक ढंग से पढ़ने से पहले बने-बनाए सहज-बोध को छोड़ना (जैसे स्वेटर को दोबारा बुनने से पहले पुरानी बुनाई उधेड़ना)
अपूर्ण / पूर्वाग्रहपूर्णसहज बोध की दो कठिनाइयाँ: अपूर्ण (संपूर्ण का विलोम) और पूर्वाग्रहपूर्ण (निष्पक्ष का विलोम)
स्ववाचकअपनी दृष्टि को लगातार अपनी तरफ़ घुमाने की क्षमता; यह स्वनिरीक्षण आलोचनात्मक हो: समीक्षा अधिक, आत्म-मुग्धता कम
व्यक्तिगत परेशानीएक व्यक्ति के अपने नज़रिए तक सीमित चिंता
सामाजिक मुद्दाबड़े समूहों से जुड़ी बात, उन्हें बनाने वाले व्यक्तियों से नहीं
मिल्स की बातसमाजशास्त्र व्यक्तिगत परेशानियों एवं सामाजिक मुद्दों के बीच की कड़ियों एवं संबंधों को उजागर करने में मदद कर सकता है
3 सामाजिक नक्शा, एक नज़र में
~40%भारत की जनसंख्या छात्र की उम्र या उससे कम उम्र की है
2कक्षा 12 में समाजशास्त्र की पाठ्यपुस्तकें
6इस अध्याय के बाद पूर्वावलोकित अध्याय
| सामाजिक नक्शे पर पहचान | किताब का अपना उदाहरण |
|---|---|
| आयु वर्ग | “युवा पीढ़ी”; भारत की लगभग 40% जनसंख्या आपकी या आपसे छोटी उम्र के लोगों की है |
| क्षेत्रीय/भाषायी | गुजरात से गुजराती भाषी; आंध्र प्रदेश से तेलुगु भाषी |
| आर्थिक वर्ग | माता-पिता के व्यवसाय व आय पर आधारित, निम्न मध्यम या उच्च वर्ग |
| धार्मिक/जातीय/जनजातीय | कोई विशेष धार्मिक समुदाय, जाति या जनजाति |
4 पूरी पुस्तक का पूर्वदर्शन, एक तालिका में
| पुस्तक | क्या बताती है |
|---|---|
| पहली पुस्तक (यह पुस्तक) | भारतीय समाज की आधारभूत संरचना |
| दूसरी पुस्तक | भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास |
| अध्याय | विषय |
|---|---|
| 2 | जनसांख्यिकीय संरचना (भारत: विश्व में दूसरा, चीन को पीछे छोड़ने का अनुमान) |
| 3 | जाति, जनजाति और परिवार |
| 4 | बाज़ार (पहले उपनिवेशवाद, फिर विकासशील नीतियाँ) |
| 5 | विषमता एवं बहिष्कार: जाति, जनजाति, लिंग, अन्यथा सक्षम |
| 6 | सांस्कृतिक विविधता: “विविधता में एकता” का कठिन पहलू |
| 7 | परियोजना कार्य के लिए सुझाव (पाठ्यक्रम के प्रयोगात्मक घटक) |
त्वरित दोहराव: परीक्षा से एक रात पहले यही पढ़ें
- एक महत्त्वपूर्ण अर्थ में समाजशास्त्र अन्य विषयों से अलग है: इसमें कोई भी शून्य से शुरुआत नहीं करता
- पूर्व-ज्ञान सहायक भी (डर नहीं लगता) और बाधक भी (भूलना पड़ता है)
- सहज बोध = अक्सर अपूर्ण + पूर्वाग्रहपूर्ण
- स्ववाचक = अपनी दृष्टि को लगातार अपनी तरफ़ घुमाना, आलोचनात्मक ढंग से (समीक्षा अधिक, आत्म-मुग्धता कम)
- सी. राईट मिल्स: व्यक्तिगत परेशानी (एक व्यक्ति) बनाम सामाजिक मुद्दा (बड़े समूह)
- पहली पुस्तक = भारतीय समाज की आधारभूत संरचना; दूसरी पुस्तक = सामाजिक परिवर्तन एवं विकास
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री